
Shreyas Iyer Injury: आस्ट्रेलिया में वन डे मैच खेल रही टीम इंडिया को सोमवार 27 अक्टूबर को बड़ा झटका लगा। यहां सिडनी में खेले जा रहे मुकाबले के दौरान भारतीय क्रिकेट टीम के उप कप्तान श्रेयस अय्यर चोटिल हो गये, जिससे उन्हें आईसीयू में भर्ती कराया गया। हालांकि, अब उनकी हालत ठीक है और उन्हें आईसीयू से बाहर कर दिया गया है।
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डाइविंग कैच लेते समय हुए चोटिल

दरअसल, सिडनी में हो रहे मुकाबले के दौरान जब वे डाइविंग कैच ले रहे थे, तभी गिर पड़े और उनकी स्प्लीन में चोट लग गई। पहले तो उन्होंने इस चोट को गंभीरता से नहीं लिया, लेकिन जब दर्द बढ़ने लगा और चेकअप कराया गया, तो पता चला कि, उन्हें इंटरनल ब्लीडिंग हो रही है। इसके बाद उन्हें तत्काल आईसीयू में एडमिट कराया गया, जहां उनकी स्थिति काफी नाजुक हो गई थी।
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— BCCI (@BCCI) October 27, 2025
इंटरनल ब्लीडिंग से हालत हुई नाजुक
आपको बता दें कि, स्प्लीन शरीर का एक सबसे नाजुक अंग होता है। इसका काम रेड ब्लड सेल्स और व्हाइट ब्लड सेल्स को मैनेज करना और शरीर को इंफेक्शन से बचाना होता है। डॉक्टर का कहना है कि, यदि इसमें चोट लगती है, तो यह फट सकता है और इंटरनल ब्लीडिंग होने लगती है, जिससे जान पर संकट आ सकता है। स्प्लीन में चोट लगने पर शरीर कुछ संकेत देने लगता है, जैसे पेट में अचानक से तेज दर्द उठाना, बाईं तरफ की पसलियों या कंधे में दर्द, कमजोरी और चक्कर आना, दिल की धड़कन तेज होना और ब्लड प्रेशर लो हो जाना आदि।
सर्जरी की भी आ सकती है नौबत

इन लक्षणों में दिखने के बाद अगर समय रहते इलाज नहीं किया जाता, तो स्थिति गंभीर हो सकती है और कई बार सर्जरी की नौबत आ जाती है। बात की जाये स्प्लीन के इलाज की तो ये इस पर निर्भर करता है कि इसमें कितनी चोट लगी है और कितना खून बहा है। यदि स्प्लीन में मामूली चोट लगी और ज्यादा खून नहीं बहा है, तो प्राथमिक इलाज कर मरीज को बेड रेस्ट की सलाह दे दी जाती है, लेकिन चोट गंभीर है और खून ज्यादा बह गया है, तो मरीज को भर्ती कर लिया जाता और अगर तब भी खून नहीं रुक रहा होता, तो सर्जरी की जाती है।
इम्यून सिस्टम को दुरुस्त रखती है स्प्लीन

आमतौर पर लोग स्प्लीन के बारे में कम ही जानते हैं। हिंदी में इसे प्लीहा कहते हैं और ये शरीर के बाईं तरफ पसलियों के नीचे स्थित एक छोटा सा अंग होता है, जो बेहद जरूरी और संवेदनशील होता है। इसका मुख्य काम इम्यून सिस्टम को दुरुस्त रखना और खून की सफाई करना होता है। ऐसा भी कह सकते हैं कि ये हमारे शरीर को स्वस्थ बनाये रखने में अहम भूमिका निभाता है।
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