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Jhansi Fire Incident: कोई लापरवाही नहीं आई सामने, प्लग में स्पार्किंग से लगी आग, कमिश्नर ने शासन को सौंपी जांच रिपोर्ट  

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झांसी। शुक्रवार 16 नवंबर को झांसी के महारानी लक्ष्मीबाई मेडिकल कॉलेज के चाइल्ड वार्ड (एसएनसीयू) में लगी आग के मामले (Jhansi Fire Incident) में मंडलायुक्त बिमल कुमार दुबे ने शासन को जांच रिपोर्ट सौंप दी है। इसमें किसी भी तरह के आपराधिक कृत्य या लापरवाही का मामला सामने नहीं आया है। बताया जा रहा है कि आग प्लग में हुई स्पार्किंग की वजह लगी। रिपोर्ट में उन आठ कर्मचारियों के बयान दर्ज किये गये हैं जो उस वक्त वार्ड में मौजूद थे। इसके अलावा, वार्ड में भर्ती 10 बच्चों के परिजनों की भी गवाही ली गई है।

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छह परिजनों को सौंपे गये बच्चे

Jhansi fire incident

बता दें कि चाइल्ड वार्ड में लगी इस आग में 10 नवजातों की मौत हो गई थी। वहीं कई बच्चे झुलस गये थे, जिनमें से एक की इलाज के दौरान मौत हो गई थी। ऐसे में अब मौत का ये आंकड़ा 11 हो गया है। इधर, सरकार ने मृत और घायल नवजात शिशुओं के परिवारों को वित्तीय सहायता प्रदान कर दी है। वहीं छह परिजनों के उनके बच्चे सौंप दिए गये हैं। बाकी 31 बच्चों का इलाज अभी चल रहा है।

आज झांसी पहुंचेगी चार सदस्यीय टीम 

शासन ने चिकित्सा शिक्षा एवं प्रशिक्षण महानिदेशक किंजल सिंह के नेतृत्व में चार सदस्यीय टीम का गठन किया है। ये टीम सोमवार को यहां पहुंचेगी और मामले की जांच करेगी। टीम को 7 दिन के अंदर रिपोर्ट भेजनी है। इस टीम में स्वास्थ्य निदेशक, ऊर्जा निदेशक और अग्निशमन निदेशक द्वारा नियुक्त अधिकारी शामिल हैं। ये टीम आग लगने की वजह और और घटना में बरती गई लापरवाही की जांच करेगी। साथ ही भविष्य में इस तरह की घटना न हो इसे लेकर भी सुझाव देगी।

 अस्पताल प्रशासन ने जारी की बच्चों की सूची 

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प्रशासन ने आग लगने के दौरान वार्ड में भर्ती 49 बच्चों की लिस्ट जारी कर दी है। इनमें से 11 बच्चों की मौत हो गई है। छह बच्चों को उनके परिवारों को सौंप दिया गया है। बाकी 32 नवजातों का इलाज अभी जारी है। आग लगने की अफरा तफरी के बीच कई बच्चे गायब  हो गये थे, जो अब मिल गये हैं। रविवार को आखिरी लापता बच्चे के मां के पास लौटने के बाद स्थिति स्पष्ट हो गई। दुर्घटना के तुरंत बाद एसएससीयू मेडिकल इंस्टीट्यूट के विभाग में भर्ती बच्चों की संख्या 55 बताई गई थी, लेकिन प्रशासन ने बाद में बच्चों की संख्या 49 बताई। माना जा रहा था कि हादसे के दौरान मची अफरा-तफरी में छह बच्चे लापता हो गए थे। बाद में जांच के दौरान पता चला कि जो छह बच्चे लापता थे, वे  घटना के समय वार्ड में भर्ती 49 शिशुओं में से ही थे। इन बच्चों की तलाश की गई और उन्हें उनके परिजनों के हवाले कर दिया गया।

ललितपुर में मिला एक बच्चा

बताया जा रहा है कि इनमें से एक बच्चा ललितपुर में मिला था। दरअसल, ललितपुर के दंपत्ति के बच्चे की मौत हादसे में हो गई थी, लेकिन वे इस बच्चे को अपना समझ कर उठा लाये थे। वहीं महोबा के रहने वाले एक दंपत्ति के बच्चे को एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया है। इसी तरह, झांसी के कृपाराम की पत्नी शांति का बच्चा महोबा के बुलाराम की पत्नी लक्ष्मी के पास पाया गया। वह घटना के बाद उस बच्चे को अपना समझा और एक निजी अस्पताल में उसका इलाज करा रही थी।  दूसरी ओर, लक्ष्मी के बच्चे का मेडिकल कालेज में ही इलाज चल रहा था।  प्रशासन ने बताया कि हादसे में हमीरपुर निवासी याकूब नजमा की दो बेटियों की मौत हो गई। इस बारे में दंपति को तत्काल जानकारी नहीं दी गई, इसलिए उन्होंने दोनों लड़कियों को लापता मान लिया, लेकिन पोस्टमार्टम के बाद दोनों लड़कियों के शव उन्हें सौंप दिए गये।

 आग में झुलसने नहीं मरा था 11वां बच्चा 

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इस संबंध में जिलाधिकारी अविनाश कुमार ने बताया कि घटना के वक्त वार्ड में 49 बच्चे भर्ती थे, जिनमें से 10 बच्चों की मौत हादसे वाले दिन ही हो गई थी। इसके बाद  रविवार को इलाज के दौरान एक बच्चे की मौत हो गई थी नवजात की मौत हो गई। हालांकि उसकी मौत आग में झुलसने की वजह से नहीं हुई, फिर भी उसका पोस्टमार्टम कराया गया। मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. एनएस सेंगर ने बताया कि मृत बच्चा प्रीमैच्योर था। उसका वजन लगभग 1 किलो था। वह आग से नहीं झुलसा था। नवजात की मृत्यु  बर्थ एस्फिक्सिया की वजह की वजह हुई है।

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