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India-Russia Defense Deal: रूस ने दूर की भारत की बड़ी टेंशन, अब बिना बाधा बनेंगे नेवी के युद्धपोत

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नई दिल्ली। India-Russia Defense Deal: हाल ही में हुई रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की भारत यात्रा ने दोनों देशों के संबंधों के गहरी मजबूती दी है। दोनों देशों के मध्य कई महत्वपूर्ण डील भी हुई हैं। इस यात्रा के दौरान ही रूस ने भारत को एक और बड़ा ऑफर दिया है, जो रक्षा क्षेत्र को और अधिक मजबूती देने वाला है। दरअसल, पुतिन ने भारत में ही लोकल स्तर पर एम-90एफआर नेवल इंजन बनाने का ऑफर दिया है। ये इंजन भारतीय युद्धपोतों में इस्तेमाल किये जाते हैं। भारत ने पुतिन के इस प्रस्तावक को स्वीकार कर लिया है। ऐसे में अब उसकी यूक्रेन पर निर्भरता कम हो जाएगी।

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बेपटरी हो चुकी है सप्लाई चेन

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गौरतलब है कि, बीते तीन वर्षों से चल रहे रूस- यूक्रेन युद्ध की वजह से भारतीय युद्धपोतों के कल पुर्जों की सप्लाई चेन पूरी तरह से बेपटरी हो चुकी है। नतीजतन, जहाजों की संचालन क्षमता और भविष्य के लिए बनाये जा रहे युद्धपोतों के काम बड़ी बाधा उत्पन्न हो गई है। एक रिपोर्ट के अनुसार, भारतीय नौसेना को और मजबूत करने की दिशा में रूस ने बड़ी रणनीतिक पेशकश है।

रूस-यूक्रेन युद्ध से आ रही बाधा

रूसी फेडरेशन ने भारत में एम-90एफआर मरीन गैस टर्बाइन इंजन के उत्पादन का औपचारिक प्रस्ताव दिया है। इस प्रस्ताव का टारगेट भारत के फ्रंटलाइन वॉरशिप के निर्माण और मौजूदा बेड़े की आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए इसकी सप्लाई चेन पर पड़ने वाले असर को सुधारना है। रिपोर्ट में बताया गया है कि, भारतीय युद्धपोतों में इस्तेमाल किये जाने वाले ये कल पुर्जे रूस-यूक्रेन युद्ध की वजह पिछले तीन सालों से सामान्य तरीके से नहीं मिल पा रहे हैं, जिसे अब रूस सुधारना चाह रहा है।

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40 फीसदी जहाजों का संचालन बाधित 

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कल पुर्जों की सप्लाई में आ रही बाधा की वजह से भारतीय नौसेना को रूसी मूल के जहाजों के निर्माण और वर्तमान समय में बेड़े में मौजूद युद्धपोतों के संचालन में मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। खासकर तलवार-क्लास फ्रिगेट्स और क्रिवक-3 क्लास कोर्वेट्स को लेकर मुश्किल आया रही है, क्योंकि ये युद्धपोत गैस टर्बाइन इंजन और उससे जुड़े कल-पुर्जों के लिए यूक्रेन की कंपनी जोर्या-मैशप्रोएक्ट पर डिपेंड है, लेकिन, 2022 के फरवरी महीने में शुरू हुए रूस-युक्रेन युद्ध के चलते  इसकी सप्लाई चेन बुरी तरीके से बाधित हो गई। इन उपकरणों की सप्लाई बाधित होने से भारतीय सेना के कम से कम  40 फीसदी जहाजों का संचालन सही तरीके से नहीं हो पा रहा है।

पुतिन के दौरे के दौरान मिला ऑफर 

रक्षा सूत्रों से मिली खबर के मुताबिक, टर्बाइन ब्लेड और फ्यूल पंप की कमी के चलते इन जहाजों की मरम्मत का काम भी बाधित हो रहा है। अब रूसी फेडरेशन ने भारतीय नौसेना के जहाजों के लिए जिस एम-90एफआईर गैस टर्बाइन इंजन बनाने की पेशकश की है, वह चौथी पीढ़ी का 20 मेगावाट क्लास मरीन गैस टर्बाइन इंजन है और इसे एनपीओ सैटर्न और यूनाइटेड इंजन कॉर्पोरेशन ने विकसित किया है।

फेडरेशन ने ये ऑफर उस वक्त दिया जब रूस के राष्ट्रपति भारत के दौरे पर थे।  खास बात ये  है कि रूस ने भारत को इसे खरीदने का ऑफर नहीं दिया है बल्कि भारत में ही इसके उत्पादन का ऑफर दिया है।

यहां लग सकता है प्लांट

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रूसी अधिकारियों ने इसके लिए पूर्ण टेक्नोलॉजी ट्रांसफर की बात कही है। माना जा रहा है कि, कोलकाता के गार्डन रीच शिपबिल्डर्स एंड इंजीनियर्स या मुंबई के नजदीक नए ग्रीनफील्ड कॉम्पलेक्स में इसको असेंबल करने और मैन्युफैक्चिरंग फैसिलिटी की व्यवस्था की जाएगी। सूत्रों के मुताबिक, रूसी अधिकारी का कहना है कि, पांच साल के भीतर 50 से 60 फीसदी स्वदेशीकरण बनाने का टारगेट रखा गया है।

बात करें भारतीय नौसेना की, तो उसके लिए ऐसे इंजनों का भारत में ही बनाना बेहद अहम कदम होगा, क्योंकि, अतिरिक्त तलवार क्लास युद्धपोत तुशील और तमाला की वजह से इसकी अहमियत बढ़ गई है। ऐसे में अगर इन युद्धपोतों को मेक इन इंडिया के तहत इंजन मिल जाएगा, तो नौसेना को और अधिक मजबूती मिल जाएगी।

 

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