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Zelensky Bows Before Trump: ट्रंप के आगे जेलेंस्की ने टेके घुटने, अमेरिका को सौपेंगे यूक्रेन का खजाना

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Zelensky Bows Before Trump

Zelensky Bows Before Trump: बीते दो साल से अधिक समय से चल रहे रूस-युक्रेन युद्ध से भले ही दोनों देशों को अभी तक कोई लाभ नहीं हुआ है, लेकिन अमेरिका अब इसका लाभ उठाने की पूरी प्लानिंग कर चुका है। इसके लिए जहां उसे यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की पर दवाब बनाना पड़ा है। वहीं, रूस ने उसे खुद से ऑफर किया है। दरअसल, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की नजर लंबे समय से यूक्रेन के प्राकृतिक खजाने पर है, जिसे वह हर हाल में हासिल करना चाहते थे। ऐसे में अब उन्हें मौका मिला गया है। जेलेंस्की ने अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप के दवाब के आगे घुटने टेक दिए हैं और इस डील पर हस्ताक्षर करने की सहमति दे दी है। यूक्रेन को उम्मीद है कि इस डील के हो जाने से ट्रंप की नाराजगी दूर  होगी और अमेरिका के साथ संबंध सुधरेंगे, जिससे उसे युद्ध में मदद में मिलेगी, जिसने बीच युद्ध में उसका साथ छोड़ दिया था।

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मदद के बदले दुर्लभ खजाना दे यूक्रेन

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बता दें कि, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इसी महीने की शुरुआत में व्हाइट हाउस में पत्रकारों से बात करते हुए कहा था कि, यूक्रेन को अगर अमेरिकी मदद चाहिए तो उसे रेयर अर्थ मेटल्स देने होंगे, ट्रंप ने कहा था कि अमेरिका लगभग 300 अरब डॉलर की मदद के बदले में यूक्रेन से बराबरी की मदद चाहता है। उन्होंने कहा था, हम यूक्रेन को बता रहे हैं कि उनके पास बहुत कीमती दुर्लभ खनिज हैं… हम यूक्रेन के साथ एक ऐसा समझौता करना चाहते हैं, जिसमें अमेरिकी मदद के बदले यूक्रेन अपने दुर्लभ खनिज और बाकी चीजें दे।’

डील में शामिल नहीं है सुरक्षा की स्पष्ट गारंटी 

गौरतलब है कि, ट्रंप ने सत्ता में आते ही कहा था कि वह रूस-यूक्रेन के बीच के युद्ध समाप्त करा देंगे। इसके लिए उन्होंने यूक्रेन के साथ एक तरफा बातचीत भी शुरू कर दी थी। साथ ही देश का खजाना अमेरिका को सौंपने की बात की थी, जिसे जेलेंस्की ने मानने से इनकार कर दिया था। इससे ट्रंप नाराज हो गये थे और सार्वजनिक रूप से उन्हें तानाशाह कह दिया था। ब्रिटिश न्यूज आउटलेट द सन की एक रिपोर्ट में बताया गया है कि, तेल व गैस सहित यूक्रेन के विशाल खनिज संसाधनों को लेकर समझौते पर सहमति, वॉशिंगटन की राजस्व के 500 अरब डॉलर के हिस्से की अपनी मांग को छोड़ने के बाद बनी है। वहीं एक अन्य रिपोर्ट में कहा गया है कि, इस डील में अमेरिकी सुरक्षा की स्पष्ट गारंटी शामिल नहीं है, लेकिन यूक्रेनी अधिकारियों को उम्मीद है कि इस डील का आर्थिक और रणनीतिक सहयोग पर गहरा असर पड़ेगा। हालांकि कुछ रिपोर्ट्स में ये भी कहा जा रहा है कि ये डील यूक्रेन को अमेरिका का आर्थिक गुलाम बना देगी।

यूक्रेन ने जाहिर की थी तीखी प्रतिक्रिया

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इस डील को लेकर यूक्रेन के उप प्रधानमंत्री और न्याय मंत्री ओल्हा स्टेफनिशिना ने एक मीडिया संस्थान से बात करते हुए कहा, ‘खनिज समझौता तस्वीर का महज एक हिस्सा है। हमने अमेरिकी प्रशासन से कई बार सुना है कि यह एक बड़ी तस्वीर का हिस्सा है।’ ट्रंप के व्हाइट हाउस में वापस आने के बाद समझौते की मूल शर्तों को तैयार किया गया था, जिस पर यूक्रेन ने तीखी प्रतिक्रिया जाहिर की थी। राष्ट्रपति जेलेंस्की ने भी अपने अधिकारियों को इस समझौते पर हस्ताक्षर नहीं करने को कहा था। इसके बाद ही ट्रंप, यूक्रेन पर भड़क गये थे। उन्होंने जेलेंस्की को तानाशाह बताते हुए कहा था कि, वे बिना चुनाव के सत्ता में बने हुए हैं और यूक्रेन ने ही रूस पर आक्रमण किया था।

की गई कोष की स्थापना 

इधर, ब्रिटिश समाचार पत्र फाइनेंशियल टाइम्स ने 24 फरवरी को जारी समझौते के ड्राफ्ट को देखने का दावा किया है। उसका कहना है कि, इसमें एक कोष की स्थापना की गई है, जो यूक्रेन के स्वामित्व में होने वाले खनिज संसाधनों के मुद्रीकरण से होने वाली आय का 50 प्रतिशत योगदान देगा। हालांकि, इस कोष में नैफ्टोगाज और यूक्रानाफ्टा जैसे प्रमुख उत्पादकों से मौजूदा राजस्व को शामिल नहीं किया है। खास बात यह है कि यह कोष अमेरिकी हिस्सेदारी और संयुक्त स्वामित्व की शर्तों पर अनसुलझे विवरण छोड़ देता है, जिसे भविष्य की बातचीत में निर्धारित किया जाएगा।

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रूस ने भी दिया बड़ा ऑफर

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इधर, रूस के राष्ट्रपति ने अमेरिका को एक बड़ा ऑफर दिया है, जिसमें ट्रंप ने भी दिलचस्पी दिखाई है। बताया जा रहा है कि, रूसी राष्ट्रपति कार्यालय क्रेमलिन की तरफ से मंगलवार को कहा गया कि रूस के पास बहुत सारे रेयर अर्थ मेटल्स यानी दुर्लभ मृदा खनिजों का भंडार है। यदि अमेरिका चाहे तो रूस उसके साथ रेयर अर्थ मेटल्स को लेकर समझौता कर सकता है। क्रेमलिन के प्रवक्ता दिमित्री पेस्कोव की तरफ से जारी किये गये बयान में कहा गया है कि ‘रूस के पास अपने धातु भंडार को लेकर अलग प्लान हैं, लेकिन अगर राजनीतिक इच्छाशक्ति दिखाई जाएगी तो रूस, अमेरिका के साथ सहयोग कर सकता है।’ बता दें कि इससे एक दिन पहले यानी सोमवार को रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने रूस के सरकारी टीवी चैनल पर बात करते ही कहा था कि आने वाले समय में रूस-अमेरिका के साथ आर्थिक समझौते के तहत अमेरिकी भागीदारों के साथ अलग-अलग प्रोजेक्ट्स पर काम करने के लिए तैयार है। 

रूस के पास है रेयर अर्थ्स का अच्छा भंडार

वहीं, रूस के इस ऑफर पर अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने व्हाइट हाउस में पत्रकारों से बात करते हुए अपनी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा है, ‘अमेरिका  रूस से खनिज खरीदना चाहेगा… अगर हम ऐसा कर सकते हैं तो… उनके पास रेयर अर्थ्स का अच्छा भंडार है… उनके पास तेल और गैस का भी भंडार है… यह अच्छी बात है… यह रूस के लिए भी अच्छी बात है क्योंकि इस पर हम डील कर सकते हैं।’ ट्रंप ने आगे कहा, उनके पास मूल्यवान भूमि है जिसका उन्होंने अभी तक इस्तेमाल नहीं किया है… तो हम उसका इस्तेमाल कर सकते है…’

जटिल होता है उत्पादन

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अमेरिकी भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण के आंकड़ों पर गौर करें तो, चीन, ब्राजील, भारत और ऑस्ट्रेलिया के बाद रूस के पास दुनिया का पांचवां सबसे बड़ा दुर्लभ मृदा खनिज जिन्हें रेयर अर्थ मेटल्स कहा जाता है का भंडार है। 17 धातुओं का एक समूह है जिनका इस्तेमाल इलेक्ट्रॉनिक गाड़ियों, सेलफोन और अन्य इलेक्ट्रॉनिक्स सामान बनाने में किया जाता है। चूंकि ये धरती की अंदरूनी परत यानी क्रिस्ट में पाए जाते हैं, यही वजह है कि इन्हें दुर्लभ मृदा खनिज कहा जाता है। ये खनिज दुनिया में कुछ ही जगहों पर मिलते हैं और इनका उत्पादन भी काफी जटिल होता है।

दुर्लभ खनिज के लिए चीन पर निर्भर है अमेरिका

अमेरिकी भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण ने देश की अर्थव्यवस्था और राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए जिन 50 खनिजों को महत्वपूर्ण माना है, उनमें कई प्रकार के दुर्लभ मृदा, निकेल और लिथियम भी शामिल है और यूक्रेन में यूरेनियम, लिथियम और टाइटेनियम के विशाल भंडार हैं। वहीं अमेरिका के पास केवल एक ही दुर्लभ मृदा खदान है, जिसकी प्रसंस्करण क्षमता बेहद कम है। ऐसे में अमेरिका को अपनी दुर्लभ मृदा खनिज की जरूरतों को पूरा करने के लिए चीन पर निर्भर रहना पड़ता है। बता दें कि चीन दुनिया का सबसे बड़ा दुर्लभ मृदा और कई अन्य महत्वपूर्ण खनिजों का उत्पादक है।

 

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