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Swami Vivekanand Jayanti: स्वामीजी से अलंकृत होते हैं ज्ञान के आनन्द, राष्ट्रप्रेमी संत, योद्धा संन्यासी जैसे विभूषण

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  • राष्ट्रीय युवा दिवस के रूप में मना भारतीय ज्ञान के दूत स्वामी विवेकानन्द की जयंती
  • प्राचार्य ने नशा के खिलाफ दिलायी शपथ
  • हरी झंडी दिखा कर भारत संकल्प दौड़ को किया रवाना

अम्बिकापुर। Swami Vivekanand Jayanti: बालक नरेन्द्रनाथ से विवेकानन्द बनने के बाद भारतीय ज्ञान के दूत, दैवीय वक्ता, ज्ञान के आनन्द, राष्ट्रप्रेमी संत, योद्धा संन्यासी जैसे विभूषण भी स्वामी जी के लिए छोटे पड़ जाते हैं। यह बातें सोमवार को राष्ट्रीय युवा दिवस के उपलक्ष्य पर स्वामी विवेकान्द जयंती के अवसर पर श्री साई बाबा आदर्श स्नातकोत्तर महाविद्यालय में राष्ट्रीय सेवा योजना एवं स्वीप के तहत आयोजित कार्यक्रम के दौरान प्राचार्य डॉ. राजेश श्रीवास्तव ने कही।

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163वीं जयंती मनी

Swami Vivekanand Jayanti

उन्होंने स्वामी जी की 163वीं जयंती के अवसर पर कहा कि स्वामी विवेकानन्द जब शिकागो धर्म सम्मेलन को सम्बोधित करने के बाद भारत लौटे और देश का भ्रमण किया तो वह विद्वान से विद्यावान बन चुके थे। उन्होंने जब बहनों और भाइयों का सम्बोधन किया, तो पूरी दुनिया एक परिवार का रूप ले चुकी थी। वसुधैव कुटुम्बकम् का संदेश पहुंच चुका था। डॉ. श्रीवास्तव ने कहा कि विवेकानन्द ने भागवत गीता के तथ्यों को आध्यात्मिक कलेवर में सिखाया जो जीवन दर्शन है।

इससे पहले अतिथियों ने मां सरस्वती, स्वामी विवेकानन्द और श्री साईनाथ की तस्वीर पर माल्यार्पण तथा दीप प्रज्ज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया। राष्ट्रीय सेवा योजना के स्वयं सेवकों ने बैच लगा कर स्वागत किया तथा प्रेरणागीत प्रस्तुत किया।

 बड़ा संदेश देता है विवेकानन्द का छोटा जीवन 

Swami Vivekanand Jayanti:

कार्यक्रम को सम्बोधित करते हुए स्वीप नोडल अधिकारी डॉ. अजय कुमार तिवारी ने कहा कि स्वामी जी का जीवन बहुत ही छोटा 39 वर्षों का था जिसमें उन्होंने मानवता की सेवा की। उनका छोटा जीवन बड़ा संदेश देता है। उनके जीवन में खेतड़ी के महाराजा अजीत सिंह का बड़ा सहयोग रहा। उन्होंने स्वामी जी की शिकागो यात्रा के लिये धन दिया और विवेकानन्द नाम भी दिया।

महाराजा अजीत सिंह ने भेंट की थी पगड़ी 

Swami Vivekanand Jayanti:

महाराजा अजीत सिंह ने उन्हें एक पगड़ी भेंट की थी जो अविस्मरणीय है। अल्लसिंगा पेरूमल और रामनाद के राजा भास्कर सेतुपति स्वामी जी का सहयोग करते रहे। डॉ. तिवारी ने कहा कि भारतीय ज्ञान परम्परा में शिष्य-गुरू के नाम से और गुरू-शिष्य के नाम से जाना जाये, यह दुर्लभ है। स्वामी रामकृष्ण परमहंस और स्वामी विवेकानन्द इसी के पर्याय हैं।

कार्यक्रम को सम्बोधित करते हुए एनईपी के नोडल अधिकारी डॉ. आर.एन. शर्मा ने कहा कि भारतीय ज्ञान परम्परा और आध्यामिकता को स्वामी जी ने वैश्विक मंच पर लाया। उन्होंने भारतीय विरासत, ज्ञान और आध्यात्मिक जीवन से दुनिया को अवगत कराया। डॉ. शर्मा ने रोम्या रोलां के संस्मरण से अवगत कराया। कार्यक्रम के दौरान एनएसएस की स्वयं सेवक शानू रानी तिर्की, सृंखला गोरे और गौरी यादव ने स्वामी विवेकानन्द के जीवन दर्शन से अवगत कराया।

देश की एकता को किया मजबूत 

Swami Vivekanand Jayanti:

इस अवसर पर प्राचार्य डॉ. राजेश श्रीवास्तव ने नशा से मुक्ति के लिए सभी प्राध्यापक और विद्यार्थियों को शपथ दिलायी। उन्होंने हरी झंडी दिखा कर भारत संकल्प दौड़ को रवाना किया। स्वयं सेवक और विद्यार्थियों ने दौड़ में सहभागिता कर देश की एकता को मजबूत किया।

कार्यक्रम का संचालन अनुष्का सिंह परिहार और अदिति भारतीय ने किया तथा सहायक प्राध्यापक कृष्णाराम चौहान ने सभी का आभार प्रकट किया।
कार्यक्रम के दौरान आईक्यूएसी समन्वयक डॉ. शैलेष देवांगन, कम्प्यूटर एंड आईटी के विभागाध्यक्ष डॉ. विवेक कुमार गुप्ता, शिक्षा विभाग के अध्यक्ष डॉ. दिनेश शाक्य, सहायक प्राध्यापक सुमन मिंज तथा सभी प्राध्यापक और विद्यार्थी उपस्थित रहे।

 

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