
कानपुर। Kanpur Crime: दोस्ती, प्यार और फिर लिव इन रिलेशन ने कानपुर की 24 साल की आकांक्षा को मौत की नींद सुला दिया। कानपुर के एक रेस्टोरेंट में काम करने वाली आकांक्षा को उसके ही प्रेमी सूरज ने मार डाला और फिर दोस्त के साथ मिल कर उसकी लाश को 100 किलो मीटर दूर बांदा ले जाकर यमुना नदी में फेंक दिया। अपने किये को छिपाने के लिए हत्या के बाद वह खुद ही आकांक्षा की मां से उसके मोबाइल से मैसेज पर बात करने लगा, लेकिन सच कब तक छिप सकता है। मां को आशंका हो गई कि, उसकी बेटी के साथ कुछ हो गया है और वह शिकायत लेकर पुलिस कमिश्नर के पास पहुंच गई। इसके बाद पूरे राज से पर्दा उठा और दोनों ने को गिरफ्तार कर लिया गया।
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सूरज को रास नहीं आया आकांक्षा का फैसला

कानपुर के हनुमंत बिहार में किराये पर रहने वाली आकांक्षा के सपने भी हर लड़कियों की तरह सुहाने थे, जिन्हें वह खुद के पैरों पर खड़े होकर पूरा करना चाहती थी, इसीलिए वह घर से दूर रहकर एक रेस्टोरेंट में नौकरी करने लगी थी। यहां उसकी मुलाक़ात फतेहपुर के रहने वाले सूरज से हुई। दोनों के बीच पहले दोस्ती हुई, फिर प्यार हुआ और फिर दोनों लिव इन में रहने लगे। कुछ समय तक तो दोनों के बीच सबकुछ ठीक ठाक चलता रहा, फिर शक बढ़ा तो लड़ाई झगड़े भी बढ़ने लगे। इससे परेशान होकर आकांक्षा ने सूरज को छोड़ने का फैसला कर लिया, जो सूरज को पसंद नहीं आया और उसने अपने ही प्यार की हत्या कर दी।
दूसरी लड़कियों से भी बात करता था सूरज
आकांक्षा का परिवार कानपुर देहात के रूरा कस्बे में रहता है। विजयश्री के दो बेटे और दो बेटियां हैं, जिनमें से एक आकांक्षा थी, जो कानपुर के हनुमंत बिहार में किराये पर रहकर एक रेस्टोरेंट में नौकरी करती थी। यहां उसकी मुलाकात फतेहपुर निवासी सूरज से हुई। दोनों के बीच पहले प्यार हुआ और फिर दोनों लिव इन में रहने लगे। साथ-साथ रहने के दौरान आकांक्षा को पता चला की सूरज और भी लड़कियों से बात करता है, तो उसने इसका विरोध करना शुरू किया, लेकिन सूरज अपनी हरकतों से बाज नहीं आ रहा था, तो आकांक्षा ने उससे अलग होने का फैसला किया, जो सूरज को रास नहीं आया और 21 जुलाई की रात को वह आकांक्षा के कमरे में घुसा, जहां दोनों के बीच जमकर बहस हुई।
यमुना नदी में फेंका शव
इसी दौरान गुस्से में सूरज ने आकांक्षा का सिर दीवार पर दे मारा, तो वह गिरकर बेहोश हो गई। इससे सूरज घबरा गया और उसे अस्पताल ले जाने की बजाय उसका गला घोंट दिया। हत्या करने के बाद सूरज ने अपने दोस्त आशीष ‘जो फतेहपुर का ही रहने वाला था’ को फोन किया और तुरंत रूम पर आने को कहा। दोस्त के बुलाने पर आशीष मौके पर पहुंचा और फिर दोनों का आकांक्षा की लाश को सूटकेस में भरा। इसके बाद रात के अंधेरे में ही बाइक के पीछे सूटकेस को बांध कर बांदा के चिल्लाघाट पहुंचे। यहां सूटकेस को यमुना नदी में फेंक दिया और कानपुर वापस आ गये। वे दोनों आश्वस्त थे कि सबूत मिट गया है लेकिन जुर्म कभी छिपता नहीं, वह चीख-चीख कर अपनी मौजूदगी का एहसास करा देता है। कुछ ऐसा ही हुआ इस केस में भी।
आकांक्षा के मोबाइल से करता था चैट

दरअसल, सूरज ने आकांक्षा का मोबाइल अपने पास रख लिया और उसी से वह उसकी मां से चैट पर बात करता था। उसने आकांक्षा की मां विजय श्री को मैसेज किया कि उसे लखनऊ में नौकरी मिल गई है और अब वह यही शिफ्ट हो गई है। उसने विजय श्री को बताया की सूरज से ब्रेकअप हो गया है। आप चिंता मत कीजियेगा। विजय श्री के साथ ही कानपुर के रेस्टोरेंट मालिक को भी मैसेज भेजा गया कि वह लखनऊ शिफ्ट हो गई है। सूरज ये खेल कई दिनों तक खेलता रहा। इस बीच आकांक्षा की मां उसे लगातार फोन करती रही, लेकिन न तो उनका फोन उठता था और न हो कॉल बैक आती थी, जिससे विजयश्री को अनहोनी की आशंका होने लगी तो उन्होंने पुलिस के चक्कर काटने शुरू कर दिए, लेकिन कहीं पर सुनवाई नहीं हो रही थी।
मोबाइल की सीडीआर और लोकेशन से खुला राज
वह बार-बार पुलिस को बता रही थी कि सूरज ने उसे मार दिया है, लेकिन पुलिस उन्हें ये कहकर टरका रही थी कि वह अपने प्रेमी के साथ कहीं भाग गई होगी। दो महीने गुजर गये, बेटी का कहीं पता नहीं चल रहा था, तो उन्होंने पुलिस कमिश्नर अखिल कुमार से मुलाकात की और न्याय की गुहार लगाई। कमिश्नर के आदेश पर मामले की जांच शुरू हुई और सूरज के मोबाइल की सीडीआर और लोकेशन निकलवाई गई, तो केस की परतें खुलनी शुरू हुईं। जब 21 जुलाई की रात सूरज के मोबाइल की लोकेशन कानपुर से लेकर बांदा के चिल्लाघाट तक दिखी, तो पुलिस का शक और गहरा गया। इसके बाद पुलिस ने सूरज और आशीष को हिरासत में ले लिया और सख्ती से पूछताछ की तो सारा दोनों से सारा सच उगल दिया और अपना गुनाह कबूल कर लिया। अब पुलिस नदी में आकांक्षा की लाश तलाश रही है।
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