
झांसी। CBI Raid: उत्तर प्रदेश के झांसी जिले में भष्ट्राचार का एक बड़ा मामला सामने आया है। यहां लंबे समय से डटे सेंट्रल के जीएसटी अफसरों ने अपनी काली कमाई से अकूत संपति जमा कर ली। बुधवार एक जनवरी को जब सीबीआई की टीम उनके घरों पर रेड डालने पहुंची, तो उनके आलीशान घर और लग्जरी शानो शौकत को देखकर दंग रह गई।
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कई गोपनीय फाइलें जब्त

छापे के दौरान सीबीआई को न सिर्फ 1.60 करोड़ की नकदी मिली बल्कि सोने-चांदी की ईंटे और जेवरात भी बरामद हुए। जांच एजेंसी को यहां गद्दे में भरी रकम मिली। रकम की मात्रा को देखकर उसे गिनने के लिए मशीन मंगाई गई। रेड डालने झांसी पहुंची टीम सबसे पहले सेवाराम मिल कंपाउंड में रहने वाले अनिल के घर में दाखिल हुई। यहां घर में लगे महंगे फर्नीचर और लग्जरी वस्तुओ को देखकर दंग रह गई। अनिल के घर की सजावट में काफी-महंगे आइटमों का इस्तेमाल हुआ था। सूत्रों के हवाले से बताया जा रहा है कि, सीबीआई को अनिल के घर से कई गोपनीय फाइलें भी मिली हैं, जिन्हें वह अपने साथ ले गई।
अकूत संपति देख दंग रह गई टीम
बताया जा रहा है कि, अनिल बीते ढाई दशक से जिले में पोस्टेड हैं और जीएसटी से जुड़े सभी विवाद उन्हीं के माध्यम से ही सुलझाए जाते हैं। दो साल पहले उनका स्थान्तरण आगरा के लिए हो गया था, लेकिन कुछ ही महीने में वे वापस झांसी आ गये और तब से यही हैं। आलीशान घर, नकदी और सोने चांदी के अलावा अनिल जिले के सिविल लाइंस स्थित एक रेस्टोरेंट में पार्टनर भी हैं और जमीन के कारोबार से जुड़े हैं। अनिल के साथ ही सीबीआई की टीम स्टेशन रोड निवासी अजय शर्मा के घर भी पहुंची। अजय ने मात्र चार वर्षों की तैनाती में अकूत संपति जमा कर ली।
डिप्टी कमिश्नर के घर भी रेड
लग्जरी आइटमों से सजे अजय के घर को देखकर सीबीआई की आंखें चौधिया गईं। जांच टीम ने यहां से भी बड़ी मात्रा में नकदी बरामद की और लग्जरी आइटमों की भरमार देखने को मिली। अजय और अनिल के अलावा डिप्टी कमिश्नर आईआरएस प्रभा भंडारी के यहां भी सीबीआई ने छापा डाला। प्रभा की तैनाती यहां छह महीने पहले ही हुई थी, लेकिन उन्होंने पूरा कार्यालय अजय और अनिल के हवाले ही कर दिया था। प्रभा ने कुछ महीने पहले ही 68 लाख का घर खरीदा था।
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दो कर्मचारियों को दबोचा
सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, जांच टीम को जीएसटी अफसरों के पास से घूस के तौर 70 लाख समेत 1. 60 करोड़ रूपये के साथ सोने-चांदी के ईंट व जेवरात बरामद हुए। हालांकि, बरामदगी को लेकर सीबीआई की तरफ से कुछ भी स्पष्ट नहीं किया गया है। बताया जा रहा है कि सीबीआई की टीम 31 दिसंबर मंगलवार को ही झांसी पहुंच गई थी। टीम ने सबसे पहले सुबह करीब 10 बजे इलाइट चौराहे पर तीन गाड़ियों से घेरेबंदी कर सीजीएसटी के दो कर्मचारियों को दबोचा, इनमें एक महिला कर्मचारी भी शामिल थी।
घर पर मिला ताला

इस कार्रवाई से चौराहे पर हलचल मच गई। इसके बाद बुधवार को टीम ने छापेमारी की कार्रवाई शुरू की। इस दौरान अलग-अलग टीमें अजय शर्मा, अनिल तिवारी, नरेश कुमार गुप्ता एवं राजू मंगनानी के घर पहुंचीं। इस दौरान एक टीम डिप्टी कमिश्नर प्रभा भंडारी के घर भी पहुंची। बताया जा रहा है कि, टीम जब प्रभा के घर पहुंची तो वह घर पर नहीं थीं, जिस पर टीम ने ताला तोड़ने की धमकी दी, तब जाकर घर का ताला खोला गया।
दो करोड़ की रिश्वत का आरोप
सीबीआई की टीम जिले के सेंट्रल जीएसटी ऑफिस भी पहुंची। इससे पहले 18 दिसंबर को टैक्स चोरी की शिकायत मिलने पर जीएसटी की टीम ने झोकनबाग स्थित तेजपाल मंगनानी एवं राजू मंगनानी के जय दुर्गा हार्डवेयर प्रतिष्ठान में छापेमारी की थी। उस दौरान करोड़ों की जीएसटी की चोरी पकड़ी गई थी और कई दस्तावेज बरामद हुए थे। सूत्रों के हवाले से बताया जा रहा है कि, इस मामले को निपटाने के लिए दो करोड़ की रिश्वत मांगी गई थी, जिसकी किसी ने शिकायत कर दी थी, लेकिन इससे पहले ही जिले की सेंट्रल जीएसटी टीम सीबीआई की रडार पर थी।
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पूछताछ में नाम आया सामने
ऐसे में शिकायत मिलने के बाद सीबीआई ने कारोबारी समेत अनिल एवं अजय शर्मा को सर्विलांस पर ले लिया। नरेश ने ही अनिल तिवारी की मुलाकात राजू मंगनानी से कराई थी। प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि बुधवार की दोपहर में एसपी सिटी कार्यालय के सामने स्थित अनिल के रेस्तरा से उसे एवं अजय को राजू मंगनानी ने 70 लाख रुपये की पहली किस्त देते हुए पकड़ा गया। पूछताछ के दौरान उन लोगों ने डिप्टी कमिश्नर प्रभा भंडारी का भी नाम लिया।
कुछ भी बोलने से कतरा रहे GST अफसर

बता दें कि, राजू मंगनानी शहर के बड़े कारोबारी माने जाते हैं। उन्होंने अपने बड़े भाई तेजपाल के साथ मिलकर एक फ़र्म बनाई थी, जिसका नाम जय दुर्गा था। इसी फर्म के नाम से वे प्लाईवूड की सप्लाई करते हैं। इनका काम सिर्फ झांसी तक ही नहीं बल्कि आसपास के जिलों में भी फैला है। प्लाईवुड के साथ ही इन्होंने कुछ समय पहले जमीन का भी कोरबार शुरू कर दिया था। फ़िलहाल इस कार्रवाई को बेहद गोपनीय रखा गया है और सीजीएसटी के अफसर भी इस मामले में कुछ भी बोलने से कतरा रहे हैं।
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