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डिजिटल अरेस्ट में साइकोलॉजीकल दबाव बनाते हैं ठग
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लीगल लिट्रेसी क्लब के तत्वावधान में हुई कार्यशाला
अम्बिकापुर। Cyber Security: प्रत्येक नागरिक को साइबर सिक्योरिटी और सड़क सुरक्षा से अवगत होना जरूरी है। इन दोनों अपराधों की संख्या लगातार बढ़ रही है। यह बातें शनिवार को श्री साई बाबा आदर्श स्नातकोत्तर महाविद्यालय में लीगल लिट्रेसी क्लब के तत्वावधान में सड़क सुरक्षा और साइबर सिक्योरिटी विषय पर आयोजित कार्यशाला के दौरान मुख्य अतिथि अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक अमोलक सिंह ढिल्लो ने कही।
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इन देशों से सबसे ज्यादा आते हैं फेक कॉल

उन्होंने कहा कि डिजिटल सावधान रहते हुए प्रलोभन से बचना होगा। उन्होंने बताया कि साइबर फ्राड करने वाले झूठे सपनों के चंगुल में फंसाते हैं। गांधीनगर क्षेत्र में सबसे ज्यादा साइबर अपराध होते हैं। भारत में सबसे ज्यादा साइबर ठगों के फेक कॉल कम्बोडिया, थाइलैंड, मलेशिया से आते हैं।

उन्होंने बताया कि किसी अपरचित लिंक पर क्लिक मत कीजिये और बिना परखे विश्वास मत कीजिये। ठग हमेशा सम्पति, विचार के साथ खेलता है, उससे सावधान रहना होगा। डिजिटल अरेस्ट में साइकोलॉजीकल दबाव बनाया जाता है जिससे बचना है।

इससे पहले अतिथियों ने मां सरस्वती और श्री साई नाथ की तस्वीर पर माल्यार्पण और दीप प्रज्ज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया। अतिथियों का स्वागत बैच लगा कर तथा पुष्पगुच्छ प्रदान कर किया गया।
सड़क हो या साइबर, सुरक्षा जरूरी
कार्यक्रम को सम्बोधित करते हुए प्राचार्य डॉ. राजेश श्रीवास्तव ने कहा कि जीवन के लिये सुरक्षा जरूरी है जो सड़क पर हो या साइबर दुनिया की हो। डॉ. श्रीवास्तव ने कहा कि जब सुरक्षा के मानकों की नयी तैयारी की जाती है तो साइबर ठग नये पैतरें के साथ अपराध की दुनिया में शामिल हो जाते हैं। उन्होंने कहा कि डिजिटल अरेस्ट, साइबर ठगी जैसे मामलों में सावधनी से बचा जा सकता है।
इस दौरान प्राचार्य डॉ. राजेश श्रीवास्तव, एनईपी प्रभारी डॉ. आरएन शर्मा तथा लीगल लिट्रेसी क्लब के प्रभारी डॉ. दिनेश शाक्य ने अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक अमोलक सिंह ढिल्लो तथा डॉ. महेश मिश्रा को स्मृति चिह्न प्रदान कर सम्मानित किया। कार्यक्रम का संचालन मीनल सिंह तथा रागिनी शर्मा ने किया। इस अवसर पर सभी प्राध्यापक और विद्यार्थी उपस्थित रहे।
सावधानी से बढ़ेगी सड़क सुरक्षा: डॉ. महेश

राष्ट्रपति पदक से सम्मानित यातायात विभाग में सेवाएं दे रहे डॉ. महेश मिश्रा ने कहा कि सड़कों की मूक भाषा होती है, उसकी इंजीनियंरिग, शिक्षा, कार्यवाही से यातायात सुलभ होता है। डॉ. मिश्रा ने बताया कि देश में 5 लाख से अधिक सड़क दुर्घटनाएं प्रतिवर्ष होती है जिसमें लगभग 2 लाख लोगों की मौत हो जाती है।
भारत में दुनिया के वाहनों की एक फीसदी भागीदारी है लेकिन 12 फीसदी दुर्घटना यहां होती है। सड़कों की हालत, मवेशी, नशा, गति दुर्घटनाओं के लिए जिम्मेदार हैं। उन्होंने विद्यार्थियों का आह्वान करते हुए कहा कि लाइसेंस, इंश्योरेंस, प्रदूषण नियंत्रण जांच के प्रमाणपत्र अवश्य होने चाहिए। डॉ. मिश्रा ने वाहन स्वामी, यातायात के नियम, गोल्डल आवर, मिलने वाली सुविधाओं के बारे में बताया।
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