Home » राष्ट्रीय » Communication Satellite Launch: इसरो ने लांच की ये ख़ास सैटेलाइट, अब दुश्मन के हर पल पर होगी नजर

Communication Satellite Launch: इसरो ने लांच की ये ख़ास सैटेलाइट, अब दुश्मन के हर पल पर होगी नजर

[the_ad id="14540"]
Communication Satellite Launch

नई दिल्ली। Communication Satellite Launch: भारतीय अनुसंधान संगठन (इसरो) ने रविवार 2 नवंबर को CMS-03 (GSAT-7R) कम्युनिकेशन सैटेलाइट को सफलतापूर्वक लॉन्च कर दिया। इस सैटेलाइट के लांच होने से नौसेना की स्पेस-बेस्ड कम्युनिकेशन (अंतरिक्ष से संचार) और समुद्री इलाके की निगरानी (मैरिटाइम डोमेन अवेयरनेस) की क्षमता में मजबूती आएगी क्योंकि ये सैटेलाइट नौसेना का अब तक का सबसे एडवांस्ड (उन्नत) वर्जन है।

इसे भी पढ़ें- ISRO: फिर अंतरिक्ष में इतिहास रचेगा इसरो, बनेगा डॉकिंग-अनडॉकिंग अचीव करने वाला चौथा देश

तेज और सुरक्षित संचार में सक्षम

Communication Satellite Launch

ये सैटेलाइट पूरी तरह से भारत में डिजाइन की गई है। ये समुद्र में नौसेना के जहाजों, पनडुब्बियों, हवाई जहाजों और समुद्री ऑपरेशंस सेंटर्स के बीच तेज और सुरक्षित संचार करने में सक्षम होगी। इस सैटेलाइट का वजन 4400 किलोग्राम है और ये भारत का अब तक की सबसे भारी कम्युनिकेशन सैटेलाइट है। इसमें कई ऐसे पार्ट्स लगे हैं जो देसी तकनीकी के हैं और ये सभी पार्टस नौसेना की जरूरतों को ध्यान में रखकर बनाए गये हैं। ये सैटेलाइट आत्मनिर्भर भारत का एक बेहतरीन उदाहरण है।

इसरो के वैज्ञानिक इस सैटेलाइट पर कई महीने से काम कर रहे थे और आज  2 नवंबर को सतीश धवन स्पेस सेंटर (SDSC- SHAR) श्रीहरिकोटा (आंध्र प्रदेश) के दूसरे लॉन्च पैड से शाम 5:26 मिनट पर इसे लॉन्च कर दिया गया। ISRO का ये सेंटर रॉकेट लॉन्च करने के लिए जाता है।

 ये हैं सैटेलाइट की खूबियां

GSAT-7R को बनाने में भारतीय इंजीनियरों ने कई तकनीकी कमाल दिखाएं हैं।

कवरेज एरिया

ये सैटेलाइट भारतीय महासागर क्षेत्र (Indian Ocean Region) में टेलीकम्युनिकेशन कवरेज को मजबूत करेगा यानी हिंद महासागर के बड़े हिस्से में हमेशा सिग्नल मजबूत रहेगा।

वजन और साइज

ये सैटेलाइट भारत की अब तक की सबसे भारी सैटेलाइट है, इसका कुल वजह 4400 किलो ग्राम है।  इससे पहले जितने भी सैटेलाइट भारत में लांच किये गये हैं वे सब हल्के हैं।

 ट्रांसपोंडर्स

Communication Satellite Launch

इस सैटेलाइट के अंदर लगाये गये संचार उपकरण जैसे कि आवाज (वॉइस), डेटा और वीडियो लिंक को कई तरह के बैंड्स (फ्रीक्वेंसी रेंज) पर सपोर्ट करने में सक्षम है।  कहने का मतलब ये है कि, नौसेना के लोग जहाज पर हो या हवा में आपस में आसानी से सूचना का आदान प्रदान कर सकेंगे।

हाई-कैपेसिटी बैंडविड्थ

ये सैटेलाइट ज्यादा से ज्यादा डेटा ट्रांसफर करने में सक्षम है। इसके लांच होने के बाद अब जहाजों, विमानों, पनडुब्बियों और कंट्रोल सेंटर्स के बीच सुरक्षित और बिना रुकावट के कम्युनिकेशन हो सकेगा। किसी भी खतरे की स्थिति में सूचना प्रसारित की जा सकेगी। इससे समुद्र में नौसेना की ताकत और बढ़ जाएगी।

 भारतीय नौसेना के लिए जरूरी था

Communication Satellite Launch

आज के समय में चीन और पाकिस्तान जैसे पडोसी मुल्कों की वजह से भारत की सीमा और हिन्द महासागर में हमेशा तनाव बना रहता है। ऐसे में अंतरिक्ष में नजर रखने और तुरंत कार्रवाई करने में GSAT-7R  अहम भूमिका निभाएगा। GSAT-7R को लेकर नौसेना के चीफ ने कहा, ये सैटेलाइट समुद्री हितों की रक्षा में एक बड़ा कदम है। इससे संचार मजबूत होगा।

अभी तक समुद्र में कम्युनिकेशन स्थापित करने के साधन सीमित थे, जिससे कई बार रुकावट का सामना  करना पड़ता था। इस सैटेलाइट के लांच हो जाने के बाद समुदी में निगरानी और तेज हो जाएगी और दुश्मन की गतिविधियों पर नजर रखना आसान हो जायेगा। उन्होंने कहा, अभी तक हम विदेशी सैटेलाइट पर निर्भर थे, लेकिन ख़ुशी की बात है कि ये पूरी तरह से भारत में बनी है, जो हमारे आत्मनिर्भर भारत का प्रत्यक्ष और मजबूत प्रमाण है।

 

इसे भी पढ़ें- ISRO: आज इन दो उपग्रह को अंतरिक्ष में स्थापित करेगा इसरो, ऐसा करने वाला चौथा देश होगा भारत

Leave a Comment

[the_ad id="14784"]
[the_ad id="14787"]
Modi 3.0 के पहले आम बजट से मिडिल क्लास को मिलेगी राहत?