
नई दिल्ली। Indo-Pak Tension: पहलगाम हमले के बाद से भारत के बीच तनाव और ज्यादा बढ़ गया है। सिन्धु जल समझौते के निलंबन के बाद अब केंद्र सरकार सिंधु नदी पर बन रहे बिजली परियोजनाओं और सिंचाई में तेजी लाएगी। सरकार ने जम्मू-कश्मीर और आसपास के राज्यों में सिंधु, झेलम और चिनाब नदियों के पानी का बेहतर इस्तेमाल चाहती है। इसके लिए वह संबंधित परियोजनाओं पर तेजी से काम करने की योजना बना रही है। इस सिलसिले में गृह मंत्रालय, विदेश मंत्रालय (MEA), बिजली मंत्रालय और जल शक्ति मंत्रालय के अधिकारियों की एक अहम बैठक हुई।
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बैठक में लिया गया निर्णय

इस बैठक में निर्णय लिया गया कि, ज्यादा पैसा लगाकर इन परियोजनाओं को तेजी से पूरा किया जाये। दरअसल, सरकार चाहती है कि, परियोजनाओं से जुड़े लोग तेजी से काम करें और इसे पूरा करें, इन परियोजनों ने पैसे की कमी बाधा नहीं बननी चाहिए। यह बैठक इसलिए भी अहम थी क्योंकि हाल ही में हुए पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारत ने सिंधु जल संधि को रद्द कर दिया है। इसके बाद यह पहली बैठक थी।
तेजी से हो परियोजनाओं पर काम
एक सूत्र के हवाले से बताया जा रहा है कि, निर्माणाधीन सिंचाई नहरों, नौवहन परियोजनाओं और बिजली परियोजनाओं को प्राथमिकता के आधार पर पूरा किया जाएगा। इन परियोजनाओं के लिए पर्याप्त धन आवंटित किया जाएगा। इन परियोजनाओं के पूरा होने के बाद भारत के लिए मौजूदा जलविद्युत परियोजनाओं के जलाशयों से गाद निकालना आसान हो जाएगा, जिससे जलाशयों की जल भंडारण क्षमता बढ़ जाएगी। खास बात ये है कि, सिन्धु जल संधि के निलंबन के बाद इसके बारे में पाकिस्तान को सूचित करना जरूरी नहीं होगा।
और परियोजनाओं को शुरू करने के निर्देश

बता दें कि, भारत ने हाल ही में भारत ने चिनाब नदी पर बनी दो पनबिजली परियोजनाओं- बगलिहार और सलाल डैम में अतिरिक्त पानी जमा करने के उद्देश्य से उसकी गाद निकाली थी, लेकिन यह एक अस्थायी उपाय था। सूत्र ने बताया कि, बैठक में बिजली मंत्रालय के अधिकारियों को चार निर्माणाधीन पनबिजली परियोजनाओं का काम तेजी से पूरा करने को कहा गया है। साथ ही तीन और परियोजनाओं के लिए एक्सपर्ट्स से परामर्श ले कर मंजूरी लेने को कहा गया है।
आतंकवादियों को सौंपे पाकिस्तान
उम्मीद जताई जा रही है कि, पश्चिमी नदियों पर पनबिजली परियोजनाओं को बनाकर करीब 20,000 मेगावाट बिजली पैदा की जा सकती है, लेकिन भारत अभी तक इन नदियों पर सिर्फ 4,000 मेगावाट क्षमता की पनबिजली परियोजनाएं ही बना पाया है। भारत सरकार ने पाकिस्तान से स्पष्ट शब्दों में चेताया है कि आतंकवाद और पानी साथ-साथ नहीं चल सकते। विदेश मंत्रालय (एमईए) के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि भारत और पाकिस्तान के बीच कोई भी बातचीत द्विपक्षीय होनी चाहिए। उन्होंने कहा, भारत पर हमला करने वाले आतंकवादियों को पाकिस्तान को भारत को सौंपना होगा।
साथ नहीं बह सकते खून और पानी

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा, मैं साफ शब्दों में कहना चाहता हूं कि आतंकवाद और बातचीत एक साथ नहीं हो सकती है और न ही जम्मू-कश्मीर पर कोई मध्यस्थता होगी, जो भी होगा वह द्विपक्षीय होगा। अब पाकिस्तान के साथ बातचीत केवल उसके द्वारा अवैध रूप से कब्जाए गए भारतीय क्षेत्र (POK) को खाली करने पर होगी। जायसवाल ने कहा, “जब तक पाकिस्तान सीमा पार आतंकवाद को समर्थन देना बंद नहीं कर देता, तब तक सिंधु जल समझौता निलंबित रहेगा। जैसा कि हमारे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा, ‘पानी और खून एक साथ नहीं बह सकते’।” इसका मतलब साफ़ है कि, जब तक पाकिस्तान आतंकवाद को समर्थन देना बंद नहीं कर देता, सिंधु जल संधि रद्द रहेगी।
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