
नई दिल्ली। Trump’s Statement On USAID Funding: भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को अपना दोस्त बताने वाले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप इस बार लगातार भारत पर निशान साध रहे हैं और बड़े विवाद को हवा दे रहे हैं। पहले उन्होंने भारत पर सबसे ज्यादा टैरिफ लगाने की बात कही और अब वे ‘मतदाता भागीदारी’ में भारत को 21 मिलियन यानी 180 करोड़ डॉलर देने का आरोप लगा रहे हैं। ट्रंप का कहना है कि ये फंड हो सकता है 2024 के लोकसभा चुनाव के इस्तेमाल किया गया हो।
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चुनाव प्रक्रिया में बाहरी प्रभाव के दखल का आरोप

बता दें कि, भारत में इस मुद्दे पर भाजपा और कांग्रेस के बीच पहले से विवाद चल रहा है। दोनों ही पार्टियां एक-दूसरे पर चुनाव प्रक्रिया में “बाहरी प्रभाव” के दखल का आरोप लगा रही हैं। बीजेपी ने जहां इस मुद्दे पर राहुल गांधी को निशाना बनाया है। वहीं, कांग्रेस भी बीजेपी पर यूपीए सरकारों को अस्थिर करने का आरोप लगा रही है। बीजेपी के गौरव भाटिया ने 2023 में लंदन के एक कार्यक्रम में की गई राहुल गांधी की टिप्पणियों का हवाला देते हुए उन पर भारत को कमजोर करने के लिए विदेशी ताकतों से सांठगांठ करने का आरोप लगाया है। गौरव भाटिया का दावा है कि, यूएसएड फंड का एक बड़ा हिस्सा कांग्रेस के नेतृत्व वाले यूपीए के शासन काल में भारत आया था। हालांकि बीजेपी के पास ऐसा कोई सबूत नहीं है, जो ये बता सके कि कांग्रेस को किस साल कितना फंड मिला।
बीजेपी ने राहुल पर साधा निशाना
भाजपा प्रवक्ता ने पत्रकारों से हुई एक बातचीत में साफ़ कहा कि “जब सरकार (भारत में) के लिए फंडिंग बंद हो गई, तब राहुल गांधी की भारत जोड़ो यात्रा के दौरान एनजीओ के लिए की गई फंडिंग में इजाफा हुआ ताकि राहुल गांधी को चुनाव से पहले मजबूत किया जा सके और नरेंद्र मोदी व भाजपा को आम चुनाव में हराया जा सके। बीजेपी के इस आरोप के बाद कांग्रेस के पवन खेड़ा ने भी इस मुद्दे को लेकर प्रेस कांफ्रेस की। पवन ने पत्रकारों को संबोधित करते हुए कहा, बीजेपी सबसे लंबे समय तक विपक्ष में रही है। ऐसे में उसने यूपीए सरकारों को अस्थिर करने के लिए “बाहरी ताकतों से सीधी मदद” ली। इसके साथ ही कांग्रेस ने ट्रम्प की टिप्पणियों को “बकवास’ बताया। प्रेस कांफ्रेस में कांग्रेस ने ये भी मांग की है कि मोदी सरकार भारत में सरकारी संस्थानों और एनजीओ को यूएसएड के समर्थन का विवरण देने वाला एक श्वेत पत्र (व्हाइट पेपर) जारी करे।
मतदाता भागीदारी के लिए जारी हुए 21 मिलियन डॉलर

बता दें कि अमेरिका की सत्ता संभालने के बाद से ट्रंप ने लगातार तीसरी बार भारत को “मतदाता भागीदारी” के लिए 21 मिलियन डॉलर (180 करोड़) देने का आरोप लगाया है। इतना ही नहीं इस बार उन्होंने इस मामले में सीधे तौर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का नाम लिया है। हाल ही में की गई अपनी नई टिप्पणी में, ट्रम्प ने भारत और बांग्लादेश के लिए प्रस्तावित और अब रोक दी गई अलग-अलग यूएसएड फंडिंग का उल्लेख किया है। ट्रम्प का ताजा बयान एक तरह से उस रिपोर्ट खंडन है, जिसमें दावा किया गया था कि यूएसएड का ये फंड सिर्फ बांग्लादेश के लिए हुआ था, भारत के लिए नहीं।
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2024 के लोकसभा चुनाव में इस्तेमाल होने का आरोप
ट्रम्प ने अपनी लेटेस्ट टिप्पणी में कहा है कि- “21 मिलियन डॉलर यानी 180 करोड़ मेरे दोस्त प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भारत को ‘मतदाता भागीदारी’ के लिए जा रहे हैं। हमारे लिए क्या? हम भी ‘मतदाता भागीदारी’ चाहते हैं।” ट्रम्प के इस बयान का सीधा मतलब है कि 21 मिलियन डॉलर भारत में मोदी सरकार को जा रहे हैं, लेकिन इससे अमेरिका को क्या फायदा हो रहा है। अमेरिका भी चाहता है कि उसे भी ऐसे ही मतदाता भागीदारी के लिए फंड मिले। इससे पहले यूएसएड की फंडिंग को लेकर ट्रंप ने जो बयान दिया था, उसमें उन्होंने इन फंड्स का इस्तेमाल 2024 के लोकसभा चुनावों में होने की तरफ इशारा किया था। हालांकि ट्रंप ये नहीं बता सके कि ये फंड किस राजनीतिक दल, संगठन या सरकार को दिया गया था।
एलन मस्क ने लगाई फंडिंग पर रोक

गौरतलब है कि सत्ता संभालते ही डोनाल्ड ट्रंप ने एक नया विभाग (Department of Government Efficiency DOGE) बनाया है, जो सरकारी खर्चे में कटौती करने का काम कर रहा है। इस विभाग की जिम्मेदारी ट्रंप ने टेस्ला के मालिक एलन मस्क को दी है। मस्क ने ही भारत को मिलने वाले 21 मिलियन डॉलर पर रोक तो लगा दी है। इस रोक के साथ ही भारत में ये बवाल खड़ा हो गया कि अतीत में मिलने वाली ये रकम किसके खाते में गई। इसे लेकर अब बीजेपी और कांग्रेस के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर शुरू हो गया है।
भारत ने तोड़ी चुप्पी
ट्रंप प्रशासन के इस आरोप पर अब भारत ने चुप्पी तोड़ी है और उनके बयान को ‘बहुत परेशान करने वाला” बताया है। विदेश मंत्रालय ने भारत के आंतरिक मामलों में विदेशी हस्तक्षेप को लेकर चिंता जाहिर की है। गत दिवस यानी शुक्रवर को विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने प्रेस कांफ्रेस आयोजित कर कहा, “भारत में कई विभाग और एजेंसियां हैं जो USAID के साथ काम करती हैं, ये सभी मंत्रालय और एजेंसियां अब इस पर विचार कर रही हैं।”
बाइडेन सरकार को घेर रहे ट्रंप

दरअसल, DOGE की तरफ से इस फंडिंग पर रोक लगने के बाद ट्रंप बार-बार इस मुद्दे को हवा देकर अमेरिका की पूर्ववर्ती बाइडेन सरकार पर निशाना साध रहे हैं। उन्होंने बाइडन प्रशासन पर सवाल उठाते हुए कहा है कि उक्त फंड का इस्तेमाल भारत में हुए 2024 के लोकसभा चुनावों में हस्तक्षेप करने के लिए किया गया होगा। हालांकि, ट्रम्प अपने इस आरोपों का कोई सबूत अभी तक नहीं दे सके हैं। ट्रंप का कहना है कि, भारत में वोटर टर्नआउट के लिए 21 मिलियन अमरीकी डॉलर, हमें भारत के चुनाव के लिए 21 मिलियन अमरीकी डॉलर खर्च करने की क्या आवश्यकता है?
USAID फंडिंग को बताया किक बैक स्कीम
उन्होंने आगे कहा, मुझे लगता है कि वे (बाइडेन प्रशासन) किसी और को चुनाव जिताने की कोशिश कर रहे थे… हमें भारत सरकार को बताना होगा… यह पूरी तरह से एक बड़ी सफलता है…’ अपने अगले बयान में यानी शुक्रवार को रिपबल्किन गवर्नर के सम्मेलन में अमेरिकी राष्ट्रपति ने इन आरोपों को फिर से दोहराया और USAID की फंडिंग को ‘किकबैक स्कीम’ करार दिया। ट्रंप ने कहा, भारत में वोटर टर्नआउट के लिए 21 मिलियन डॉलर, हम भारत में वोटर टर्नआउट को लेकर चिंतित हैं? हमारे पास पहले से ही बहुत सारी समस्याएं हैं, पता है यह एक किकबैक स्कीम है।’
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