
Snoring Effects: खर्राटे लेना एक आम समस्या है। आमतौर पर हर घर में कम से कम एक व्यक्ति तो ऐसा होता ही है जो खर्राटे लेता है। कई लोग इतनी तेज़ खर्राटे लेते हैं कि उनके आस-पास के लोग सो भी नहीं पाते हैं, लेकिन क्या आप जानते हैं कि यह मामूली सी लगने वाली समस्या बहुत गंभीर हो सकती है? खर्राटे किसी को भी प्रभावित कर सकते हैं, लेकिन यह कोई बीमारी नहीं है। ऐसा माना जाता है कि वृद्ध लोगों में खर्राटे लेना अधिक आम है। आइए जानते हैं एक्सपर्ट क्या कहते हैं। एक्सपर्ट के कहना है कि ये कुछ गंभीर बीमारियों का संकेत भी सकता है।
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इस वजह से आते हैं खर्राटे
रात को सोते समय गर्दन की मांसपेशियों पर दबाव पड़ने के कारण खर्राटे आते हैं। वास्तव में, कुछ लोगों को रात में सांस लेने में कठिनाई होती है। उन्हें नाक से सांस लेने में कठिनाई महसूस होती है, जिससे खर्राटे आने लगते हैं। कुछ लोगों को रात में नाक बंद होने और खर्राटे आने की समस्या होती है। वृद्ध लोग अधिक खर्राटे लेते हैं क्योंकि उनकी मांसपेशियां कमजोर हो जाती हैं और वे शारीरिक रूप से कम सक्रिय होते हैं।
इन बीमारियों का रहता है खतरा
हृदय रोग
एक्सपर्ट का कहना है कि खर्राटे लेना खराब स्वास्थ्य का संकेत है, जो लोग कम एक्सरसाइज करते हैं, असंतुलित आहार लेते हैं या अधिक वजन वाले हैं, उनमें खर्राटे लेने की समस्या अधिक होती है। इन लोगों को, खासतौर पर जो युवा हैं, उन्हें ज्यादा खर्राटे आना हार्ट फेलियर और हार्ट अटैक के जोखिम को बढ़ाता है।
मधुमेह
डॉक्टरों का कहना है कि खर्राटे और स्लीप एपनिया (एक प्रकार का नींद विकार) के कारण शारीरिक गतिविधि और इंसुलिन का प्रभाव गलत तरीके से होता है, जिससे खर्राटे लेने वालों में डायबिटीज का खतरा बढ़ जाता है क्योंकि शरीर शुगर को सही तरीके से प्रोसेस नहीं कर पाता है।
उच्च रक्तचाप
विशेषज्ञों के अनुसार, अत्यधिक खर्राटे लेने का मतलब रक्तचाप विकार भी हो सकता है। इन लोगों में उच्च रक्तचाप विकसित हो जाता है क्योंकि खर्राटे लेने से रक्त में ऑक्सीजन की मात्रा कम हो जाती है। खर्राटे अक्सर हृदय में रक्त के प्रवाह को धीमा कर देते हैं और दिल के दौरे का कारण बनते हैं। इसके अलावा, ज्यादा खर्राटे लेने से डिप्रेशन, मेमोरी लॉस या सुबह के समय सिर में दर्द की समस्या होने का भी जोखिम रहता है।
खर्राटों को कैसे कम करें
- अपनी सोने की स्थिति बदलें और पीठ के बल कम सोएं।
- नमी बनाए रखने में मदद के लिए अपने कमरे ह्यूमिडिफायर लगवाएं।
- अच्छी आदतों का पालन करें जैसे धूम्रपान और शराब का सेवन कम करना।
- वजन पर नियंत्रण भी जरूरी है।
- यदि समस्या अधिक गंभीर हो जाए तो चिकित्सक से सलाह लें।
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