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Horror Ragging: फर्स्ट ईयर के छात्रों को नग्न खड़ा रखते थे सीनियर्स, मांगते थे शराब के लिए पैसे, पीटते भी थे

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Horror Ragging

केरल। Horror Ragging: रैंगिंग एक ऐसा शब्द जिसे सुनकर किसी भी स्टूडेंट के पसीने छूट जाते हैं। वहीं पेरेंट्स भी बच्चों को नये कालेज में एडमिशन दिलाने और हॉस्टल भेजने से डरते हैं। दरअसल, बीते कुछ वर्षों में रैगिंग के कुछ ऐसा मामले आ चुके हैं जिन्होंने देश को झकझोर दिया है। हालांकि इसे रोकने के लिए कई कानून भी बनाये गये हैं, लेकिन उनका सख्ती से पालन न किये जाने की वजह से आज भी रैगिंग की ऐसी वीभत्स घटनाएं सामने आ रही हैं, जिससे एक सभ्य देश की गरिमा को ठेस पहुंच रही है। वहीं किसी परिवार को अपने जिगर के टुकड़े से हाथ धोना पड़ रहा है।

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तीन महीने से लगातार हो रही थी रैंगिंग

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इतने कानूनों के बावजूद देश में आये दिन रैगिंग से परेशान होकर आत्महत्या कर रहे स्टूडेंट्स की संख्या में कोई कमी नहीं आ रही है। अब देश के सबसे शिक्षित राज्यों में शुमार केरल में रैंगिंग से परेशान होकर छात्रों ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई है। बताया जा रहा है कि यहां के फर्स्ट ईयर के छात्रो को रैगिंग के नाम पर ऐसा प्रताड़ित किया जा रहा है कि वे पूरी तरह से परेशान हो चुके थे। पुलिस की पूछताछ में जूनियर छात्रों ने बताया कि 2024 यानी पिछले साल नबंवर महीने में उनके रैगिंग शुरू हुई थी, जो लगातार चल रही थी।

पुलिस ने आरोपी छात्रों को किया अरेस्ट

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बता दें कि राज्य के कोट्टायम स्थित एक सरकारी नर्सिंग कॉलेज में फर्स्ट ईयर के छात्र रैगिंग से बुरी तरह से परेशान हो गये। इस घटना के लिए जिम्मेदार थर्ड ईयर के पांच छात्रों को गिरफ्तार किया गया है। रैगिंग से परेशन जूनियर छात्रों ने पुलिस को बताया कि करीब तीन महीने से लगातार उनकी रैगिंग की जा रही थी। इससे तंग आकर अब उन्होंने शिकायत दर्ज कराई है। केरल के कोट्टायम के सरकारी नर्सिंग कॉलेज में हो रही रैगिंग से परेशान तिरुवनंतपुरम के रहने वाले फर्स्ट ईयर के तीन छात्रों ने गांधीनगर पुलिस थाने में एफआई आर दर्ज कराई, जिसमें उन्होंने बताया है कि  पिछले तीन महीने से उनके साथ हिंसक रैगिंग की जा रही है। छात्रों की इस शिकायत को सुनकर पुलिस और कॉलेज प्रशासन के कान खड़े हो गये और तत्काल एक्शन लेते हुए आरोपी छात्रों को कॉलेज से सस्पेंड कर दिया गया। साथ ही एंटी रैगिंग एक्ट के तहत उन्हें गिरफ्तार भी कर लिया गया।

घाव पर लगाते थे दर्द बढ़ाने वाला लोशन

कुछ रिपोर्ट्स में बताया जा रहा  है कि फर्स्ट ईयर के छात्रों ने पुलिस को दी गई शिकायत में बताया है कि सीनियर स्टूडेंट उन्हें नग्न होकर खड़ा रखते थे। ऐसा न करने पर उनके साथ मारपीट की जाती थी, उन पर कई बार ज्योमेट्री बाक्स से भी हमला किया गया है, जिससे उन्हें घाव हुआ, तो सीनियर्स ने उनके घावों पर कुछ ऐसा लोशन लगाया जिससे वे दर्द से तड़प उठे। छात्रों ने बताया कि जब वे दर्द से चिल्लाने लगते थे तो सीनियर्स उनके मुंह में जबरन कपड़ा ठूंस देते थे। ये भी आरोप है कि सीनियर छात्रों ने इस दौरान का उनका वीडियो भी बनाया है, जिससे जरिये उनका पूरा भविष्य बर्बाद करने की धमकी भी देते थे।

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छात्रों ने की पुलिस में की शिकायत 

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पीड़ित छात्रों ने पुलिस को दिए गये शिकायती पत्र में ये भी बताया है कि हर रविवार को सीनियर छात्र,  जूनियर्स से यानी उन सबसे से शराब खरीदने के लिए पैसे वसूलते थे और जब उनमें से कोई पैसे देने से इनकार करता था, तो उनके साथ बेहद बुरी तरह से मारपीट की जाती थी। बताया जा रहा है कि हद से ज्यादा बढ़ रही इस घटना से परेशान होकर एक छात्र ने इसका जिक्र अपने पिता से कर दिया, जिसके बाद उसके पिता ने उसे समझाया कि वह सब मिलकर इसकी शिकायत पुलिस में करें। फ़िलहाल, पुलिस ने सभी पांचों आरोपी छात्रों को गिरफ्तार कर लिया है और अब उन्हें कोर्ट के सामने पेश किया जाएगा।

यूजीसी ने बनाये हैं कठोर कानून

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गौरतलब है कि उच्च शिक्षण संस्थानों खासकर इंजीनियरिंग और मेडिकल कॉलेजों में होने वाली वीभत्स रैगिंग को देखते हुए यूजीसी ने इसके खिलाफ कई कठोर कानून भी बनाये हैं, लेकिन मौजूदा हालत को देखकर कहीं से भीं नहीं का जा सकता है कि इन कानूनों का सख्ती से पालन किया जा रहा है। वहीं बहुत ऐसे अभिभावक और स्टूडेंट ऐसे भी हैं जिन्हें इन कानूनों की जानकारी तक नहीं है और न ही कभी स्कूल और कॉलेज में बच्चों को इस बारे में जागरूक किया जाता है। आइए जानते हैं क्या हैं वे नियम जो रैगिंग को रोकने के लिए यूजीसी द्वारा बनाए गये हैं और जिनकी जानकारी हर छात्र और अभिभावक को होनी चाहिए।

ये व्यवहार माना जायेगा रैंगिंग
  •  अगर किसी संस्थान या हॉस्टल में किसी स्टूडेंट चाहे वह लड़की हो या लड़का के रंगरूप और पहनावे को लेकर  टिप्पणी की जाती है जिससे उसका स्वाभिमान आहत होता है या फिर उसे अजीबोगरीब नाम से पुकारा जाता है या प्रताड़ित किया जाता है तो ये रैगिंग एक्ट के दायरे में आता है।
  • किसी स्टूडेंट के साथ उसकी क्षेत्रीयता, भाषा या जाति के आधार पर अपमान जनक शब्दों का प्रयोग करना या प्रचलित करना भी रैगिंग माना जायेगा।
  • किसी छात्र की नस्ल, पारिवारिक अतीत या आर्थिक पृष्ठभूमि के नाम पर उसे बेइज्जत करना रैगिंग की श्रेणी में आता है।
  • छात्राओं खासकर नई छात्राओं को अटपटे नियम बनाकर उन्हें परेशान करना या अपमानित करने वाले टास्क देना भी रैगिंग माना जाएगा।
  • यूजीसी ने रैंगिंग के खिलाफ बनाए गए अपने नियम में स्पष्ट कहा है कि अगर धर्म, जाति या क्षेत्रीयता के आधार पर किसी छात्र  के साथ अपमानजनिक मजाक करना भी रैंगिंग की श्रेणी में माना जायेगा।
 इस तरह के दंड का है प्रावधान

यूजीसी ने स्पष्ट कहा कि, अगर कॉलेज प्रशासन रैगिंग की शिकायत नहीं सुनता है या फिर छात्र की समस्या नहीं हल कर पाता है तो पीड़ित छात्र  बिना किसी डर के यूजीसी के पास जा सकते हैं। वहां से उन्हें पूरी मदद मिलेगी।

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यूजीसी का स्पष्ट कहना है कि दोषी पाये जाने वाले स्टूडेंट्स के खिलाफ रैगिंग रेग्यूलेशन एक्ट के तहत कार्रवाई की जाएगी। इसका एक उदाहरण कानपुर आईआईटी के 22 छात्रों को मिली सजा के तौर पर देखा जा सकता है। रैगिंग के खिलाफ सबसे कड़ी सजा के तौर पर दोषी को तीन साल तक सश्रम  कारावास दिया जा सकता है। बता दें कि, साल 2009 में हिमाचल के धर्मशाला के राजेंद्र प्रसाद मेडिकल कॉलेज में  रैगिंग और प्रताड़ना से परेशान छात्र अमन काचरू की मौत ने देश को हिला दिया था। काचरू की मौत मामले को सुप्रीम कोर्ट ने खुद संज्ञान लेते हुए रैगिंग के खिलाफ कानून बनाने के लिए एक उपसमिति को गठित किया था। इस समिति ने अपनी रिपोर्ट में रैगिंग को शिक्षा व्यवस्था का सबसे बड़ा दाग बताया था और इसके खिलाफ कड़े नियम बनाने की सिफारिश की थी। साथ ही रैगिंग की परिभाषा बनाए जाने पर भी बल दिया था।

 

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