
नई दिल्ली। US Indian Student Visa: अमेरिकी सरकार ने 327 अंतरराष्ट्रीय छात्रों के वीजा कैंसिल कर दिया है, जिनमें से आधे छात्र भारत से ताल्लुक रखते हैं। ज्यादातर ऑप्शनल प्रैक्टिकल ट्रेनिंग (OPT) पर थे, जो उन्हें पढ़ाई के बाद काम करने की इजाजत देता था। यानी वो छात्र जो अपनी पढ़ाई पूरी कर चुके थे और अब अमेरिका में कानूनी तौर पर काम कर रहे थे। ऑप्शनल प्रैक्टिकल ट्रेनिंग अमेरिकी वीजा में मिलने वाली एक खास सुविधा है। इसमें छात्रों को ग्रेजुएशन या पोस्ट ग्रेजुएशन के बाद एक साल तक काम करने की सुविधा मिलती है।
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दिया जाता है 24 महीने का अतिरिक्त समय

अगर छात्र साइंस, टेक्नोलॉजी, इंजीनियरिंग और मैथ्स जैसे विषयों से हैं, तो उन्हें 24 महीने का अतिरिक्त समय दिया जाता है। यहां एक अलग मामला भी है। ये SEVIS रिकॉर्ड का मामला है। कहा जा रहा ही कि, जिन छात्रों का SEVIS रिकॉर्ड खत्म कर दिया गया, वे अब न तो अमेरिका में काम कर सकते हैं और न ही रह सकते हैं। दरअसल, SEVIS एक सरकारी डाटा सिस्टम है, जो स्टूडेंट्स वीज़ा की निगरानी करता है।
वीजा रद्द करने के कारण स्पष्ट नहीं
हर छात्र का SEVIS रिकॉर्ड होता है। जब यह रिकॉर्ड बंद हो जाता है, तो छात्र का वीजा अमान्य माना जाने लगता है। ऐसी स्थिति में उक्त छात्र अमेरिका में नहीं रह सकता और वापस भी नहीं आ सकता। ऐसे छात्रों की जांच ICE एजेंसियां भी कर सकती हैं। यही वजह है कि अब इस पूरे मामले में काफी हंगामा हो रहा है। अमेरिकन इमिग्रेशन लॉयर्स एसोसिएशन (AILA) ने 17 अप्रैल को इस संबंध में एक रिपोर्ट जारी की। हालांकि, इस रिपोर्ट में वीजा रद्द करने के कारण स्पष्ट रूप से नहीं बताए गए हैं। कई जगहों पर तो ये तर्कहीन भी लगते हैं।
86% स्टूडेंट का हो चुका है पुलिस से सामना

अमेरिकन इमिग्रेशन लॉयर्स एसोसिएशन (AILA) ने इस मामले में कई खुलासे किए हैं। एसोसिएशन का कहना है कि, जिन छात्रों का वीजा खारिज किया गया, उनमें से 86% का कभी न कभी पुलिस से संपर्क हुआ था। बाकी 34% पूरी तरह से निर्दोष थे। उनके खिलाफ कभी कोई आरोप नहीं लगाया गया। गौर करने वाली बात यह है कि, छात्रों पर लगे आरोप भी बेहद सामान्य प्रकृति के हैं, जैसे किसी ने तेज गाड़ी चलाई, किसी ने बिना लाइसेंस के गाड़ी चलाई, किसी ने पार्किंग में गलती की या कोई दुकान में कोई सामान स्कैन करवाना भूल गया।
ई मेल के जरिये दी गई जानकारी
एक छात्र को सिर्फ़ इसलिए गिरफ़्तार कर लिया गया, क्योंकि उसने पुलिस की गाड़ी को फ़ायर ट्रक समझकर लेन बदल ली थी। ऐसा भी नहीं था कि, ये छात्र राजनीति से प्रेरित थे यानी इसका कोई राजनीतिक झुकाव था। AAILA ने कहा कि, सिर्फ़ दो छात्र ही किसी राजनीतिक प्रदर्शन में शामिल थे, बाकी सभी छात्रों का राजनीति से कोई वास्ता नहीं था। इस मामले में अधिकतर छात्रों को ईमेल के ज़रिए जानकारी दी गई कि उनका वीज़ा रद्द कर दिया गया है। यह जानकारी उन्हें उनके कॉलेज की तरफ़ से दी गई,जबकि नियमानुसार उन्हें ये जानकारी अमेरिकी सरकार से मिलनी चाहिए थी।
कांग्रेस ने की विदेश मंत्री से अपील

अब इस पूरे मामले को लेकर भारत की चिंता बढ़ गई है। कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने कहा, यह बेहद गंभीर मामला है। इसमें विदेश मंत्री एस जयशंकर को तत्काल हस्तक्षेप करना चाहिए और अमेरिका में रह रहे छात्रों की समस्या हल करनी चाहिए। जयराम रमेश को जवाब देते हुए भारत सरकार ने कहा, उसे इस मामले की जानकारी है और वह छात्रों की मदद कर रही है। भारतीय दूतावास और वाणिज्य दूतावास छात्रों के संपर्क में हैं और उनकी समस्या हल करने का प्रयास कर रहे हैं।
बड़ा सवाल- क्यों बनाया जा रहा छात्रों को निशाना
छात्र वीजा रद्द किये जाने से परेशान हैं और उन्हें अभी तक नहीं पता कि वे इस स्थिति से कैसें निकले, कैसे काम पर लौटें या फिर अमेरिका में कैसे रहना जारी रखें। साल 2023-24 में अमेरिका में 11.26 लाख विदेशी छात्र अध्ययन कर रहे थे, जिनमें से 3.31 लाख भारतीय थे। इसका मतलब है कि लगभग हर तीसरा छात्र भारत से था।। इस मामले में विशेषज्ञों का मानना है कि, एक साथ इतनी बड़ी संख्या में भारतीय छात्रों का वीजा रद्द किया जाना महज प्रशासनिक कदम नहीं हो सकता। ऐसे में बड़ा सवाल यह है कि, क्या यह महज वीजा की कहानी है या इसके पीछे कुछ और है? क्या अमेरिका भारतीय छात्रों को कठोर तरीके से निशाना बना रहा है और इसमें भारत सरकार की क्या भूमिका है? हालांकि सरकार छात्रों को सब कुछ ठीक करने का आश्वासन दे रही है, लेकिन स्थिति स्पष्ट न होने से छात्र असमंजस में हैं।
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