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Seminar: देश का प्रहरी है जनजाति समाज, बेटियों के प्रति भी रहा है हमेशा सजग- इंदर भगत

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  • साई कॉलेज में जनजाति समाज के योगदान पर सेमिनार आयोजित

अम्बिकापुर। Seminar: जनजाति समाज देश का प्रहरी है, उन्हीं से लोककला, परम्परा और विरासत जीवन्त है। यह बातें शनिवार को श्री साई बाबा आदर्श स्नातकोत्तर महाविद्यालय में जनजाति समाज का गौरवशाली अतीत, ऐतिहासिक, सामाजिक एवं आध्यात्मिक योगदान विषय पर आयोजित एकदिवसीय सेमिनार के दौरान मुख्य वक्ता विषय विशेषज्ञ के रूप में आदिवासी समाज के इंदर भगत ने कही।

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इस समाज में नहीं हैं दहेज और भ्रूण हत्या जैसी स्थितियां

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उन्होंने जनजाति समाज के योगदान को फलक पर लाते हुए कहा कि इस समाज में कभी भी दहेज, भ्रूण हत्या जैसी स्थितियां नहीं रहीं। यह समाज अपने बेटियां के प्रति हमेशा सजग रहा है। जनसंख्या अनुपात में बेटियों का औसत बहुत अच्छा है। हम जहां देश की आबादी में 32 फीसदी हैं, तो बस्तर और सरगुजा में 65 फीसदी हैं। जनजाति समाज के त्याग, बलिदान और स्वतंत्रता आंदोलन में भागीदारी को इतिहास में उपेक्षा मिली है जिसे अब जानना होगा। उन्होंने कहा, जंगल की जनजातियों ने भारत के विरासत और परम्परा को संजोया है।

सरदार पटेल के संस्मरणों से अवगत कराया

उन्होंने बिरसा मुंंडा, संत गहिरा गुरू, माता राजमोहिनी देवी, लागूर किसान, जगदेवराम उरांव, राजनाथ भगत, माझीराम गोड़ से लगायत महात्मा बुद्ध, आचार्य चाणक्य, रानी दुर्गावती, झांसी की रानी, सरदार पटेल के संस्मरणों से अवगत कराया। इससे पहले अतिथियों ने मां सरस्वती, श्री साई नाथ और जनजाति समाज के प्रेरक व्यक्तित्वों के तैल चित्र माल्यार्पण और दीप प्रज्ज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया। अतिथियों का स्वागत पुष्प गुच्छ और बैच लगा कर किया गया।

बिरसा मुंडा के योगदान को किया याद

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अतिथियों को स्वागत करते हुए प्राचार्य डॉ. राजेश श्रीवास्तव ने कहा कि आदिवासी जनजाति समाज हमें जीवन देता है। उन्होंने कभी गुलामी स्वीकार नहीं की बल्कि अपना सर्वोच्च बलिदान दिया। डॉ. श्रीवास्तव ने नीलाम्बर-पीताम्बर, तिलखा मांझी के संस्मरण से अवगत कराया। सेमिनार का विषय प्रवर्तन करते हुए कार्यक्रम के संयोजक डॉ. आर.एन. शर्मा ने कहा कि बिरसा मुंडा ने समाज के साथ राजनीति की भी लड़ाई लड़ी।

जनजागरण से समाज को किया एकजुट

उन्होंने जनजागरण से समाज को एकजुट किया और अपनी संस्कृति-सभ्यता के प्रति सचेत किया। उन्होंने कहा, विदेशी आक्रांताओं ने न सिर्फ हमारे मंदिरों को तोड़ा बल्कि दिल और आत्मा पर भी प्रहार किये। जनजाति समाज ने गांव में बसने वाले भारत को एक किया।

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इस दौरान जनजाति समाज की छात्राओं ने अतिथियों के समक्ष कर्मा और जनजाति नृत्य कर अपनी लोकसंस्कृति से अवगत कराया। कार्यक्रम के दौरान शाल, श्रीफल और स्मृति चिह्न प्रदान कर मुख्य अतिथि इन्दर भगत का सम्मान किया गया। कार्यक्रम का संचालन सहायक प्राध्यापक देवेंद्र दास सोनवानी और पल्लवी द्विवेदी ने किया।

अतिथियों का आभार डॉ. श्रीराम बघेल ने किया। इस अवसर पर आईक्यूएसी समन्वयक डॉ. शैलेष देवांगन, कम्प्यूटर एंड आईटी विभाग के अध्यक्ष डॉ. विवेक कुमार गुप्ता, शिक्षा विभाग के अध्यक्ष डॉ. दिनेश शाक्य तथा सभी प्राध्यापक और विद्यार्थी उपस्थित रहे।

 

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