Home » राष्ट्रीय » Indus Water Treaty: भारत के सामने रोया पाकिस्तान, कहा- सिन्धु जल संधि पर करनी है बातचीत, हर मुद्दा सुलझाने को तैयार

Indus Water Treaty: भारत के सामने रोया पाकिस्तान, कहा- सिन्धु जल संधि पर करनी है बातचीत, हर मुद्दा सुलझाने को तैयार

[the_ad id="14540"]
Indus Water Treaty:

नई दिल्ली। Indus Water Treaty: जम्मू कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद से भारत पाकिस्तान के बीच तनाव चरम पर है। इस हमले के तुरंत बाद भारत ने दशकों पुरानी जल संधि की निलंबित पर दिया है, जिससे पाकिस्तान के सामने जल संकट उत्पन्न हो गया है। ऐसे में पाकिस्तान बार-बार भारत से सिन्धु जल संधि पर बात चीत करने का अनुरोध कर रहा है, लेकिन भारत की तरफ से उसे कोई सकारात्मक संदेश नहीं मिल रहा है।

इसे भी पढ़ें- Indus Water Treaty: पानी के लिए गिड़गिड़ाया पाकिस्तान, S जयशंकर बोले- स्थगित रहेगा सिन्धु जल समझौता

भारत ने ठुकराया प्रस्ताव

Indus Water Treaty:

रिपोर्ट्स के अनुसार, पाकिस्तान ने भारत के सामने सिन्धु जल संधि पर बातचीत करने की गुहार लगाई है। इसके लिए उसने भारत को एक बार नहीं बल्कि कई बार पत्र लिखा है। हालांकि, भारत ने सख्त रुख अपनाते हुए उसके प्रस्ताव को ठुकरा दिया है। भारत का साफ कहना है कि,  खून और पानी एक साथ नहीं बह सकते हैं। पाकिस्तान जब तक आतंकवाद को समर्थन देता रहेगा, तब तक उसके साथ कोई बातचीत नहीं होगी और अगर कोई बातचीत होती है, तो वह सिर्फ पीओके के मुद्दे पर होगी। यहां सवाल ये है कि, पाकिस्तान भारत के साथ सिन्धु जल संधि पर तो बात करने की लिए बार-बार गुहार लगा रहा है, लेकिन वह अपनी जमीन पर पल रहे आतंकवाद के खात्मे को लेकर कोई कार्रवाई करेगा या नहीं इस पर कुछ भी नहीं बोल रहा है।

1960 में हुआ था समझौता

बता दें कि, भारत और पाकिस्तान में बीच ये सिन्धु जल संधि करीब नौ साल की बातचीत के बाद साल 1960 में विश्व बैंक की मध्यस्थता से हुई थी।  इस संधि के तहत छह प्रमुख नदियों  सिन्धु, झेलम, व्यास, चिनाब, सतलुज और रावी के पानी का बंटवारा दोनों देशों (भारत-पाकिस्तान) के बीच हुआ था। इनमें से तीन नदियों रावी, व्यास और सतलुज का पानी भारत को मिलता है, जबकि झेलम, चिनाब और सिन्धु का पानी पाकिस्तान के हिस्से में है। हालांकि, भारत इन तीनों नदियों का भी 20 फीसदी पानी इस्तेमाल कर सकता है,लेकिन उसका भण्डारण नहीं कर सकता है। भारत ने अब पाकिस्तान की पेशकश को ठुकराते हुए संधि पर अपने हिसाब से संशोधन करने की दिशा में कदम उठाने की बात कही है।

पहली बार रद्द हुई है संधि

Indus Water Treaty:

उल्लेखनीय है कि, सिन्धु जल संधि दशकों से दोनों देशों के बीच सहयोग का मुख्य आधार रही है, लेकिन सीमा पार से आये दिन हो रहे आतंकवाद ने इसे प्रभावित कर दिया है। हालांकि इससे पहले भी दोनों देशों के बीच कई बार तनाव चरम पर रहा, जैसे कि 1965, 1971 और 1990 का करगिल युद्ध, इसके अलावा पाकिस्तान के समर्थन में भारत में किये गये तमाम आतंकी हमले, लेकिन इस संधि को कभी भी दोनों देशों के बीच नहीं लाया गया। ऐसा पहली बार हुआ है जब भारत ने सख्त रुख अपनाते हुए इस संधि को रद्द कर दिया है। अब भारत का साफ कहना है कि, खून और पानी साथ नहीं बह सकते हैं।

जल शक्ति मंत्रालय को लिखा पत्र

रिपोर्ट है कि, पाकिस्तान के जल संसाधन मंत्रालय के सचिव सैयद अली मुर्तजा ने भारत के जल शक्ति मंत्रालय को पत्र लिखा है और संधि को बहाल करने व इस पर बातचीत शुरू करने का अनुरोध किया है। एक मीडिया चैनल ने सूत्रों के हवाले से खबर दी है कि, पाकिस्तान ने चार बार भारत को पत्र लिखकर बातचीत शुरू करने की गुहार लगाई है, लेकिन भारत उसकी एक नहीं सुन रहा है। उधर, पाकिस्तान का कहना है कि, वह भारत की सभी आपत्तियों पर चर्चा करने और मुद्दों को सुलझाने के लिए तैयार है। साथ ही उसका ये भी कहना है कि वह सिन्धु जल संधि के निलंबन को अंतरराष्ट्रीय क़ानून का उल्लंघन मानता है और इसे पुन: बहाल करने के लिए पारदर्शी और विश्वसनीय बातचीत चाहता है।

इसे भी पढ़ें- Indus Waters Treaty: क्या चीन भी रोक सकता है सिन्धु नदी का पानी?, यहां जानें क्या कहते हैं एक्सपर्ट्स

पाकिस्तान की जीवन रेखा है सिन्धु नदी

एक्सपर्ट्स का कहना है कि, पाकिस्तान की 80 फीसदी कृषि सिन्धु नदी के पानी पर ही निर्भर है। ऐसे में अगर ये संधि लंबे समय तक निलंबित रहती है, तो उसे गंभीर जल संकट का सामना करना पड़ सकता है। वहां की अर्थव्यवस्था डगमगा सकती है। सिधु नदी पाकिस्तान की कृषि और अर्थव्यवस्था की जीवन रेखा मानी जाती है। इधर, भारत ने पाकिस्तान के अनुरोध को ठुकारते हुए कह दिया है कि, वह अभी बातचीत के लिए तैयार नहीं है। भारत का साफ कहना है कि, सिन्धु जल संधि तक तक निलंबित रहेगी, जब तक पाकिस्तान सीमा पर से आतंकवाद के खिलाफ ठोस कार्रवाई नहीं करता है।

बार-बार टूटा भरोसा

Indus Water Treaty:

भारत का कहना है कि, पाकिस्तान प्रायोजित आतंकी गतिविधियों की वजह से भारत का भरोसा बार-बार टूटा है। ऐसे में अब उसे पड़ोसी मुल्क पर जरा सा भी भरोसा नहीं है। भारत ने संधि में अपने हिसाब से संशोधन करने की बात कही है। भारत की मोदी सरकार का मानना है कि, मौजूदा संधि भारत के प्रतिकूल है। ऐसे में राष्ट्र हित में इसमें संशोधन करना आवश्यक हो गया है। इसके अलावा, भारत ने जम्मू-कश्मीर में सलाल और बगलिहार जलविद्युत परियोजनाओं पर तलछट हटाने का काम शुरू कर दिया है, जिसके बारे में पाकिस्तान को सूचना नहीं दी गई। इससे पहले भारत कुछ भी करता था तो उसे पाकिस्तान को सूचित करना पड़ता था।

कभी बाढ़, तो कभी अकाल का सामना करेगा पाकिस्तान

भारत अब उसे सिन्धु नदी से जुड़ी कोई भी जानकारी साझा करने को मजबूर नहीं है। इससे पाकिस्तान को कभी बाढ़ तो कभी अकाल का सामना करना पड़ सकता है। हालांकि पाकिस्तान ने इस मुद्दे को यूएन समेत कई अंतर राष्ट्रीय मंचों पर भी उठाने की कोशिश की, लेकिन भारत के रुख स्पष्ट है कि संधि का निलंबत करके उसने सही किया है और वह इसे तब तक बहाल नहीं करेगा, जब तक कि उसकी चिंताओं का समाधान नहीं होता। वहीं 1960 में संधि की मध्यस्थता करने वाले विश्व बैंक ने अभी तक इस मामले में कोई सक्रिय हस्तक्षेप नहीं किया है।

 

इसे भी पढ़ें- Water Crisis In Pakistan: पाकिस्तान पर प्रहार, अब यहां का पानी भी रोकेगा भारत, इस देश की नदी पर बनाएगा बांध

Leave a Comment

[the_ad id="14784"]
[the_ad id="14787"]
Modi 3.0 के पहले आम बजट से मिडिल क्लास को मिलेगी राहत?