
नई दिल्ली। Jhelum River Increased: पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (PKO) में अचानक से झेलम नदी का जलस्तर अचानक बढ़ने से स्थानीय लोग घबरा गये हैं। दरअसल, भारत ने बिना किसी पूर्व सूचना के उरी बांध से पानी छोड़ दिया है, जिससे नदी का जलस्तर बढ़ गया है। इस घटना ने पहले से ही चल रहे भारत और पाकिस्तान के बीच के तनावपूर्ण संबंधों को और गहरा कर दिया है।
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पाकिस्तान ने घोषित किया ‘जल आपातकाल’

बता दें कि, बीते 22 अप्रैल को पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद दोनों देशों के बीच तनाव और गहरा गया है। इसी तनाव के बीच भारत ने सिंधु नदी संधि को निलंबित कर दिया है। वहीं, अब पीओके के मुजफ्फराबाद और चकोठी जैसे इलाकों में शनिवार को झेलम नदी का जलस्तर अचानक बढ़ गया, जिससे बाढ़ जैसे हालात पैदा हो गये। नतीजतन, स्थानीय प्रशासन ने ‘जल आपातकाल’ की घोषणा कर दी और नदी किनारे रहने वाले लोगों को सुरक्षित स्थानों पर जाने की सलाह दी। मस्जिदों के लाउडस्पीकर और इमरजेंसी सायरन के जरिए चेतावनी जारी की गई। इससे स्थानीय लोगों में डर और अनिश्चितता बढ़ गई। कुछ खबरों की मानें तो, कुछ स्थानीय लोगों की फसलों और मवेशियों को नुकसान पहुंचा है। हालांकि, इसकी अधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
भारत पर लगाया आरोप
एक मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक,पाकिस्तानी मीडिया और अधिकारियों ने आरोप लगाया है कि, भारत ने जानबूझकर बिना किसी पूर्व सूचना के पानी छोड़ा। रिपोर्ट में कहा गया है कि, PoK के अधिकारियों ने भारत पर जानबूझकर ‘जल आतंकवाद’ फैलाने का आरोप लगाया। अधिकारियों का कहना है कि भारत ने 1960 में की गई सिंधु जल संधि का उल्लंघन कर रहा है। बता दें कि, ये संधि भारत और पाकिस्तान के बीच साझा नदियों के पानी के इस्तेमाल को नियंत्रित करती है। रिपोर्ट में ये भी कहा गया है कि, भारतीय अधिकारियों की ओर से कोई बयान नहीं आया है। उन्होंने पानी छोड़े जाने की न तो पुष्टि की है और न ही इनकार किया है। हालांकि, कुछ भारतीय मीडिया आउटलेट्स का कहना है कि, जम्मू-कश्मीर में भारी बारिश की वजह से बांध से पानी छोड़ना एक नियमित प्रक्रिया है, जिसके तहत ही झेलम नदी के पानी छोड़ा गया है।
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पहलगाम हमले के बाद बढ़ा तनाव

इधर, भारत ने इस घटना को लेकर अभी तक कोई आधिकारिक बयान दिया है, जिससे अटकलें और तनाव दोनों बढ़ रहे हैं। बता दें कि, यह घटना ऐसे समय में हुई है, जब भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव अपने चरम पर है। हाल ही में जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में आतंकियों ने 26 लोगों की हत्या कर दी थी। इस घटना के बाद से भारत लगातार पाकिस्तान के खिलाफ कड़ा रुख अपना रहा है। हमले के तुरंत बाद, भारत सरकार ने 23 अप्रैल को कैबिनेट कमेटी ऑन सिक्योरिटी यानी CCS की बैठक में सिंधु जल संधि को निलंबित करने का फैसला लिया, जिसे पाकिस्तान के लिए बड़े आर्थिक झटके के तौर पर देखा जा रहा है। ये संधि के तहत पाकिस्तान की 80 फीसदी कृषि भूमि के लिए पानी की आपूर्ति सुनिश्चित की जाती है। ऐसे में इसके निलंबित होने से दोनों देशों के बीच जल संसाधनों पर नियंत्रण को लेकर नया विवाद खड़ा हो गया है।
1960 में हुई थी संधि

स्थानीय मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक पाकिस्तानी विशेषज्ञों का दावा है कि, झेलम नदी में अचानक पानी छोड़ना भारत द्वारा पहलगाम हमले का जवाब देने और पाकिस्तान पर दबाव बनाने की रणनीतिक चाल हो सकती है। हालांकि, भारतीय विशेषज्ञों का कहना है कि, भारत के पास अभी ऐसी रणनीति को प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए जरूरी बुनियादी ढांचा नहीं है। उल्लेखनीय है कि, साल 1960 में विश्व बैंक की मध्यस्थता से सिंधु जल संधि हुई थी। इस संधि के तहत भारत और पाकिस्तान के बीच छह नदियों सिंधु, झेलम, चिनाब, रावी, ब्यास और सतलुज के पानी का बंटवारा हुआ था। संधि में पश्चिमी नदियों सिंधु, झेलम और चिनाब को मुख्य रूप से पाकिस्तान को आवंटित किया गया है जबकि पूर्वी नदियों रावी, ब्यास और सतलुज भारत पर भारत का नियन्त्रण है। हालांकि, भारत को पश्चिमी नदियों पर नौवहन, बाढ़ नियंत्रण और पनबिजली उत्पादन जैसे सीमित उपयोग की अनुमति दी गई है।
बुनियादी ढांचे को पहुंचा नुकसान

हालांकि, हाल के वर्षों में भारत ने इन नदियों पर कई परियोजनाओं का निर्माण शुरू किया है,जैसे कि किशनगंगा जलविद्युत परियोजना (झेलम की एक सहायक नदी पर) और रैटल परियोजना (चेनाब पर), जिस पर पाकिस्तान हमेशा आपत्ति जताता रहता है। पाकिस्तान का कहना है कि, ऐसा करने से भारत को पानी के प्रवाह पर अधिक नियंत्रण मिल सकता है। झेलम में अचानक पानी छोड़े जाने से ये चिंताएं और बढ़ गई हैं, क्योंकि पाकिस्तान इसे संधि का उल्लंघन मानता है। पीओके में बाढ़ जैसे हालात पैदा होने से स्थानीय लोगों को बुरी तरह प्रभावित हुए हैं। लोगों को अपना घर और संपत्ति छोड़कर सुरक्षित स्थानों पर जाने के लिए मजबूर होना पड़ा। वहीं, कुछ क्षेत्रों में बुनियादी ढांचे को भी नुकसान पहुंचा है। पाकिस्तानी मीडिया ने इस घटना को भारत के ‘आक्रामक रुख’ का हिस्सा बताया है और कुछ ने इसे दोनों देशों के बीच युद्ध की आशंका से जोड़ा है। दूसरी ओर, भारत में कुछ राजनेताओं और विश्लेषकों ने इस कदम को पाकिस्तान को ‘सबक सिखाने’ के लिए एक उचित प्रतिक्रिया के रूप में देखा है।
बनानी होगी दीर्घकालिक योजना
यह घटना भारत और पाकिस्तान के बीच जल संसाधनों को लेकर चल रह गहरे और जटिल विवाद को उजागर करती है। मालूम हो कि, सिंधु जल संधि, जो दशकों से दोनों देशों के बीच सहयोग का आधार रही है, अब खतरे में पड़ गई है। भारत में अपनी जल नीति को और अधिक आक्रामक बनाने की क्षमता है, लेकिन इसके लिए उसे बड़े पैमाने पर बुनियादी ढांचे और दीर्घकालिक योजना बनानी होगी। दूसरी ओर, पाकिस्तान के लिए यह घटना एक चेतावनी है, कि उसकी खाद्य सुरक्षा और आर्थिक स्थिरता भारत के कुछ फैसलों पर निर्भर है। ऐसे में, दोनों देशों को इस संकट को हल करने के लिए कूटनीतिक बातचीत करने की जरूरत है, लेकिन वर्तमान भू-राजनीतिक वातावरण में ऐसा होना असंभव सा है।
झेलम नदी में अचानक पानी छोड़ा जाना सिर्फ़ एक प्राकृतिक आपदा नहीं है, बल्कि भारत और पाकिस्तान के बीच गहरे भू-राजनीतिक तनाव का संकेत है। पाकिस्तान इसे ‘जल आतंकवाद’ कह रहा है जबकि भारत इसे अपनी संप्रभुता और सुरक्षा के लिए एक रणनीतिक कदम के तौर पर देख सकता है।
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