
छत्तीसगढ़। Funeral: छत्तीसगढ़ के छिंदवाड़ा में अपने पिता का अंतिम संस्कार करने के लिए बेटे ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। बेटे का कहना है कि गांव वाले उसके मृत पिता को दफनाने नहीं दे रहे हैं। उसके पिता की मृत्यु को बारह दिन बीत चुके हैं, लेकिन उनका शरीर अभी भी मुर्दाघर में पड़ा हुआ है। यह मामला छत्तीसगढ़ के बस्तर जिले से सामने आया है। दलित समुदाय से आने वाले रमेश बघेल ने अपने पिता को गांव के कब्रिस्तान में दफनाने की इजाजत मांगी है।
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रमेश बघेल ने सबसे पहले छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट में याचिका दायर की थी। वहां से निराश हाथ लगने पर उसने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। सुप्रीम कोर्ट ने इस मुद्दे पर छत्तीसगढ़ सरकार से जवाब मांगा है।
भेदभाव का मामला
रमेश बघेल का केस शहर के फेमस वकील प्रसाद चौहान ने लड़ रहे हैं। प्रसाद चौहान का कहना है कि यह पूरी तरह से भेदभाव का मामला है। बस्तर में ऐसी कई घटनाओं का खुलासा हुआ। सरकार इन सबके बारे में जानती है, फिर भी कार्रवाई नहीं करती है। यही वजह है कि राज्य में भेदभाव के मामले लगातार बढ़ रहे हैं। बता दें कि 18 जनवरी को रमेश बघेल के पिता सुभाष बघेल का निधन हो गया था। सुभाष बघेल की अंतिम इच्छा थी कि उन्हें परिवार के अन्य सदस्यों की कब्रों के बगल में दफनाया जाये, लेकिन तमाम कोशिशों के बावजूद रमेश अपने पिता की इच्छा पूरी नहीं कर पा रहे हैं। गांव के लोग उस कब्रिस्तान में सुभाष का शव दफनाने नहीं दे रहे हैं।
तीन दशक पहले अपना लिया था ईसाई धर्म
दरअसल, रमेश बघेल के दादा ने करीब तीन दशक पहले ईसाई धर्म अपना लिया था। रमेश के दादा समेत कई रिश्तेदारों के शव छिंदवाड़ा कब्रिस्तान में दफन हैं। हालांकि, अब उन्हें अपने पिता के शव को दफनाने की इजाजत नहीं मिल रही है। रमेश बघेल का कहना है कि मेरे पिता की आखिरी इच्छा थी कि उनकी मृत्यु के बाद उनके शरीर को उनके परिवार के सदस्यों की कब्र के बगल में दफनाया जाए। अभी दो साल पहले सब कुछ ठीक ठाक चल रहा था, लेकिन अब हमारे गांव के लोगों ने ईसाई धर्म का बहिष्कार कर दिया है। उनका कहना है कि धर्म परिवर्तन के कारण हमें कब्रिस्तान में जाने की इजाजत नहीं देंगे।
सुप्रीम कोर्ट ने एक फैसला सुनाया है
छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय ने मामले में फैसला सुनाते हुए कहा कि छिंदवाड़ा के पास एक ईसाई कब्रिस्तान है, वह अपने पिता का अंतिम संस्कार ईसाई धर्म के अनुसार कर सकते हैं। हालांकि गांव में जबरन दफ़नाने से समाज में व्यापक अशांति फैल सकती है और माहौल खराब हो सकता है।
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