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Bulldozer Action: यूपी के इस जिले में ढहाई गई मजार, 6 अधिकारियों के खिलाफ FIR, ये है पूरा मामला

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देवरिया। Bulldozer Action: देवरिया में सरकारी बंजर जमीन को मजार के नाम कराने के आरोप में तत्कालीन क़ानूनगो और लेखपाल समेत छह लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है। साथ ही मजार को बुलडोजर से ध्वस्त कर दिया गया।

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अभिलेखों में की गई हेराफेरी

Bulldozer Action

जानकारी के मुताबिक, जिले में स्थित अब्दुल गनी मजार जिस जमीन पर बनी है वह सरकारी बंजर जमीन है, लेकिन इस जमीन को तत्कालीन कानूगो और लेखपाल की मिलीभगत से फर्जी अभिलेख तैयार कर मजार के नाम दर्ज करा गई थी, जिसका खुलासा अब हुआ है।

इस मामले को लेकर बीजेपी विधायक शलभ मणि त्रिपाठी ने प्रशासन से दस्तावेजों में हेराफेरी करने वालों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराने की अपील की थी। इसके बाद हल्का लेखपाल विनय सिंह की तहरीर पर कोतवाली पुलिस ने तत्कालीन सदर शहाबुद्दीन, नायब सदर इरशाद अहमद, नायब नाजिर अरशद वारसी, नाजिम मुबारक अली, कानून गो राधेश्याम उपाध्याय और लेखपाल रामानुज सिंह के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया गया था।

सही पाई गई शिकायत

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बताया जा रहा है कि, साल 1993 में फर्जी अभिलेख तैयार कर इस सरकारी बंजर भूमि को मजार के नाम दर्ज कराने में  तत्कालीन सरकारी अधिकारियों ने अहम भूमिका निभाई थी। इसकी शिकायत बीजेपी विधायक शलभ मणि ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से की थी। सीएम के निर्देश पर जब जिला प्रशासन ने मजार की भूमि की जांच कराई तो शिकायत सही पाई गई।

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जांच के पता चला कि 1993 में फर्जी दस्तावेज तैयार कर सरकारी बंजर जमीन को अब्दुल गनी शाह मजार के नाम दर्ज कर दिया गया था। मामले के सामने आने पर एसडीएम न्यायालय में इसके खिलाफ मुकदमा चला, जहां मजार कमेटी ने अतिक्रमण की बात स्वीकार की। इसके बाद मजार को बुलडोजर चला कर तोड़ दिया गया।

1993 में हुआ था फर्जीवाड़ा

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हल्का लेखपाल विनय सिंह द्वारा पुलिस को दी गई तहरीर में लिखा गया था कि, राजस्व ग्राम मेहड़ा तप्पा धतूरा परगना सिलहट में स्थित आराजी संख्या 1447/2 बेश कीमती भूमि को साल 1993 में कूट रचित तरीके से वक्फ मजार/कब्रिस्तान के नाम दर्ज करा दिया गया था। उक्त भूमि को अब्दुल गनी शाह मजार के तत्कालीन सदर शहाबुद्दीन समेत अन्य सदस्यों ने तत्कालीन कानून को व लेखपाल के साथ मिली भगत करके उक्त भूमि को मजार के नाम दर्ज करा दिया था।

इस मामले में एसडीएम कोर्ट ने बीते 19 नवंबर को उक्त इंद्राज को फर्जी पाए जाने पर निरस्त कर उसे सही कर दिया गया है। लेखपाल की शिकायत पर उक्त सरकारी भूमि को अवैध तरीके से मजार के नाम दर्ज करने वालों के खिलाफ पुलिस ने एफआईआर दर्ज कर ली है।

 

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