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India-Pakistan War: जैसे 1971 में गंवाया था पूर्वी पाकिस्तान, क्या इस बार बलूचिस्तान या POK गंवा बैठेगा पड़ोसी मुल्क

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नई दिल्ली। India-Pakistan War: ‘ऑपरेशन सिन्दूर’ के बाद से भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव चरम है। गुरुवार की रात से दोनों देश आमने-सामने आ गये हैं और एक-दूसरे पर मिसाइलें बरसा रहे हैं। हालांकि, इस लड़ाई में भारत का वैसा नुकसान नहीं हो रहा है, जैसा कि पाकिस्तान का हो रहा है। भारतीय सेना पाकिस्तान में घुसकर जबर्दस्त तबाही मचा रही है।

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पाकिस्तान में घुसी भारतीय सेना

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इस लड़ाई की शुरुआत खुद पाकिस्तान ने की। ‘ऑपरेशन सिंदूर’ से बौखलाए पाकिस्तान ने बुधवार को भारत के 15 शहरों को निशाना बनाते हुए नाकाम हमले किए। गुरुवार को भी उसने भारत के कई शहरों पर ड्रोन से अटैक किया। हालांकि सभी हमलों में उसे नाकामी ही हाथ लगी। इधर, भारत भी कड़ी जवाबी कार्रवाई करते हुए पाकिस्तान में घुस चुका है और धुआंधार मिसाइलें बरसा रहा है।

बलूचिस्तान ने किया आजादी का ऐलान

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उधर, भारत और पाकिस्तान के मध्य बढ़ते तनाव के बीच बलूचिस्तान ने आजादी का एलान कर दिया है। ये ऐलान बलोच की लेखक मीर यार बलोच ने किया है। मीर ने बलूचिस्तान की आजादी का ऐलान करते हुए सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक लंबा चौड़ा पोस्ट लिखा। साथ ही उन्होंने, संयुक्त राष्ट्र संघ से अपना शांति मिशन भेजने की मांग की है और भारत से दिल्ली में बलूचिस्तान के लिए एम्बेसी खोलने की भी बात कही। आइए जानते हैं कैसे एक बार फिर से पाकिस्तान के टुकड़े होने के कयास लगाये जा रहे हैं ।

1971 में बना था बांग्लादेश

1971 में बना था बांग्लादेश

इस बार ही कुछ पाकिस्तान के अंदर कुछ ऐसी हो परिस्थितियां बन रही हैं, जैसी 1971 के युद्ध के दौरान बनी थीं। दरअसल, पाकिस्तान जिस तरह के हालात पैदा कर रहा है, उससे साफ़ लग रहा है कि, भारत 1971 की तरह ही एक बार फिर से बड़े पैमाने पर युद्ध शुरू कर सकता है। बता दें कि, 1971 का भारत-पाकिस्तान युद्ध पूर्वी पाकिस्तान, जो अब दुनिया के नक्शे पर बांग्लादेश के नाम से दर्ज है, के मुक्ति संग्राम और शरणार्थी संकट की वजह से हुआ था।

भारत में फुस्स हो रहे पाकिस्तान के ड्रोन

1971 में बना था बांग्लादेश

हालांकि उस वक्त की परिस्थितियां थोड़ा बहुत अलग थी। तब परमाणु हथियार नहीं थे, लेकिन आज दोनों देश परमाणु हथियारों से लैस हैं। ऐसे में पूर्ण युद्ध की संभावना काफी हद तक कम है। वहीं, जिस तरह पाकिस्तान की तैयारी दिख रही है, उससे साफ लग रहा है कि वह परमाणु बम का इस्तेमाल आसानी से तो बिलकुल भी नहीं कर पायेगा क्योंकि उसकी अधिकतर मिसाइल और ड्रोन भारत में आकर फुस्स हो जा रहे हैं, जो उसकी कमजोरी को दर्शा रहे हैं।

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1971 में भी पाकिस्तान ने शुरू किया था युद्ध

बांग्लादेश, जो कि साल 1971 में पूर्वी पाकिस्तान था, में पाकिस्तानी सेना ने जबर्दस्त दमनकारी नीति अपनाई थी। इसके अलावा बंगाली मुक्ति संग्राम (मुक्तिवाहिनी), और एक करोड़ से अधिक शरणार्थियों का भारत आना, ये सब भारत के लिए पाकिस्तान के खिलाफ युद्ध का बहाना था। साल 1971 में 3 दिसंबर को पाकिस्तान ने ‘ऑपरेशन चंगेज खान’ के तहत भारत पर हमला किया था और यहां के 11 हवाई अड्डों पर बमबारी की थी। भारत ने भी जवाबी कार्रवाई की और यही से शुरू हुआ दोनों देशों के बीच का  युद्ध।

भारत को मिला बहाना

इस बार भी पाकिस्तान ने गुरुवार को कुछ ऐसा ही कदम उठाया। उसने भारत के कई शहरों और हवाई अड्डों को मिसाइल और ड्रोन से निशाना बनाने की कोशिश की। अगर, भारत ने पाकिस्तान के कम से चार जेट्स और दर्जनों ड्रोन को हवा में ही नष्ट न कर दिया होता, तो आप समझ सकते हैं कि, कितना बड़ा नुकसान हुआ होता। गनीमत है कि, भारत के पास एस-400 और अन्य एयर डिफेंस सिस्टम हैं, जिसकी वजह से भारत को जान माल का तनिक भी नुकसान नहीं हुआ, लेकिन अब भारत को पाकिस्तान की ऐसी की तैसी करने का बहाना मिल ही गया है।

1971 में 93 हजार पाक सैनिकों ने किया था सरेंडर

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ये ठीक उसी तरह से हुआ है, जैसा कि 1971 में पाकिस्तान के ऑपरेशन चंगेज के बाद हुआ था। उस  युद्ध में भारत ने पूर्वी पाकिस्तान को अलग कर बांग्लादेश बनाकर पाकिस्तान को कभी न भूलने वाला घाव दे दिया था। भारत ने पाकिस्तान के ‘ऑपरेशन चंगेज’ के बाद महज 13 दिनों में पूर्वी पाकिस्तान के ढाका, जो अब बांग्लादेश की राजधानी है, पर कब्जा कर लिया था। उस युद्ध में पाकिस्तान के 93,000 सैनिकों ने भारतीय सेना के सामने आत्मसमर्पण किया था।

चार हिस्सों में बंटेगा पाकिस्तान

पाकिस्तान के पीओके को भारत में मिलाने की बात तो अक्सर राजनीतिक बयानों ने उठती रहती है। पीओके के अलावा बलूचिस्तान, सिंध और खैबर पख्तूनख्वा जैसे क्षेत्रों में अलगाववादी आंदोलन की खबर आती रहती है। अब जब कि भारत-पाकिस्तान तनाव चरम पर है। बलूचिस्तान ने अपनी आजादी का ऐलान कर दिया है। बीती 27 अप्रैल को जब भारत-पाकिस्तान के बीच पहलगाम आतंकी हमले को लेकर तनाव था, तब भी बीजेपी सांसद निशिकांत दुबे ने दावा कर दिया था कि 2025 के खत्म होने से पहले पाकिस्तान चार हिस्सों में बंट जाएगा।

सीएम योगी ने भी किया दावा

कुछ ऐसा ही दावा उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी किया है। हालांकि, इन दावों के पीछे कोई ठोस आधार नहीं हैं, लेकिन अब जो हालात बने हैं, उसमें कुछ भी हो सकता है। 1971 के पहले भी किसी भारतीय या पाकिस्तानी ने नहीं सोचा रहा होगा कि, पाकिस्तान के टुकड़े होंगे और  बांग्लादेश नाम का कोई देश बनेगा। 2019 से पहले किसी भी भारतीय ये नहीं सोचा रहा होगा कि कश्मीर से 370 खत्म हो जायेगा। बीजेपी के सत्ता में आने पहले किसी ने भी नहीं सोचा रहा होगा कि अयोध्या में राम मंदिर बनेगा, लेकिन ये सब हुआ।

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 मजबूत है भारत का नेतृत्व

दरअसल, कोई भी ऐतिहासिक कार्य नेतृत्व की इच्छा शक्ति पर निर्भर होता है। 1971 की लड़ाई में बांग्लादेश बनना पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की इच्छा शक्ति की वजह से संभव  हो सका। जम्मू कश्मीर से 370 हटना, अयोध्या में राम मन्दिर बनना पीएम मोदी की इच्छा शक्ति का कमाल है। पीएम नरेंद्र मोदी के कई फैसले, जैसे कि वक्फ बोर्ड में संशोधन, तीन तलाक, पाकिस्तान के खिलाफ एयर स्ट्राइक आदि दर्शाते हैं कि आज के भारत का नेतृत्व काफी दृढ़ और मजबूत है। ऐसे अगर ये कहा जाये कि, अब कुछ भी असंभव नहीं है, तो अतिश्योक्ति नहीं होगी।

1994 में भारत का अभिन्न अंग घोषित हुआ था पीओके

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एक तरफ भारत पीओक के अपने देश का हिस्सा बताता है और उसे भारत में वापस मिलाने की बात करता है। पीओके को साल 1994 में ही भारतीय संसद ने भारत का अभिन्न हिस्सा घोषित कर दिया था। अब बीते कुछ सालों से पीओके में कुछ समूह भारत के साथ एकीकरण का समर्थन भी करने लगे हैं। हाल के प्रदर्शनों से स्थानीय लोगों ने पाकिस्तान के खिलाफ नाराजगी भी जताई है। ऐसे में भारत के लिए यहां किसी भी कार्रवाई को अंतरराष्ट्रीय मंचों पर वैध ठहराना ज्यादा मुश्किल नहीं होगा।

बलूच आर्मी भी है एक्टिव

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उधर, बलूच अलगाववादी संगठन जिस तरह से पाकिस्तान की खिलाफत कर रहे हैं, वह भी 1971 के पूर्वी पाकिस्तान में चल रहे आंदोलन की याद दिला रहे हैं। बलूच आर्मी के लड़ाकों के आगे पाकिस्तानी आर्मी हर रोज मात खा रही है। आपको बता दें कि, बलूचिस्तान, पाकिस्तान का सबसे बड़ा प्रांत है, लेकिन आर्थिक और राजनीतिक रूप से ये हमेशा से उपेक्षित रहा है, जिससे यहां के लोगों में पाकिस्तान की सरकार के प्रति काफी नाराजगी है। यहां बलूच नेशनलिस्ट आंदोलन सक्रिय है, जो पाकिस्तान से स्वतंत्रता या अधिक स्वायत्तता की मांग करता है। बलूच लिबरेशन आर्मी (बीएलए) जैसे समूह पाकिस्तानी सेना के खिलाफ बराबर गुरिल्ला युद्ध लड़ रहे हैं, जो पाकिस्तान के  टुकड़े होने की मजबूत वजह बन रहे हैं।

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