
प्रयागराज। CPCB Report on Prayagraj Ganga River: भारत को हिन्दू राष्ट्र बनाने, पवित्र नदियों की सफाई, मन्दिरों और गोवंश के संरक्षण के लिए कृत संकल्प बीजेपी इन सब पर अरबों-खरबों का बजट खर्च का रही है, लेकिन वह अपने मकसद में सफल नहीं हो पा रही है, इसका जीता जगता है गंगा-यमुना में हद से ज्यादा बढ़ा प्रदूषण।
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एनजीटी को सौंपी रिपोर्ट

दरअसल, सोमवार 17 फरवरी को सेंट्रल पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड (CPCB) ने नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) को अपनी रिपोर्ट सौंपी है, जिसमें बताया गया है कि महाकुंभ के दौरान प्रयागराज में गंगा के पानी में फेकल कोलीफॉर्म बैक्टीरिया की मात्रा बढ़ गई है, जिससे नदी में प्रदूषण का स्तर भी बढ़ गया है। रिपोर्ट में ये भी कहा गया है कि जब से महाकुंभ शुरू हुआ है, तब से प्रयागराज में अलग-अलग स्थानों पर फेकल कोलीफॉर्म का स्तर नहाने के लिए प्राथमिक जल गुणवत्ता के हिसाब से नहीं है।
एनजीटी ने यूपी सरकार को दिए थे ये निर्देश

नहाने लायक नहीं है प्रयागराज का जल

हालांकि डाउन टू अर्थ (DTE) को पता चला है कि ऐसा नहीं किया जा रहा है। एनजीटी ने दिसंबर 2024 में सरकार को ये भी निर्देश दिया था कि महाकुंभ के दौरान प्रयागराज में गंगा में पर्याप्त मात्रा में पानी उपलब्ध रहना चाहिए। साथ ही पानी की स्वच्छता पर भी विशेष ध्यान दिया जाये कि वह पीने और नहाने लायक हो।
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2019 में भी बढ़ा था प्रदूषण

गौरतलब है कि ऐसा पहली बार नहीं है जब गंगा के प्रदूषण पर सवाल उठा है। इससे पहले 2019 में भी प्रयागराज में हुए कुंभ के दौरान भी सीपीसीबी की रिपोर्ट में बताया गया था कि प्रमुख स्नान के दिनों में पानी की गुणवत्ता प्रभावित हुई थी। 2019 के कुंभ मेले में 130.2 मिलियन श्रद्धालुओं ने गंगा में डुबकी लगाई थी। उस वक्त की रिपोर्ट के कहा गया था कि, करसर घाट पर बीओडी और फेकल कोलीफॉर्म का स्तर लेवल से ज्यादा है। हालांकि यमुना में भी घुलनशील ऑक्सीजन का लेवल मानकों के अनुरूप था, लेकिन पीएच, बीओडी और फेकल कोलीफॉर्म अलग-अलग अवसर पर मानक से ज्यादा रहे।
हरिद्वार में भी प्रदूषित हैं गंगा
प्रयागराज ही नहीं हरिद्वार में भी गंगा में अक्सर प्रदूषण बढ़ा रहता है। दिसंबर 2024 में हरिद्वार की हर की पैडी को लेकर प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने एक रिपोर्ट जारी की थी और बताया था कि यहां का पानी इतना प्रदूषित है कि वह आचवन करने लायक भी नहीं है, पीना तो बहुत दूर की बात है।

आपको बता दें कि हरिद्वार हो या प्रयागराज, दोनों ही स्थानों पर त्योहारों और स्नान पर्वों पर लाखों की संख्या में श्रद्धालु आते हैं और पवित्र गंगा में डुबकी लगाते हैं। साथ ही केनों में भरकर गंगाजल घर ले जाते हैं, जिसे पूजा-पाठ आदि में इस्तेमाल करते हैं। वहीं कुछ लोगों इसे पानी में मिलकर पीते भी हैं। ऐसे में ये रिपोर्ट डराने वाली है। वैज्ञानिकों का कहना है कि, गंगाजल पीना हानिकारक हो गया है। हर की पैडी के गंगाजल को लेकर आई रिपोर्ट में इसे बी श्रेणी का जल बताया गया था।
गंगा की सफाई पर खर्च हो चुके हैं अरबों

उल्लेखनीय है कि गंगा नदी को स्वच्छ और शुद्ध रखने के लिए केंद्र से लेकर राज्य सरकार तक ने कई योजनाएं चलाई, जिसमें नमामि गंगे भी शामिल है। इस योजना को तमाम सामाजिक और धार्मिक संगठनों का साथ भी मिला। वहीं सरकार ने इस पर 20,000 करोड़ का बजट भी व्यय किया। हालांकि इन सबसे गंगा के प्रदूषण में कुछ हद तक कमी तो आई, लेकिन उसमें गिरते नालों को आज भी नहीं रोका जा सका। नतीजतन गंगा आज भी प्रदूषित है। यहां तक कि एसटीपी का पानी भी बिना ट्रीटमेंट के सीधा गंगा में बहाया जाता है। ऐसे में गंगा की स्वच्छता की बात करना बेमानी है।
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