
नई दिल्ली। Trump in Trouble: अमेरिका को और आगे ले जाने के लिए दुनिया के कई देशों के खिलाफ बड़े-बड़े फैसले लेने वाले राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप एक बार फिर से मुश्किल में फंसते नजर आ रहे हैं। दरअसल, उनका 22 साल पुराना एक बयान अब सुर्ख़ियों में है। हालांकि, ट्रम्प ने इस मामले की रिपोर्ट छापने वाले वॉल स्ट्रीट जर्नल के खिलाफ मानहानि का मामला दर्ज कराया है और 10 अरब डॉलर यानी भारतीय करेंसी के हिसाब 86. 188 करोड़ की मांग की है। आइए जानते हैं ये एक बार फिर से क्यों और केसे उछल रहा है।
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क्लाइंट फ़ाइल को सार्वजनिक करने का दबाव

रिपोर्ट के अनुसार वाल स्ट्रीट की एक रिपोर्ट के अनुसार, ये मामला एपस्टीन फ़ाइल का है,जो यौन अपराधी अरबपति जेफ्री एपस्टीम से जुड़ी है, जिसकी वजह से पूरे अमेरिका में बवाल मचा हुआ है और ट्रंप को भी मुश्किल में ला दिया है। रिपोर्ट में लिखा है कि, एपस्टीन ने कथित तौर पर एक क्लाइंट फ़ाइल बनाई थी, जिसमें अमेरिका के वर्तमान राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प, पूर्व राष्ट्रपति बिल क्लिंटन और पॉप सिंगर माइकल जैक्सन समेत तमाम नेताओं और बिजनेस समेत कई अन्य दिग्गज हस्तियों के नाम दर्ज हैं। ट्रम्प पर अब दबाव है कि, एपस्टीन की इन क्लाइंट फाइलों को अब सार्वजनिक किया जाए।
जांच एजेंसियों का दावा
अमेरिकी राष्ट्रपति पर आरोप है कि, इन फाइलों को दबाने के लिए वे अमेरिका की संघीय जांच एजेंसी (FBI) और जस्टिस डिपार्टमेंट जैसी एजेंसियों का इस्तेमाल कर रहे हैं। रिपोर्ट में कहा गया है कि, इन जांच एजेंसियों ने बीती सात जुलाई को दावा किया था कि, यौन अपराधी जेफ्री एपस्टीन की हत्या नहीं हुई थी और न ही उसने किसी को ब्लैकमेल किया था। उसने कोई क्लाइंट फ़ाइल नहीं बनाई थी।
मामूली टीचर से बना बड़ा बिजनेसमैन
बता दें कि, एक समय था जब एपस्टीन एक मामूली टीचर था। इसी बीच उसकी मुलाकात वॉल स्ट्रीट इन्वेस्टर से हुई, जो धीरे-धीरे दोस्ती में बदल गई। इसके बाद उसके दिन बदलने लगे और 1982 में उसने ‘एपस्टीन एंड कंपनी’ के नाम से खुद की फर्म खोल ली। इस फर्म का काम अरबपतियों को फाइनेंशियल एडवाइज देना था। एपस्टीन की ये फर्म तेजी से ग्रोथ करने लगी और जल्द ही उसकी गिनती अमेरिका के बड़े बिजनेसमैन में होने लगी। एपस्टीन की अमीरी का आलम ये था कि, उसने न्यू मेक्सिको में फार्महाउस, न्यूयॉर्क में सबसे बड़ा प्राइवेट घर और फ्लोरिडा में एक हवेली खरीद ली। वह शानदार पार्टियों के लिए भी जाना जाता था। उसकी पार्टी में अमेरिका के दिग्गज शामिल होते थे।
ट्रंप का इंटरव्यू

साल 2002 में ट्रंप ने खुद भी एक इंटरव्यू में कहा था कि, मैं एपस्टीन को 15 साल से जानता हूं, वह कमाल के इन्सान थे। इंटरव्यू में ट्रंप ने ये भी कहा था कि, हम दोनों को ही कम उम्र की लड़कियां पसंद थी। उनका यही बयान अब उनके गले की हड्डी बन गया है। हालांकि, ट्रंप इसे गलत साबित करने को कोशिश कर रहे हैं, लेकिन उनका हर दावा झूठा साबित हो रहा है। ट्रंप के इस बयान का जिन्न अब एक बार फिर से बाहर आ गया है, जिससे अमेरिका में बवाल मच गया है।
बड़ी-बड़ी हस्तियों से संबंध बनाने का दबाव
एक रिपोर्ट में बताया गया है कि, एपस्टीन के पास ‘लोलिता एक्सप्रेस’ नाम का एक विमान था, जिसमें कम उम्र की लड़कियों को भरकर उसके प्राइवेट आइसलैंड ‘लिटिल सेंट जेम्स’ पर लाया जाता था। यहां पर उन्हें बड़ी-बड़ी हस्तियों के साथ संबंध बनाने के लिए मजबूर किया जाता था। लिटिल सेंट जेम्स यूएस वर्जिन द्वीप समूह है, जिसे पीडोफ़ाइल आइसलैंड के नाम से जाना जाता है।
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ट्रंप-एपस्टीन के रिश्ते में दरार
हालांकि, 2004 में ट्रंप और एपस्टीन के बीच फ्लोरिडा के पाम बीच पर बनी 6 एकड़ की ‘हाउस ऑफ फ्रेंडशिप’ प्रॉपर्टी को लेकर विवाद हो गया और इनकी दोस्ती में दरार आ गई। दरअसल, ट्रंप इस प्रापर्टी को खरीदना चाहते, लेकिन एपस्टीन यहां पर अपना बिजनेस शुरू करना चाहते थे। हालांकि, ट्रम्प ने 15 नवंबर, 2004 को 356 करोड़ की बोली के साथ यह प्रॉपर्टी खरीद ली, जिससे एपस्टीन और उनके रिश्ते में दरार पड़ गई।
50 लड़कियों ने लगाए आरोप

The Wall Street Journal की एक रिपोर्ट के अनुसार, एपस्टीन को 14 साल की एक लड़की को पैसे देकर सबंध बनाने के आरोप में 2005 में फ्लोरिडा में बने पाम बीच से गिरफ्तार कर लिया गया था। पुलिस को दी गई शिकायत में लड़की की मां ने कहा था कि, उसकी बेटी को एपस्टीन के आलीशान घर में ‘मसाज’ के बहाने बुलाया गया था, लेकिन वहां पहुंचने के बाद उस पर संबंध बनाने का दबाव बनाया गया। इस शिकायत के बाद 50 और लड़कियों ने एपस्टीन पर ऐसे ही आरोप लगाए थे, जिससे उसकी मुश्किलें बढ़ गई और 2008 में उसने फ्लोरिडा में चाइल्ड प्रॉस्टिट्यूशन के आरोपों को स्वीकार कर लिया और उसे 13 महीने की सजा दी गई। इसके बाद से उसका साम्राज्य ढहना शुरू हो गया।
ट्रंप भी कर चुके हैं ट्रैवल
उस वक्त कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया गया था कि, अमेरिका में वर्तमान राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी तब सात बार (1993 से 1997 के बीच) एपस्टीन के प्राइवेट जेट से ट्रैवल किया था। हालांकि, ट्रंप ने कभी भी इसे स्वीकार नहीं किया। एपस्टीन पर आरोप लगाने वालों में डोनाल्ड ट्रंप के क्लब ‘मार ए लागो’ में काम करने वाली 16 साल की एक युवती भी थी, जिसका नाम वर्जीनिया गिफ्रे था। वर्जिनिया ने बताया था कि, जब वह डोनाल्ड ट्रंप के क्लब ‘मार-ए-लागो’ में काम कर रही थी, तब उसकी उम्र मात्र 16 साल थी और उस पर भी बड़ी हस्तियों से संबंध बनाने का दबाव बनाया गया था।
प्रिंस एंड्रयू पर लगा था जबरदस्ती करने का आरोप

वर्जिनिया ने ब्रिटेन के रॉयल फैमिली के प्रिंस एंड्रयू पर आरोप लगाया था कि, उन्होंने उसके साथ जबरदस्ती की। उस वक्त ये मामला ब्रिटिश मीडिया में खूब उछला था। इसी दौरान साल 2005 में गिफ्रे की संदिग्ध रूप से मौत हो गई। इसके बाद एपस्टीन को 6 जुलाई, 2019 को एक बार फिर से सेक्स ट्रैफिकिंग के गंभीर आरोपों में न्यूयार्क से गिरफ्तार किया गया। इसके बाद 23 जुलाई को वह अपनी सेल में बेहोश मिला। उसके गले पर कुछ निशान थे और 10 अगस्त, 2019 को जेल में ही उसकी मौत हो गई।
सेल में मृत मिला था एपस्टीन
सरकारी रिपोर्ट में दावा किया गया कि, उसने फांसी लगाकर आत्महत्या की थी, लेकिन पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में कहा गया था कि, एपस्टीन की गर्दन की कुछ हड्डियां टूटी थीं। वहीं, जेल में लगे कैमरों की भी कई फुटेज गायब मिली, जिससे आशंका जताई गई कि उसकी हत्या की गई थी। हालांकि, इसका को सबूत आज तक नहीं मिला, जिससे ये गुत्थी आज तक नहीं सुलझ सकी कि, एपस्टीन में आत्महत्या की थी या उसकी हत्या हुई थी।
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