
जबलपुर। MP News: मध्य प्रदेश की जबलपुर हाईकोर्ट ने एक 16 साल की गर्भवती बच्ची को बच्चे को जन्म देने की इजाजत दे दी है। कोर्ट ने कहा, नाबालिग जब तक व्यस्क नहीं हो जाती है, तब तक डिलीवरी और बच्चे के पालन-पोषण का सारा खर्च राज्य सरकार उठाएगी। इसके साथ ही पीड़िता को मंडला की बाल कल्याण समिति (सीडब्ल्यूसी) में भेज दिया गया है, जहां डिलीवरी के बाद भी रहेगी। ये फैसला जबलपुर हाई कोर्ट के जस्टिस विशाल मिश्रा ने सुनाया।
28 से 30 सप्ताह की गर्भवती है नाबालिग

दरअसल, मामला मंडला जिले का है। यहां के नैनपुर कोर्ट ने जबलपुर हाईकोर्ट को एक पत्र भेजा था, जो दुष्कर्म की शिकार नाबालिग पीड़िता के गर्भवती होने से जुड़ा था। इस पत्र को संज्ञान में लेने के बाद हाईकोर्ट ने मेडिकल बोर्ड से राय मांगी और सभी जरूरी रिपोर्ट तलब की। रिपोर्ट में बताया गया कि, पीड़िता की उम्र साढ़े 16 साल है और उसकी प्रेग्नेंसी 28 से 30 सप्ताह की है। ऐसे में नाबालिग का गर्भपात करना उसके लिए जानलेवा हो सकता है।
माता-पिता ने झाड़ा पल्ला
इधर, माता-पिता ने नाबालिग को अपने साथ रखने और बच्चे के पालन पोषण से इंकार कर दिया है। उनका कहना है कि वे पीड़िता और बच्चे को कोई जिम्मेदारी नहीं उठाएंगे। ऐसे में कोर्ट ने आदेश दिया है कि पीड़िता को मंडला की बाल कल्याण समिति में रखा जाये और वहीं उसकी देखभाल हो। कोर्ट ने कहा, इस संबंध में एसपी को भी सूचित किया जाये।
राज्य सरकार उठाएगी खर्च
साथ ही सीडब्ल्यूसी को भी निर्देश दिया है कि, बच्चे के जन्म के संबंध के पूरी सावधानी बरती जाये क्योंकि नाबालिग 28 सप्ताह से अधिक की गर्भवती है। मामले की सुनवाई के दौरान जस्टिस विशाल मिश्र ने कहा संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत प्रजनन स्वतंत्रता एक मौलिक अधिकार है। ऐसे में पीड़िता को अपनी इच्छानुसार बच्चे को जन्म दे सकती है।
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