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E-Pharmacy Platforms पर सरकार की टेढ़ी नजर, लाएगी नया कानून

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E-Pharmacy Platforms

नई दिल्ली। E-Pharmacy Platforms: जब से डिजिटल का जमाना आया है, तब से हर चीज ऑनलाइन मिल रही है। यहां तक की दवाइयां भी 10 से 60 मिनट के अंदर पहुंचाई जा रही हैं, लेकिन सरकार ने अब ऑनलाइन दवा पहुंचाने की सुविधा देने वाली ई-फार्मेसी प्लेटफॉर्म्स पर नजरें टेढ़ी कर ली है। सरकार अब इन्हें जांच के दायरे में लाने और इन पर अंकुश लगाने के लिए नया कानून बनाने की योजना बना रही है।

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लगातार मिल रही हैं शिकायतें

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बताया जा रहा है कि, सरकार को लगातार शिकायतें मिल रही हैं कि, ई-फार्मेसी प्लेटफॉर्म्स न सिर्फ डॉक्टर की पर्ची पर लिखी उन दवाओं को नजरअंदाज कर रहे हैं, जो मरीज के लिए वह जरूरी हैं, बल्कि सुरक्षा से जुड़े अन्य नियमों को भी नजरंदाज कर रहे हैं। स्वास्थ्य मंत्रालय के एक अधिकारी का कहना है कि, ई-फार्मेसी प्लेटफॉर्म्स के खिलाफ शिकायतें अब उस स्तर पर पहुंच गई हैं कि, अब अगर ठोस कदम न उठाए गए, तो वह दिन दूर नहीं जब मरीजों की सुरक्षा से खिलवाड़ होने लगेगा।

साफ़-सफाई की कमी की शिकायत

एक मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, अब बहुत से लोग ऑनलाइन दवा आर्डर करने लगे हैं। ग्राहकों की बढ़ती संख्या को देखते हुए हर दिन एक नई कंपनी भी खुल रही है। इसी साल यानी 2025 में PhonePe के Pincode ने बेंगलुरु, पुणे, मुंबई जैसे शहरों में 10 मिनट में दवा पहुंचाने संबंधी सेवा शुरू की है। वहीं, Davaindia भी पुणे में 60 मिनट के अंदर दवा पहुंचा रही है। इसी तरह से Zeelab Pharmacy दिल्ली-एनसीआर में 60 मिनट में दवा डिलीवर कर रही है। Tata 1mg, PharmEasy और Netmeds जैसी बड़ी कंपनियां, तो पहले से ही लोगों को घर बैठे दवा उपलब्ध करा रही है। बताया जा रहा है कि, सरकार को शिकायतें मिल रही हैं कि, इनके डार्क स्टोर्स में साफ़-सफाई की व्यवस्था नहीं है।

ठोस कार्रवाई करने में असमर्थ है सरकार

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सूत्रों की मानें, तो भारत में मौजूदा समय में ई-फार्मेसी के लिए कोई स्पष्ट कानून नहीं है। पुराने कानून Drugs and Cosmetics Act में दवाओं की ऑनलाइन बिक्री को लेकर स्पष्ट दिशा-निर्देश नहीं है। ऐसे में सरकार ऐसी कंपनियों पर कोई ठोस कार्रवाई करने में खुद को असमर्थ पा रही है। लिहाजा, सरकार अब ऑनलाइन दवा बिक्री से जुड़ा नया कानून लाने की तैयारी में है, जिसमें आधुनिक ई-फार्मेसी को भी कवर किया जायेगा।

तेजी से बढ़ेगा बाजार

एक रिपोर्ट में बताया गया है कि, भारत के रिटेल फॉर्मेसी मार्केट में ई-फार्मेसी की हिस्सेदारी 3-5 फीसदी है, जबकि विकसित देशों में 22-25 प्रतिशत तक है। भारत का कुल रिटेल फार्मेसी मार्केट 2.4 लाख करोड़ का है। इसमें 85 प्रतिशत हिस्सा अनऑर्गेनाइज्ड सेक्टर के पास है। रिपोर्ट में कहा गया है कि, ई-फार्मेसी को अगर सही तरीके से रेगुलेट किया जाए तो यह काफी तेजी से बढ़ेगा।

 

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