
नई दिल्ली। Jammu & Kashmir Dispute: भारत और पाकिस्तान के बीच कश्मीर मुद्दा एक बार फिर से गरमाया हुआ है। दोनों देशों के बीच उपजे इस तनाव के बाद अब रूस ने कश्मीर विवाद को सुलझाने के लिए मध्यस्थता की पेशकश की है। रूस का माना है कि, इससे क्षेत्रीय तनाव को कम करने में मदद मिलेगी। रूसी विदेश मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने रविवार को अपने एक बयान में कहा कि, दोनों पड़ोसी देशों (भारत-पाकिस्तान) के बीच बातचीत को बढ़ावा देने और तनाव कम करने को लेकर मास्को मध्यस्थ की भूमिका निभाने को तैयार है।
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तटस्थ रहेगा रूस

रविवार 5 मई को रूसी विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने पाकिस्तानी विदेश मंत्री से इस मुद्दे पर बात की और दोनों देशों के बीच तनाव को सुलझाने में रूस की मदद की पेशकश की। रूसी अधिकारी ने अपने एक बयान में कहा, “मास्को भारत और पाकिस्तान के बीच शांति और स्थिरता स्थापित करने के लिए प्रतिबद्ध है। हम कश्मीर सहित दोनों देशों के बीच के सभी विवादित मुद्दों पर रचनात्मक संवाद की सुविधा प्रदान करने को तैयार हैं।” रूसी विदेश मंत्री ने कहा, दोनों देशों के बीच मध्यस्थता के दौरान रूस का रुख तटस्थ रहेगा और वह दोनों देशों की संप्रभुता का सम्मान करेगा।
बनी है टकराव की स्थिति

बता दें कि, रूस की ये पेशकश ऐसे वक्त में आई है जब भारत और पाकिस्तान आतंकवाद को लेकर आमने सामने हैं। हाल के दिनों में दोनों के बीच संघर्ष की स्थिति उत्पन्न हो गई थी। भारत हमेशा से कश्मीर को अपना अभिन्न अंग मानता रहा है। वहीं, पाकिस्तान भी इस पर अपना दावा ठोंकता है। भारत, कश्मीर मुद्दे पर किसी तीसरे पक्ष की मध्यस्थता को खारिज करता है, जबकि पाकिस्तान इस पर हमेशा से अंतरराष्ट्रीय समुदाय से हस्तक्षेप की मांग करता रहा है।
मजबूत हुए है भारत रूस संबंध
रूस के इस प्रस्ताव पर भारत और पाकिस्तान की तरफ से अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। विदेश नीति के जानकार कहते हैं कि, रूस की यह पहल क्षेत्रीय स्थिरता के लिए अहम साबित हो सकती है, लेकिन दोनों देशों की जटिल स्थिति को देखकर ऐसा नहीं लगता कि रूस अपने इस मकसद में कामयाब होगा। रूस का यह बयान दक्षिण एशिया में बढ़ती उसकी राजनयिक सक्रियता को भी दिखा रहा है। बता दें कि, मॉस्को ने हाल के वर्षों में भारत के साथ अपने रणनीतिक संबंधों को और अधिक मजबूत किया है। साथ ही उसने पाकिस्तान के साथ भी अपने संबंध बेहतर बनाने की कोशिश की है।
1947 में चल रहा है विवाद

उल्लेखनीय है कि, कश्मीर को लेकर भारत और पाकिस्तान के बीच दशकों से संघर्ष चल रहा है। इसे लेकर दोनों देशों की बीच कई बार युद्ध भी हो चुका है। भारत-पाकिस्तान के ये विवाद दोनों देशों के बंटवारे यानी कि 1947 में ही उस वक्त शुरू हो गया था, जब महाराजा हरि सिंह के नेतृत्व वाले कश्मीर को भारत में शामिल किया गया था। बता दें कि, जम्मू कश्मीर मुस्लिम बाहुल्य क्षेत्र है। महाराजा के भारत में शामिल होने के फैसले ने नाराज पाकिस्तान ने 1947-48 में युद्ध छेड़ दिया था।
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ये दोनों देशों के बीच का पहला युद्ध था। इसके बाद युद्धविराम हुआ और नियंत्रण रेखा (LOC) बनाई गई इस राज्य को भारत-पाकिस्तान के बांट दिया गया। वहीं, पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर व गिलगित-बाल्टिस्तान में उसे नियंत्रण दे दिया गया। इसके बाद से दोनों देशों के बीच हमेशा तनाव बना रहा। दोनों परमाणु-सशस्त्र पड़ोसी देश अब तक तीन युद्ध (1947-48, 1965, 1999) कर चुके हैं। वहीं, कई छोटी-मोटी झड़पें आएं दिन होती रहती हैं। बंटवारे के बाद से ही कश्मीर हिंसा, उग्रवाद और राजनयिक तनाव का केंद्र बना हुआ है।
पहलगाम में हुआ आतंकी हमला
बता दें कि, जम्मू कश्मीर में पाकिस्तान के समर्थन से आये दिन आतंकी घुसपैठ होती रहती है, जिसका भारतीय सुरक्षा बल माकूल जवाब देते रहते हैं। यहां 22 अप्रैल 2025 को भी पहलगाम के पास स्थित बैसारन घाटी में एक क्रूर आतंकी हमला किया गया, जिसमें 26 नागरिक मारे गये। आतंकियों ने यहां घूमने आये पर्यटकों के धर्म पूछे, आईडी देखी और फिर गोली मार दी।

2008 के मुंबई हमलों के बाद भारत में नागरिकों पर हुए इस हमले को सबसे घातक हमला करार दिया गया। इस हमले को पांच सशस्त्र इस्लामवादी आतंकवादियों ने अंजाम दिया। इस हमले की जिम्मेदारी द रेसिस्टेंस फ्रंट (टीआरएफ) ने ली। ये आतंकी संगठन पाकिस्तान स्थित लश्कर-ए-तैबा (एलईटी) का एक हिस्सा माना जाता है। हालांकि, बाद में इसने आपना दावा वापस ले लिया। हमले के बाद जांच में जुटी एजेंसियों ने तीन संदिग्धों की पहचान की, जिनमें दो पाकिस्तानी नागरिक, हाशिम मूसा और अली भाई और एक स्थानीय, आदिल हुसैन ठोकर शामिल था। एजेंसियों ने दावा किया कि, इन सभी के संबंध एलईटी से हैं।
आतंकवाद को मिलता है पाकिस्तान का साथ
भारत का आरोप है कि, पाकिस्तान कश्मीर को अस्थिर करने के लिए सीमा पार से आतंकवाद को प्रायोजित करता है और इसमें लश्कर-ए-तैयबा और टीआरएफ जैसे समूहों की भूमिका का हवाला देता है। हमले के बाद, भारत ने इसे पाकिस्तान से जोड़ते हुए मुजफ्फराबाद और कराची में सुरक्षित पनाहगाहों के डिजिटल सबूत और पाकिस्तान की इंटर-सर्विसेज इंटेलिजेंस (आईएसआई) की संलिप्तता का दावा किया। भारत ने सिंधु जल संधि को निलंबित करके, अटारी-वाघा सीमा को बंद करके, पाकिस्तानी राजनयिकों को निष्कासित करके और वीजा प्रतिबंध लगाकर जवाब दिया। दोनों देशों के बीच सैन्य जवाबी कार्रवाई भी हुई। फ़िलहाल अंतर्राष्ट्रीय दवाब में सीजफायर हो गया है। भारत ने पहले उरी (2016) और पुलवामा (2019) में हुए आतंकी हमले में भी जवाबी कार्रवाई की थी।
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