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Shri Ram Katha: राम नाम केवल शब्द नहीं,यह आत्मा की शक्ति है- मुक्तामणि शास्त्री

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Shri Ram Katha

प्रतापगढ़। Shri Ram Katha: शहर के अचलपुर के लेखपाल कलोनी स्थित कैरियर एकेडमी में चल रही श्रीराम कथा के आठवें दिवस गुरुवार को अयोध्या धाम से पधारें कथा व्यास मुक्तामणि शास्त्री महराज ने भरत के आदर्श और भगवान के प्रति समर्पण के महत्व को समझाते हुए राम वन गमन व माता शबरी के प्रसंग की व्याख्या की,जिसे सुनकर भक्त भावविभोर हो गए।

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इस दौरान महराज जी ने कहा कि भगवान श्रीराम का नाम ही जीवन के सारे दुःखों का नाश करने वाला है। “राम नाम केवल शब्द नहीं,यह आत्मा की शक्ति है। उन्होंने कहा कि श्रीराम का जीवन हमें सिखाता है कि सत्य,मर्यादा और कर्तव्य सबसे ऊपर हैं। इस मौके पर कथा व्यास ने चित्रकूट में राम और भरत के मिलाप और संवाद का वर्णन करते हुए कहा कि भरत को देखकर श्री राम के धनुष-बाण गिर पड़े।

भरत जी ने श्री राम से अयोध्या लौटने की प्रार्थना की,जिस पर राम जी ने कहा कि यदि वे लौट जाएंगे तो शबरी माता को दर्शन कैसे दे पाएंगे। इसके बाद भगवान ने अपनी चरण पादुका देकर भरत जी को अयोध्या वापस भेजा।कथावाचक ने भरत के समान भाई के त्याग और प्रेम को अद्वितीय बताते हुए कहा कि भरत चरित्र को नियम से सुनने से श्री राम के चरणों में प्रेम उत्पन्न होता है।

महराज जी ने कहा कि परिस्थितियां कभी भी कैसी भी किसी के जीवन में आ सकती है। हमें हमेशा उनका सामना करना चाहिए। अंत में आरती के साथ प्रसाद वितरण किया गया। इस मौके पर प्रमुख रूप से शंशाक पाण्डेय, ओमप्रकाश,उदयशंकर,शिवाकांत, विनोद तिवारी, अतुल, राजकुमार, आयुष, यशी, हिमांशु पाण्डेय, विपुल, अमित आदि श्रोतागण मौजूद रहे।

 

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