
नई दिल्ली। Minority Students: केंद्रीय अल्पसंख्यक छात्रवृत्ति योजना भारत सरकार की एक वित्तीय सहायता योजना है। इसका उद्देश्य मुस्लिम, ईसाई, सिख, बौद्ध, पारसी और जैन जैसे अल्पसंख्यक समुदायों के छात्रों को आर्थिक मदद देना है। इस योजना से छात्रों को अपनी पढ़ाई जारी रखने में सहायता मिलती थी। इसे अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय संचालित करता था। अब सरकार ने इसे बंद करने का निर्णय लिया है। यह योजना अघोषित रूप से बंद हुई है क्योंकि इसके लिए बजट केवल पुराने बकाए के भुगतान के लिए है।
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दो साल से नहीं आया कोई आवेदन
इस योजना के लिए बजट में पर्याप्त राशि नहीं दी गई है। हाल के बजट में पूरे देश के छात्रों के लिए केवल 635 करोड़ रुपये निर्धारित किए गए हैं, जो नाकाफी है। हालांकि, सरकार का कहना है कि पिछले दो साल में इस योजना के लिए कोई आवेदन नहीं आया। योजना में हुई गड़बड़ियों के कारण केंद्र सरकार ने 2022-23 में इसकी जांच कराने का आदेश दिया था। इसके परिणामस्वरूप 2023-24 और 2024-25 में आवेदन नहीं लिए गए। पिछले दो साल से सरकार ने इस योजना का बजट घटाया है।
नई सहायता के लिए प्रावधान नहीं है
सरकार ने 9वीं और 10वीं कक्षा के छात्रों के लिए 198.70 करोड़ रुपये, 12वीं कक्षा के लिए 413 करोड़ रुपये और तकनीकी, व्यवसायिक पाठ्यक्रमों के लिए केवल 7.34 करोड़ रुपये आवंटित किए हैं। अल्पसंख्यक विभाग का कहना है कि इस राशि से केवल 2022-23 का बकाया चुकाया जा सकता है। इस वर्ष नई सहायता के लिए कोई प्रावधान नहीं है।
इतने का बजट देती थी सरकार
एक समय था जब सरकार एक राज्य के लिए 350 करोड़ रुपये तक का बजट देती थी। उत्तर प्रदेश के लिए 2021-22 में 442 करोड़ रुपये दिए गए थे। तकनीकी और व्यवसायिक छात्रों के लिए 30 करोड़ से अधिक आवंटित किए गए थे। अब यह बजट घटकर केवल 7 करोड़ रह गया है
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