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Challenges Of Delhi CM Rekha Gupta: रेखा के लिए आसान नहीं होगा आगे का सफर, सामने आएंगी ये चुनौतियां

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Challenges Of Delhi CM Rekha Gupta:

नई दिल्ली। Challenges Of Delhi CM Rekha Gupta: भाजपा ने जिस तरह में मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और झारखंड में मुख्यमंत्री के नये चेहरे को सामने लाकर सबको हैरान किया था, वैसे ही उसने दिल्ली में भी रेखा गुप्ता का नाम लेकर सबको चौंका दिया। दिल्ली की मुख्यमंत्री के तौर पर शायद की किसी के जेहन में रेखा गुप्ता का नाम आया हो। फ़िलहाल, रेखा ने शपथ ग्रहण कर दिल्ली की कमान संभाल ली है, लेकिन उनके लिए ये सफर आसान नहीं होने वाला। उनके सामने विपक्ष की चुनौतियां तो होंगी ही, साथ ही उन वादों को पूरा करना भी चुनौतीपूर्ण होगा, जो उनकी पार्टी ने चुनाव के दौरान किये थे।

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आसान नहीं होगा वादों को हकीकत में बदलना

बता दें कि, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, अमित शाह, जेपी नड्डा और पार्टी के तमाम बड़े नेताओं ने अपने चुनावी कैंपेन के दौरान कई बड़े वादों को दिल्ली की जनता के सामने बार-बार दोहराया है। जैसे कि यमुना की सफाई, स्वच्छ पेयजल, नालों-गलियों और सीवर की सफाई, सड़कों की मरम्मत, साफ प्रदूषण मुक्त हवा, दिल्ली में हर साल 50 हजार नई नौकरियों का सृजन, महिलाओं को प्रति माह 2500 रुपये आर्थिक मदद, वृद्धों को पेंशन, मुफ्त बस यात्रा, ट्रैफिक जाम से निजात समेत आप सरकार की मुफ्त बिजली और पानी जैसी लोकलुभावन योजनाओं को जारी रखना आदि। ये सब मंच से बोलना जितना आसान है, उतना ही मुश्किल इन्हें धरातल पर लाना है। ऐसे में अब रेखा के सामने मंच से किये गये इन वादों को हकीकत में बदलना एक बड़ी चुनौती साबित होने वाला है। इसके साथ ही आने वाले समय में उनकी तुलना शीला दीक्षित से भी की जाएगी, जो 15 साल तक दिल्ली की मुख्यमंत्री रही थीं और अपने शासन काल में उन्होंने दिल्ली की सूरत बदल दी थी।

भितरघात का भी करना पड़ सकता है सामना

कहा जाता है कि, आज दिल्ली जो कुछ भी है उसमें सबसे बड़ा योगदान शीला दीक्षित का है। इसके अलावा रेखा को केंद्र सरकार और राज्यपाल के बीच बेहतर तालमेल बैठाते हुए जनता और विपक्ष को ये भी संदेश देना होगा कि वह अपने फैसले लेने में सक्षम हैं। वे पूर्व सीएम की तरह कठपुतली मुख्यमंत्री नहीं है। रेखा को विपक्ष यानी आम आदमी पार्टी के आक्रामक विरोध का भी सामना करना होगा। बता दें कि 43% मत के साथ दूसरे स्थान पर रहने वाली ‘आप’ विधानसभा के अंदर और बाहर दोनों जगह उनके काम में अवरोध डालेगी जिनसे भी रेखा को पार पाना होगा। बाहरी चुनौतियों के साथ रेखा को अपनी ही पार्टी के ऐसे नेताओं से भी संभल कर रहना होगा, जिनकी नजर इस चुनाव में मुख्यमंत्री की कुर्सी पर रही होगी। बता दें कि, दिल्ली सिर्फ विधानसभा नहीं है, बल्कि ये देश की राजधानी भी है। साथ ही केंद्र शासित प्रदेश होने की वजह से ये केंद्र के नियन्त्रण में भी है। ऐसे में रेखा को अपना हर कदम फूंक-फूंक कर रखना होगा, क्योंकि उन पर सिर्फ देश ही नहीं बल्कि दुनिया भर की मीडिया की नजर होगी। उन्हें दिल्ली में रह रहे सभी वर्गों और समूहों को साथ लेकर चलना होगा और विकास कार्य करना होगा।

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यमुना की सफाई पर होगी जनता की नजर

गौरतलब है कि, अधिकतर चुनावी सभाओं में पीएम मोदी ने कहा था कि केजरीवाल की सरकार में दिल्ली का विकास नहीं हो रहा है, जिसे आगे बढ़ाने के लिए बीजेपी का सत्ता में आना जरूरी है। अब बीजेपी सत्ता में आ गई है और रेखा गुप्ता मुख्यमंत्री बन गई हैं, तो उन्हें अब दिल्ली के विकास को रफ्तार देना होगा। साथ ही पीएम मोदी द्वारा यमुना को लेकर किये गये बड़े-बड़े वादों को भी पूरा करना होगा। अब चूंकि दिल्ली में भाजपा की सरकार बन गई है, तो दिल्ली की जनता यमुना को लेकर किए गये मोदी के वादे को तय समय सीमा के अंदर पूरे होते देखना चाहेगी। वह यमुना को गुजरात की साबरमती नदी की तर्ज पर सौन्दर्यकरण के साथ विकसित होते हुए देखने का ख्बाव पाने हुए है। इसके अलावा, दिल्ली के विभिन्न हिस्सों में प्रस्तावित सड़क कॉरिडोर, बद से बदतर हुई सड़कों का जीर्णोद्धार होते देखने के लिए भी दिल्ली की जनता उतावली हो रही है। मौजूदा समय में दिल्ली में भीड़ के मुकाबले सार्वजनिक परिवहन की किल्लत भी बड़ी समस्या है, जिसे हल करना भी रेखा के लिए एक बड़ी चुनौती होगा।

कैसे हटाएंगी दिल्ली से कूड़ों का पहाड़

दिल्ली में कई स्थानों पर लगे कूड़े के पहाड़ और वायु प्रदूषण की समस्या से भी निपटना रेखा के लिए आसन नहीं होगा। बता दें कि,अभी तक विपक्ष में बैठी बीजेपी,आप सरकार पर इन दोनों समस्याओं को लेकर लगातार हमलवार होती रही है। ऐसे में अब जब वह खुद सत्ता में आ गई है, तो अब वह इससे कैसे निपटती है ये देखने वाला होगा। वहीं, आप सरकार में हुए कथित भ्रष्टाचार की जांच कराना भी उनकी जिम्मेदारी में होगा। इसके अलावा उन्हें महिलाओं एवं युवाओं के मुद्दों को लेकर भी संवेदनशीलता दिखानी होगी। चुनौतियां और मुद्दे तो और भी हैं, लेकिन अभी सिर्फ इतना कहा जा सकता है कि रेखा के लिए दिल्ली की कुर्सी बिलकुल भी आसान नहीं होने वाली है। वे हाईकमान और दिल्ली की जनता की उम्मीदों पर कितना खारी उतरती हैं ये तो आने वाला समय ही बताएगा।

 

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