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World Cancer Day 2025: वैज्ञानिकों ने ढूंढा कैंसर का टीका, बीमारी पनपने से पहले से रोक देगी ये वैक्सीन

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World Cancer Day 2025:

World Cancer Day 2025: कैंसर एक गंभीर स्वास्थ्य समस्या है जो वैश्विक स्तर पर चिंता का कारण बनी हुई है। हर साल लाखों लोग इस बीमारी से अपनी जान गंवा देते हैं। साल 2023 में, कैंसर के कारण लगभग 96 लाख से एक करोड़ लोगों की मौत हो गई थी, जो हर दिन 26,300 मौतों के बराबर है। यह आंकड़ा कैंसर की गंभीरता को स्पष्ट रूप से दर्शाता है। इसी कारण हर साल 4 फरवरी का दिन विश्व कैंसर दिवस के रूप में मनाया जाता है, ताकि कैंसर के बढ़ते खतरों के बारे में लोगों के बीच  जागरूकता बढ़े। इसके साथ ही इसकी रोकथाम, पहचान और उपचार से लोगों को अवगत कराया जा सके।

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चिकित्सा जगत की महत्वपूर्ण प्रगति

हालांकि चिकित्सा क्षेत्र में नवाचार और लोगों की बढ़ती जागरूकता के कारण कैंसर का समय पर निदान और इलाज अब आसान हो गया है, फिर भी अधिकतर लोगों के बीच कैंसर अब भी डर का दूसरा बड़ा नाम है। वहीं अब एक सकारात्मक खबर आ रही है। कहा जा रहा है कि, ब्रिटेन के वैज्ञानिक एक ऐसी वैक्सीन पर काम कर रहे हैं जो इस गंभीर बीमारी को 20 साल पहले ही रोकने में सक्षम होगी। हालिया रिपोर्ट्स के अनुसार, वैज्ञानिक एक नए ‘कैंसर वैक्सीन’ के साथ चिकित्सा क्षेत्र में महत्वपूर्ण प्रगति पर हैं।

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कैंसर कोशिकाओं को खत्म करेगी वैक्सीन

यूनिवर्सिटी ऑफ ऑक्सफोर्ड के वैज्ञानिक, फार्मास्युटिकल दिग्गज कंपनी जीएसके के साथ मिल कर एक ऐसी वैक्सीन विकसित कर रहे हैं, जो शरीर में ‘अज्ञात कैंसर’ सेल्स को पहचानने में सक्षम होगी। दावा किया जा रहा है कि ये वैक्सीन बीमारी के विकसित होने से पहले ही इसे रोक देगी। वैज्ञानिकों का कहना है कि ये वैक्सीन प्री-कैंसर स्टेज में ही कैंसर कोशिकाओं को लक्षित करके उन्हें खत्म करने में सक्षम होगी। इस वैक्सीन के बारे में यूनिवर्सिटी ऑफ ऑक्सफोर्ड में ऑन्कोलॉजी की प्रोफेसर सारा ब्लागडेन ने एक स्थानीय रेडियो से बातचीत की और जरूरी जानकारियां साझा की।

20 साल से अधिक समय लगता है कैंसर बनने में

प्रोफेसर सारा बताती हैं कि हम सोचते हैं कि शरीर में कैंसर बनने में एक या दो साल लगते हैं, लेकिन अब कई शोध में पता चला है कि कैंसर विकसित होने में 20 साल या उससे भी अधिक का समय लग सकता है। इसका कारण यह है कि सामान्य कोशिका को कैंसर कोशिका बनने में काफी समय लगता है। इस दौरान अधिकांश कैंसर अदृश्य रहते हैं। जब कैंसर कोशिकाएं इस अवस्था में होती हैं, तो इसे प्री-कैंसर स्टेज कहते हैं, इसलिए, इस वैक्सीन का उद्देश्य कैंसर के खिलाफ टीकाकरण नहीं है, बल्कि प्री-कैंसर स्टेज में कैंसर का पता लगाना और उसे खत्म करना है।

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विशेषज्ञ क्या कहते हैं?

प्रोफेसर ब्लैगडेन के अनुसार, ‘जीएसके-ऑक्सफोर्ड कैंसर इम्यूनो-प्रिवेंशन प्रोग्राम’ कई तकनीकी और वैज्ञानिक प्रगति पर आधारित है। इसने प्री-कैंसर के खिलाफ वैक्सीन की संभावनाओं को उजागर किया है। हमारी तकनीकी सफलताएं हमें उस चीज का पता लगाने में मदद कर रही हैं, जो सामान्यत: पहचान में नहीं आती। अब तक, हम यह जान चुके हैं कि कैंसर की ओर बढ़ने वाली कोशिकाओं में क्या गुण होते हैं। इस जानकारी के आधार पर, हम विशेष रूप से लक्षित वैक्सीन डिजाइन कर रहे हैं।

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आसान होगा कैंसर को हराना

स्थानीय मीडिया की रिपोर्ट के अनुसार, जीएसके इस वैक्सीन प्रोजेक्ट के लिए तीन साल में £50 मिलियन (करीब 538 करोड़ रुपये) का निवेश करेगा। शोधकर्ताओं ने पहले ही उन प्रोटीन की पहचान कर ली है जो कैंसर को रोकने में मदद कर सकते हैं। ये प्रोटीन दोबारा कैंसर होने की संभावना को भी कम करते हैं। इस नए शोध का उद्देश्य कैंसर को फैलने से पहले ही रोकना है। विशेषज्ञों का कहना है कि अगर इस वैक्सीन के क्लिनिकल टेस्ट सफल होते हैं और यह ठीक से काम करती है, तो कैंसर को हराना आने वाले वर्षों में आसान हो सकता है। हालांकि, इस टीके के विकास में कितना समय लगेगा, इसकी जानकारी अभी उपलब्ध नहीं है।

 

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