
नई दिल्ली। Gold Prices Will Decrease!क्या 55,000 रुपये तक पहुंचेगी सोने की कीमत? क्या सोने की कीमतों के मामले में समय 2 साल पीछे चला जाएगा? 2023 में 10 ग्राम सोने की कीमत लगभग इतनी ही होगी. शायद ऐसा हो सकता है. एक अमेरिकी विश्लेषणात्मक कंपनी ने भी कुछ ऐसा ही अनुमान लगाया है, लेकिन, ऐसा क्यों होगा, क्या इसकी वजह ईरान-अमेरिका, रूस-यूक्रेन युद्ध, बांग्लादेश में तख्तापलट या इजरायल-हमास युद्ध है, जिसके खत्म होने की उम्मीद है और अगर ये युद्ध खत्म हो गये तो सोना सस्ता हो जायेगा। आइए समझते हैं पूरा गणित।
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38 फीसदी तक आ सकती है गिरावट

अमेरिकी कंपनी मॉर्निंगस्टार के विश्लेषकों ने अनुमान लगाया है कि, अगले कुछ सालों में सोने की कीमतों में 38 फीसदी तक की गिरावट आ सकती है। भारत में 24 कैरेट सोने की कीमत करीब 90,000 रुपये प्रति 10 ग्राम है। वहीं अंतरराष्ट्रीय बाजार में यह 3,100 डॉलर से ऊपर है। अगर सोने की कीमत में 40 फीसदी की गिरावट आती है, तो भारत में यह करीब 55,000 रुपये प्रति 10 ग्राम पर आ सकता है।
सुरक्षित निवेश माना जाता है सोना
इसकी एक बड़ी वजह यह है कि, दुनिया पिछले कई सालों से युद्ध, महामारी, महंगाई और आर्थिक अनिश्चितता के कारण उतार-चढ़ाव का सामना कर रही है। चूंकि युद्ध या संघर्ष के दौरान सोने को सुरक्षित निवेश माना जाता है। चीन के साथ अमेरिका का व्यापार युद्ध भी इसकी एक बड़ी वजह माना जा रहा है।
युद्ध की वजह से बढ़े सोने के दाम
साल 2018 में यूक्रेन ने इस क्षेत्र पर रूस के कब्जे की घोषणा की। संघर्ष के इन पहले आठ वर्षों में नौसैनिक घटनाएं और साइबर युद्ध भी शामिल थे। 20 फरवरी 2022 को रूस ने यूक्रेन के कुछ हिस्सों पर आक्रमण कर कब्जा कर लिया। यह युद्ध दरअसल, 2014 में शुरू हुआ था, जब फरवरी 2014 में रूसी सैनिकों ने यूक्रेन के स्वायत्त गणराज्य क्रीमिया पर गुप्त रूप से आक्रमण किया था। इसके बाद से अक्सर ही छिटपुट युद्ध होते रहे हैं। आधिकारिक तौर पर इसकी शुरुआत 2022 में हुई। तब से दूसरे विश्व युद्ध की आशंका के चलते सोने की कीमत में बढ़ोतरी होती रही।
2023 में 55 हजार में था सोना
साल 2023 में सोना करीब 55 हजार ही था, लेकिन पिछले दो साल में यह करीब दोगुना हो गया है। पिछले कई सालों से इजरायल और हमास के बीच चल रहे युद्ध के दौरान सोने की चमक लगातार बढ़ती रही। पिछले साल अक्टूबर तक सोना 76000 को पार कर गया था, जो अब 90 हजार को पार कर गया है। कहा जा रहा है कि, अगर हालात ऐसे ही रहे तो इस साल इसकी कीमत 1 लाख रुपये को पार कर जाएगी। पिछले कुछ महीनों में इजरायल और हमास के बीच युद्ध तेज हो गया है। गाजा पट्टी पर संघर्ष भी बढ़ गया है।
कई बार गिरे अमेरिकी शेयर बाजार

कई महीनों से अमेरिका और ईरान के बीच परमाणु उत्पादों को लेकर भी मूल्य वृद्धि जारी है। ईरान के गुपचुप तरीके से यूरेनियम संवर्धन की खबरें आती रहती हैं। विशेषज्ञ का कहना है कि, ईरान के पास इतनी मात्रा में परमाणु सामग्री जमा हो गई है कि, उसे बेहद कम समय में परमाणु हथियार बनाने का मौका मिला है, जो अमेरिका और उसके समर्थक देशों को तबाह कर सकता है। इस बात को लेकर भी अमेरिकी शेयर बाजार में कई बार गिरावट आई, लेकिन सोने के दामों पर कोई असर नहीं पड़ा। सोने के दाम दिन बी दिन तेज होते गये।
कंपनियां कमा रहीं मुनाफा
दरअसल, मॉर्निंगस्टार के विश्लेषकों का कहना है कि सोने का उत्पादन बढ़ा है। 2024 की दूसरी तिमाही में सोने की खदानों ने 950 डॉलर प्रति औंस का मुनाफा कमाया। इसका मतलब है कि, सोना निकालने वाली कंपनियां मुनाफा कमा रही हैं। दुनिया भर में सोने का भंडार भी 9% बढ़कर 2,16,265 टन हो गया है। ऑस्ट्रेलिया में सोने का उत्पादन बढ़ा है। साथ ही पुराने सोने को पिघलाकर दोबारा इस्तेमाल करने का चलन भी बढ़ा है। यह भी कहा जा रहा है कि, दुनिया में सोने की मांग घट सकती है।
बैंक कम कर सकते हैं सोने का भंडार
पिछले साल केंद्रीय बैंकों ने 1,045 टन सोना खरीदा था, लेकिन अब वे शायद इतना सोना न खरीदें। वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल के एक सर्वे में सामने आया है कि, 71% केंद्रीय बैंक अपने सोने के भंडार को या तो कम कर देंगे या उसे वैसा ही रखेंगे। इसके चलते सोने की कीमत में उतनी तेजी नहीं आ सकती जितनी आमतौर पर देखने को मिल रही है।
खत्म हो सकता है रूस-यूक्रेन युद्ध

यह भी कहा जा रहा है कि, सोने का बाजार शायद अब अपने चरम पर पहुंच गया है। 2024 में सोने के कारोबार में विलय और अधिग्रहण में 32 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है। यह इस बात का संकेत है कि, बाजार अब ऊपर जाने की बजाय नीचे आ सकता है। कुछ मामलों में लोग सोना खरीदने-बेचने की तुलना में सोने में निवेश को ज्यादा सुरक्षित मानते हैं। रूस-यूक्रेन युद्ध को खत्म करने के लिए खुद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कमर कस ली है।
युद्ध खत्म हुआ, तो सुधरेगा बाजार
इस बारे में उन्होंने दुनिया के दिग्गज राजनेताओं से मुलाकात और बातचीत भी की है। यहां तक कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी इस युद्ध को खत्म करने के लिए यूक्रेनी राष्ट्रपति जेलेंस्की और रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से बात की है। माना जा रहा है कि, अगर ये प्रयास जारी रहे तो वह दिन दूर नहीं जब दोनों देशों के बीच युद्ध थम जाएगा। वैसे भी दोनों देश अब ज्यादा लड़ने को तैयार नहीं हैं। अगर ऐसा हुआ तो बाजार में सुधार आएगा और दुनिया में सोने की हो रही बेतहाशा खरीदारी भी थम सकती है।
इजराइल से भी शांति की अपील
इजराइल और हमास के बीच युद्ध पूरी तरह खत्म होने के आसार नहीं हैं, लेकिन, यह संघर्ष कुछ समय के लिए थम सकता है। इसे लेकर खुद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप प्रयास कर रहे हैं। इसके अलावा संयुक्त राष्ट्र ने भी इजराइल से शांति की अपील की है। इससे पहले भी इसे लेकर कैंप डेविड समझौता हो चुका है। देखना यह है कि, क्या ट्रंप भी अपने पूर्ववर्तियों की तरह ऐसा समझौता कर पाएंगे? अगर ऐसा होता है, तो यह मील का पत्थर साबित होगा और बाजारों में गिरावट थमेगी। इससे सोने की कीमतों में भी कमी आ सकती है।






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