
डॉ.अजय कुमार तिवारी
30 मई का दिन हिन्दी और हिन्दी पत्रकारिता के लिये बहुत बड़ा दिन है। 30 मई 1826 को हिन्दी में उदन्त मार्तण्ड का कलकत्ता से प्रकाशन हुआ था, जिसके सम्पादक कानपुर निवासी पंडित युगल किशोर थे। यह अखबार साप्ताहिक था, लेकिन हिन्दी के प्रचार-प्रसार में निर्णायक भूमिका का निर्वहन किया था। उदन्त मार्तण्ड और उसके अविस्मरणीय योगदान को देखते हुए हिन्दी पत्रकारिता दिवस 30 मई को मनाया जाता है। हिन्दी पत्रकारिता के लिए 30 मई 1826 से प्रारम्भ हुआ यह सफर 2025 की पत्रकारिता का साक्षी बन चुका है।
उदन्त मार्तण्ड का शाब्दिक अर्थ है समाचार-सूर्य। नाम के अनुरूप ही उदन्त मार्तण्ड अखबार हिन्दी समाचारों की दुनिया में सूर्य ही था। उदंत मार्तण्ड खड़ी बोली और ब्रज भाषा के मिले-जुले रूप में प्रकाशित होता था और इसकी लिपि देवनागरी थी। 199 वर्षों में हिन्दी और उसकी पत्रकारिता दोनों में बहुत बदलाव आया है और आना स्वाभाविक भी है, क्योंकि सत्ता, तकनीक धीरे-धीरे बदलती गयी तो अखबार के मिशन और पाठकों की जिज्ञासा में भी बदलाव आया।

वर्तमान में अखबारों का स्वरूप पूरी तरह से बदल चुका है। मिशन का आत्मविश्वास लेकर पैदा हुई हिन्दी पत्रकारिता अब उद्योग बन चुकी है, बल्कि पूंजीपतियों के इशारे पर स्वार्थ का साथ निभा रही है। हिंदी पत्रकारिता ने 199 वर्षों के लंबे सफर में कई उतार-चढ़ाव देखे हैं। न्यायपालिका, कार्यपालिका और व्यवस्थापिका के बाद अघोषित तौर पर मीडिया को चौथा स्तंभ भी माना जाता है। भारत में आजादी से पहले पत्रकारिता स्वतंत्रता को एक मिशन मानकर अपने धर्म का निर्वाह करती थी। आजादी के बाद राष्ट्र निर्माण का दायित्व उसके कंधे पर आया लेकिन 70 के दशक के बाद अखबारों के पन्ने बढ़़े, कलेवर बदला और धीरे-धीरे इलेक्ट्रानिक मीडिया का दौर आ गया।
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विश्व की तीसरी सबसे अधिक बोली जाने वाली भाषा है हिंदी
यह इलेक्ट्रानिक मीडिया अब डिजिटल मीडिया, न्यू मीडिया के साथ 140 करोड़ की आबादी में पहुंच रहा है। यह भी ध्यान देना होगा कि उदंत मार्तण्ड के दौर में शैक्षिक समाज, पठनीयता कम थी। साक्षरता की कमी से देश जूझ रहा था। वर्तमान परिवेश बदल चुका है। हिन्दी विश्व की तीसरी सबसे अधिक बोली जाने वाली भाषा बन चुकी है। जिस भाषा को इतना बड़ा मंच मिल चुका है, उसकी मीडिया, पत्रकारिता को दुनिया में सराहा जायेगा। दूसरी भाषाओं के अखबार, पोर्टल, चैनल हिन्दी में सामग्री परोसने को बाध्य हैं। हां, यह अवश्य हुआ कि अखबारों के प्रकाशित होने के साथ ही पाठक तक पहुंचने में समय लगता है। इस समय को कम नहीं किया जा सकता है।
एक क्लिक पर मिल रही हर खबर

दैनिक, सांध्य, दोपहर के अखबार बाजार में हैं, उनका प्रकाशन भी समय से हो रहा है लेकिन खबरों की भागम-भाग में इलेक्ट्रानिक चैनल और पोर्टल तेजी से खबर पहुंचाने लगे हैं। आज की खबर कल पढ़ने की व्यवस्था धराशायी होती जा रही है, बल्कि खबर के बीच रिपोर्टर सीधे पहुंच रहा है। विश्व के किसी कोने में घटित कोई घटना एक क्लिक पर पढ़ी और देखी जा सकती है। 199 वर्षों में हिन्दी पत्रकारिता अब तेज गति वाली पत्रकारिता बन चुकी है। ऑनलाइन जर्नलिज्म, वेब पेज के माध्यम से त्वरित गति से पहुंच रहा है और इसमें लगातार अद्यतन होने, अपडेट होने की संभावना है।
इंटरनेट ग्लोबलाइजेशन का दौर
इंटरनेट ने ग्लोबलाइजेशन के दौर में दुनिया को एक गांव बना दिया है। इजरायल-गाजा, यूक्रेन-रूस की सभी खबरें एक क्लिक पर मौजूद हैं। डिजिटल पत्रकारिता में न्यूज, फीचर, रिपोर्ट तेजी से मिल रहे हैं। एक दौर था जब हिन्दी पत्रकारिता सिर्फ अखबारों के सहारे थे फिर उसे आवाज का साथ मिला। शब्दों को रेडियो ने घर-घर पहुंचाया। लिखे हुए शब्द आवाज के साथ दृश्य में समाहित हो गये। हिन्दी पत्रकारिता को शब्द, आवाज और दृश्य एक मंच मिलने लगे। यही तकनीकी का विकास और हिन्दी पत्रकारिता का प्रसार है।
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बदल गया है काम का अंदाज

वर्तमान समय में पत्रकारिता का स्वरूप बदला, काम करने का अंदाज बदला, कलेवर बदला और इसकी प्रस्तुति में बड़ा बदलाव आया। हिन्दी पत्रकारिता में लगातार प्रयोग होते रहे। पीत पत्रकारिता, खोजी पत्रकारिता, पेज थ्री पत्रकारिता के साथ बहुत से नये क्षेत्र आये जिसमें युवाओं को कुछ नया कर गुजरने का अवसर मिला। अब पत्रकारिता उस युग में पहुंच चुकी है कि आप जहां हैं, वहीं से खबर, वीडियो अपने पाठक को उपलब्ध करा सकते हैं। हिन्दी पत्रकारिता का सबसे बड़ा मानक सरल, सहज और स्पष्टता को लेकर था। मीडिया का उद्देश्य था कि सूचना, शिक्षा और मनोरंजन का दायित्व निभायेगा। सभी फलक पर मीडिया विश्वसनीयता बनाये रखेगी।
विश्वसनीयता बरकरार रखना जरूरी
विश्वसनीयता ही अखबार, चैनल और पोर्टल की पहचान है तथा 199 साल की हिन्दी पत्रकारिता की कमाई है। पाठक जब खबर पढ़ता है, समाचार सुनता है तो उसका विश्वास आपके साथ होता है। हिन्दी पत्रकारिता को अपने पाठकों के विश्वास पर खरा उतरना है। ध्यान रहे विश्व की तीसरी सबसे अधिक लोगों द्वारा बोली जाने वाली भाषा हिन्दी है। उसके पाठकों सही सामग्री नहीं मिलेगी, तो दूसरा अखबार, दूसरा चैनल बदल लेगा। हिन्दी के पत्रकारों का आह्वान है कि 199 वर्षों की विरासत को आगे बढ़ायें और स्वस्थ पत्रकारिता के जरिये देश, समाज को सही रास्ते पर ले जायें।
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