
नई दिल्ली। Tariffs On American Wine: टैरिफ को लेकर भारत पर कई बार निशाना साध चुके पीएम मोदी के दोस्त और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अब भारत में अमेरिकी शराब पर 150% टैरिफ का मुद्दा जोरदार ढंग से उठा दिया है। ऐसे में अगर भारत की मोदी सरकार ट्रम्प के दबाव में अमेरिकी शराब पर से टैरिफ घटाती है, तो आने वाले समय में शराब सस्ती हो सकती है।
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अमेरिकी शराब पर 150% टैरिफ पर असंतोष
मंगलवार 11 मार्च को व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव कैरोलिन लेविट ने एक प्रेस कांफ्रेंस में भारत द्वारा अमेरिकी शराब पर 150% और कृषि उत्पादों पर 100% टैरिफ का जिक्र किया था। यह बयान तब आया जब उनसे कनाडा के साथ व्यापारिक संबंधों पर सवाल पूछा गया था, जिसका जवाब देते हुए उदहारण के तौर पर उन्होंने भारत और जापान जैसे देशों का नाम लिया।

पत्रकारों के सवालों का जवाब देते हुए लेविट ने आगे कहा, भारत में अमेरिकी शराब पर 150% का टैरिफ लगाया है। मुझ नहीं लगता कि इससे केंटकी बोर्बन (यूएस ब्रांड की शराब) को भारत में निर्यात करने में मदद मिल रही है? इसके अलावा भारत के कृषि उत्पादों पर 100% टैरिफ और जापान में चावल पर 700% टैरिफ है।” प्रेस कांफ्रेंस में लैविट ने एक चार्ट भी दिखाया, जिसमें भारत, कनाडा और जापान द्वारा लगाए गए टैरिफ को हाइलाइट किया गया था। चार्ट में भारत के टैरिफ को विशेष रूप से तिरंगे के रंगों से चिह्नित किया गया था।
भारत-अमेरिका व्यापार संबंधों में आ सकता है तनाव
बात दें कि, एक तरफ तो अमेरिका अपने व्यापारिक साझेदारों के साथ संबंधों को फिर से परिभाषित करने का प्रयास कर रहा है। वहीं, दूसरी तरफ व्हाइट हाउस से ये बयान जारी किया गया है, जो भारत-अमेरिका व्यापार संबंधों में तनाव पैदा कर सकता है। एक्सपर्ट्स का कहना है कि आने वाले दिनों में दोनों देशों के बीच इस मुद्दे पर बातचीत तेज हो सकती है।
ऊंचे टैरिफ की आलोचना कर रहे ट्रंप

गौरतलब है कि, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की जब से व्हाइट हाउस में वापसी हुई है, वे लगातार भारत द्वारा लगाये जा रहे ऊंचे टैरिफ का जिक्र कर उस पर निशाना साध रहे हैं। ट्रंप का ये भी कहना है कि भारत, अमेरिका से इतना ज्यादा टैरिफ वसूलता है, वह उन्हें मान्य नहीं है। बीते शुक्रवार को उन्होंने दावा किया था कि, भारत ने टैरिफ कम करने पर सहमति जता दी है। हालांकि भारत सरकार द्वारा अभी तक इसकी अधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है।
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कनाडा दशकों से उचित व्यवहार नहीं कर रहा
लेविट ने कहा, “राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प पारस्परिकता (रेसिप्रॉसिटी) में विश्वास रखते हैं। इस समय हमें एक ऐसे राष्ट्रपति की जरूरत है, जो अमेरिकी व्यवसायों और कामगारों के हितों की रक्षा करे। ट्रम्प वहीं कर रहे हैं। वे बस इतना चाहते हैं कि व्यापार नीतियां निष्पक्ष और संतुलित हों। जहां तक कनाडा की बात है, वह पिछले कई दशकों से हमारे साथ उचित व्यवहार नहीं कर रहा था।”
2018 में भी आया था टैरिफ मुद्दा

बता दें कि अमेरिका हमेशा से भारत को ‘टैक्स किंग’ कहकर उसकी आलोचना करता रहा है। साल 2018 में अमेरिका ने भारतीय स्टील पर 25 प्रतिशत और एल्यूमीनियम पर 10 प्रतिशत का टैरिफ लगाया था। इसके जवाब में भारत ने अमेरिकी उत्पादों (जैसे बादाम और सेब) पर टैरिफ में इजाफा कर दिया था। इसके बाद साल 2019 में अमेरिका ने उत्पादों के शुल्क में छूट मिलने वाली सामान्यीकृत वरीयता प्रणाली (GSP) से हटा दिया, जिसके बाद दोनों देशों के बीच तनाव बढ़ गया था।
अमेरिका करेगा जवाबी कार्रवाई
अब राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप आये दिन भारत के भारी भरकम टैरिफ का जिक्र कर रहे हैं अपना असंतोष जता रहा हैं। ट्रंप से अब “पारस्परिकता” (reciprocity) की मांग की है। व्हाइट हाउस ने भी भारत के 150% शराब टैरिफ को उदाहरण के रूप में पेश किया, जिसे वह अमेरिकी व्यवसायों के लिए नुकसानदायक मानता है। भारत के ऊंचे टैरिफ की आलोचना करते हुए ट्रंप ने ये भी संकेत दिया है कि, अगर भारत अमेरिकी वस्तुओं जैसे शराब, मोटरसाइकिल और कृषि उत्पादों पर से टैरिफ कम नहीं करता है, तो अमेरिका भारतीय निर्यात पर जवाबी कार्रवाई करेगा और टैरिफ बढ़ाएगा।
इन चीजों का निर्यात करता है भारत

बता दें कि, भारत, अमेरिका को दवाइयां, कपड़ा, रत्न-आभूषण और ऑटोमोबाइल पार्ट्स जैसे उत्पाद निर्यात करता है। ऐसे में यदि इन पर टैरिफ बढ़ता है, तो भारत का $54 बिलियन (2022-23) का निर्यात प्रभावित हो सकता है। महंगे टैरिफ से भारतीय उत्पाद अमेरिकी बाजार में ऊंचे दामों पर बिकने लगेंगे, जिससे उनकी बिक्री घट सकती है और चीनी या अन्य देशों के सस्ते विकल्प उनकी जगह ले सकते हैं। भारत का अमेरिका के साथ व्यापार अधिशेष (surplus) है।
भारत को होगा आर्थिक नुकसान
बीते वित्तीय वर्ष यानी 2022-23 में भारत ने $54 बिलियन का निर्यात किया था, जबकि $32 बिलियन का आयात किया था। अब ट्रम्प की ये नईनीति इस संतुलन को बिगाड़ सकती है, जिससे भारत को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है। परिणामस्वरूप भारत और अमेरिका के बीच व्यापारिक तनाव बढ़ सकता है। इसके अलावा भारत में अमेरिकी कंपनियों के निवेश में कमी आ सकती है, जो भारत के “मेक इन इंडिया” जैसे अभियानों को प्रभावित कर सकती है।
प्रभावित हो सकती है दवा निर्यात इंडस्ट्री

भारत, अमेरिका को बड़े स्तर पर जेनेरिक दवाओं का निर्यात करता है। यदि अमेरिका, भारत की वस्तुओं पर टैरिफ बढ़ाता है या सख्त नियम लागू करता है, तो भारत की $20 बिलियन की दवा निर्यात इंडस्ट्री को भी झटका लगेगा। भारत, बादाम, अखरोट और फल जैसे उत्पाद भी अमेरिका को निर्यात करता है। जवाबी टैरिफ से इसके भी दाम बढ़ सकते हैं, जिससे मांग में कमी आ सकती है। इससे भारतीय किसानों को नुकसान होगा। अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प पहले H-1B वीजा पर सख्ती कर चुके हैं। अगर उनकी नीति भारतीय आईटी पेशेवरों को सीमित करती है, तो भारत की $100 बिलियन की आईटी सेवा इंडस्ट्री पर बुरा असर पड़ेगा।
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