
नई दिल्ली। Delhi Red Fort Blast: दिल्ली में लाल किले के पास हुए आतंकी धमाके से पूरे देश को एक बार फिर से हिला दिया है। साथ ही सुरक्षा व्यवस्था की कलई भी खुल गई। हालांकि, घटना बहुत बड़ी नहीं थी और न ही बड़े पैमाने पर नुकसान हुआ, क्योंकि इस विस्फोट के बाद शुरू हुई जांच में अब तक जो भी चीजें सामने आई हैं, उससे साफ़ पता चल रहा है कि ये विस्फोट हड़बड़ी में हुआ है, जबकि प्लान इतना खतरनाक था कि, अगर आतंकी उसमें सफल हो जाते, तो दिल्ली एनसीआर ही नहीं बल्कि और भी कई इलाकों में तबाही मचती और सैकड़ों..शायद हजारों लोगों की जान चली जाती।
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सिलसिलेवार धमाके की थी योजना

दिल्ली विस्फोट की जांच कर रही खुफिया एजेंसियों के हाथ लगे अब तक के सुरागों पर गौर करें, तो आतंकियों के इरादे काफी भयावह थे। आतंकी उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ, अयोध्या में नव निर्मित राम मन्दिर और वाराणसी के काशी विश्वनाथ मन्दिर समेत कुछ अन्य शहरों को राख में तब्दील करने की तैयारी लगभग पूरी कर चुके थे, बस इसे अंजाम देना बाकी था। इसके लिए अयोध्या में स्लीपर सेल तक एक्टिवेट कर दिए गये थे। साथ ही 32 पुरानी गाड़ियों को IED जैसे खतरनाक विस्फोटक से लैस किया जा रहा था।
आतंकियों की योजना देश के कई शहरों में सिलसिलेवार धमाका करने की थी। माना जा रहा है कि, इस पूरे प्लान का ताना बाना आईएसआई की छत्र छाया में बुना गया था, लेकिन फरीदाबाद माड्यूल से जुड़े कुछ आतंकियों के पकड़े जाने के बाद उनके मंसूबों पर पानी फिर गया है। आइए बात करते हैं इस माड्यूल के भंडाफोड़ की शुरुआत की हुई और एजेंसियां इन आतंकियों तक कैसे पहुंचीं।
ऐसे खुला माड्यूल का राज
दरअसल, बीते 27 अक्टूबर को श्रीनगर बुनपोरा नौगाम इलाके में जैश ए मोहम्मद की तरफ से कई पोस्टर चिपकाये गये थे, जिसमें पुलिस और सुरक्षाबलों को बकायदा धमकी दी गई थी। पुलिस ने इसे हल्के में नहीं लिया और मामला दर्ज कर जांच शुरू की और इस व्हाइट कलर माड्यूल का पर्दाफाश किया। मामला दर्ज करने के बाद सबसे पहले पुलिस ने सीसी टीवी फुटेज के माध्यम से पोस्टर चिपकाने वालों को दबोचा। इनकी निशानदेही पर जम्मू-कश्मीर के शोपियां में रहने वाले मौलवी इरफान अहमद वाघ को पकड़ा गया। इरफ़ान मॉड्यूल का मुख्य संपर्ककर्ता था। इसके बाद गंदेरबल के वाकुरा से जमीर अहमद को अरेस्ट किया गया।
बरामद किया जा चुका है 2900 किग्रा विस्फोटक

इन दोनों से हुई पूछताछ के बाद 5 नवंबर को पुलिस ने सहारनपुर से डॉ. आदिल को हिरासत में लिया। आदिल IED बनाने में माहिर था। इस दौरान डॉ. मुजम्मिल शकील की गिरफ्तारी हुई। मुज्ज्मिल की गिरफ्तारी के बाद फरीदाबाद से हथियारों का बड़ा जखीरा जब्त किया गया। अब तक पुलिस और जांच एजेंसियों ने 2900 किलोग्राम विस्फोटक बरामद कर लिया है। अभी 300 किलो ग्राम विस्फोटक आतंकियों ने कही छिपा रखे हैं, जिसके लिए देश के कई इलाकों में तेजी से छापेमारी की जा रही है।
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खंदावली गांव में मिली विस्फोटक से भरी कार
इन्हीं गिरफ्तारियों से हड़बड़ाएं आतंकी उमर ने अपनी आई20 कार से लाल किले के पास ब्लास्ट कर दिया। इस ब्लास्ट की ज्यों ज्यों, जांच आगे बढ़ती गई, त्यों-त्यों आतंकियों की भयावह प्लानिंग की परतें उखड़ने लगीं। जांच के दौरान ही फरीदाबाद के खंदावली गांव के खेतों में खड़ी लाल इकोस्पोर्ट कार भी पकड़ी गई, जिसने कई राज खोल दिए। इस कार से बड़ी मात्रा विस्फोटक बरामद हुआ है, जिसमें NPK उर्वरक से बने IED के टुकड़े भी हैं। विस्फोटक से भरी कार मिलने के बाद खंदावली में 10 घर खाली करा दिए गये हैं और मौके पर 400 पुलिसकर्मी पहरा दे रहे। बताया जा रहा है कि इस कार को मंगलवार की सुबह एक महिला और दो पुरुष खड़ी करके गये थे और कहा था कि वे जल्दी लौटेंगे।
जुटाए गए थे 20 लाख रुपए

एक वरिष्ठ अधिकारी का कहना है कि, इस फरीदाबाद माड्यूल ‘जिसे अब व्हाइट कलर माड्यूल कहा जा रहा है कि क्योंकि इसमें अधिकतर डॉक्टर शामिल हैं’ ने देश के कई हिस्सों में तबाही मचाने के लिए 20 लाख रुपये जुटाए थे। ये रूपये डॉ. उमर को सौंपे गए थे। वह इन पैसों से गुरुग्राम और नूंह से 20 क्विंटल उर्वरक खरीदने में वाला था, जिससे मौत का मिश्रण यानी विस्फोटक तैयार किया जा सके। इस पूरी साजिश के सूत्रधार डॉ. मुजम्मिल, डॉ. अदील, डॉ. उमर और शाहीन अब पुलिस के हत्थे चढ़ चुके हैं।
इन सभी ने ISIS की शाखा ‘अंसार गजवत-उल-हिंद’ का रास्ता पकड़ा। उन्हें इस शाखा तक मौलवी इरफ़ान ने पहुंचाया था। इस माड्यूल का मकसद देश के कई शहरों में तबाही मचाना था। खैर अब पूरे माड्यूल का पर्दाफाश होने से कुछ समय के लिए खतरा टल गया है, लेकिन ये आतंकी अपनी हरकतों से बाज नहीं आने वाले। देश को हमेशा सुरक्षित रखने के लिए खुफिया एजेंसियों को हमेशा चौकन्ना रहना होगा और अपने तंत्र को भी मजबूत करने होगा।
इनकी हो चुकी है गिरफ्तारी
अरिफ निसार दार उर्फ साहिल, निवासी नौगाम, श्रीनगर
यासिर-उल-अशरफ, निवासी नौगाम, श्रीनगर
मकसूद अहमद दार उर्फ शाहिद, निवासी नौगाम, श्रीनगर
मौलवी इरफान अहमद (मस्जिद के इमाम), निवासी शोपियां
जमीर अहमद अहंगर उर्फ मुतलाशा, निवासी वाकुरा, गंदरबल
डॉ. मुजम्मिल अहमद गनाई उर्फ मुसाइब, निवासी कोइल, पुलवामा
डॉ. आदिल, निवासी वानपोहा, कुलगाम
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