
नई दिल्ली। Indian Army: दुश्मनों को धूल चटाने के मकसद से अब भारतीय सेना को और मजबूत किया जा रहा है। सेना को अब एक से बढ़कर एक आधुनिक हथियारों से लैस किया जा रहा है और उसे भविष्य के लिए तैयार किया जा रहा है। इसके लिए सेना की दो इन्फेंट्री ब्रिगेड को रूद्र ब्रिगेड में बदल दिया गया है। इसके साथ ही भैरव लाइट कमांडो नाम से एक नई बटालियन का भी गठन किया गया है। इन दोनों को सीमाओं पर तैनात किया गया है। इनका काम दुश्मन पर झपट्टा मारना है, जिससे दुश्मन चौंक जाएं। सेना में किये गये इन दोनों बदलाव से भारत की सुरक्षा को और मजबूती मिलेगी। आइए जानते हैं ‘रूद्र’ और ‘भैरव’ की खूबी और ये भारत को किस -किस तरह से सुरक्षा प्रदान करेंगे।
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क्या है रूद्र ब्रिगेड

सेना की अलग-अलग फाइटिंग यूनिट को एक साथ मिलाकर रूद्र ब्रिगेड बनाई गई है। दुश्मनों को धूल चटाने में सक्षम ये ब्रिगेड सीमा पर तैनात है। हर तरह के सैनिकों को शामिल किया गया है। जैसे कि…
इन्फैंट्री: पैदल सैनिक, ये सैनिक जमीन पर मोर्चा संभालने में पूरी तरह से सक्षम हैं।
मैकेनाइज्ड इन्फैंट्री: बख्तरबंद गाड़ियों से लैस सैनिक भी इस ब्रिगेड में शामिल हैं।
आर्मर्ड यूनिट्स: टैंक और भारी हथियार
आर्टिलरी: तोपखाने, ये दुश्मन पर दूर से हमला करते हैं।
स्पेशल फोर्सेज: इस ब्रिगेड में खास मिशन के लिए ट्रेंड सैनिकों को भी शामिल किया गया है।
यूएवी (ड्रोन): बिना पायलट वाले हवाई हथियार, जो जासूसी करने के साथ ही हमला भी करते हैं।
खास बात: इन ब्रिगेड्स को खास तौर पर तैयार लॉजिस्टिक सपोर्ट (सामान और ईंधन की सप्लाई) और कॉम्बैट सपोर्ट दिया जायेगा। इसके हर इन्फैंट्री बटालियन में अब ड्रोन प्लाटून को भी शामिल किया गया है। ये ड्रोन प्लाटून दुश्मन की हर हरकत भी नजर रखेंगे। इसकी आर्टिलरी को दिव्यास्त्र बैटरीज और लॉयटर मुनिशन बैटरीज यानी हवा में मंडराने वाले हथियारों से भी लैस किया गया है। ये इसकी मारक क्षमता को कई गुना तक बढ़ाने में सक्षम हैं।

सेना की एयर डिफेंस को भी स्वदेशी मिसाइल सिस्टम से लैस किया जा रहा है। जैसे- आकाश मिसाइल और क्विक रिएक्शन सर्फेस-टू-एयर मिसाइल (QRSAM)। उदाहरण के लिए मान लीजिए, लाइन ऑफ़ कंट्रोल (LAC) पर चीनी सैनिक बढ़ रहे हैं, तो रुद्र ब्रिगेड में शामिल किये गये ड्रोन दुश्मन की पोजीशन बताएंगे और इसमें शामिल तोपें उन पर हमला करेंगी। इसके साथ ही स्पेशल फोर्सेस घात लगाकर दुश्मन को चौंका देंगी।
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भैरव लाइट कमांडो बटालियन
सेना की सबसे खतरनाक यूनिट्स में शामिल ‘भैरव लाइट कमांडो बटालियन’ दुश्मन के लिए काल साबित होगी। ये हल्की, तेज और घातक है। ये बटालियन स्पेशल फोर्सेज की तरह काम करेंगी, लेकिन इनका मेन फोकस बार्डर पर होगा। इनका काम दुश्मन पर अचानक से हमला करके उसे परेशान करना है। आइए जानते हैं इस बटालियन की खासियत क्या है।
एजाइल: भैरव लाइट कमांडो बटालियन को हल्के हथियार और गियर से लैस किया गया है, ताकि ये जो पहाड़ों और जंगलों में आसानी से चल सकें।
घातक: इनके पास छोटे लेकिन बेहद शक्तिशाली हथियार हैं। जैसे MP5 सबमशीन गन और स्वदेशी ड्रोन बम आदि।
सीक्रेट ऑपरेशन: इसमें शामिल सैनिक रात में या कोहरे में दुश्मन पर अचानक से हमला करने में ट्रेंड हैं।
काम: इस बटालियन का काम दुश्मन की सप्लाई लाइन तोड़ना और उनके ठिकानों को नष्ट करना है। ये यूनिट्स LAC या LOC पर भारत की सुरक्षा को और मजबूत करेगी।
सेना में शामिल नई तकनीकी
ड्रोन प्लाटून: अब भारतीय सेना की हर इन्फैंट्री बटालियन में ड्रोन होंगे, जो रियल-टाइम जासूसी करेंगे।
दिव्यास्त्र बैटरीज: ये आर्टिलरी सिस्टम हैं, जो सटीक और लंबी दूरी तक मार करने में सक्षम होगी।
लॉयटर मुनिशन: ये हवा में मंडराकर दुश्मन पर हमला करते हैं। उदाहरण के तौर पर छोटे स्वचालित बम।
स्वदेशी मिसाइल: एयर डिफेंस को मजबूत करने के लिए आकाश और QRSAM जैसी मिसाइलों से भी लैस हो रही सेना। ये तकनीकें AI (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) और सैटेलाइट डेटा से चलती हैं और दुश्मन की हर एक्टिविटी पर नजर रखती है। इसमें शामिल ड्रोन और मिसाइलें स्वचालित हैं, जिससे सैनिकों को किसी भी तरह का खतरा नहीं रहता है।
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क्यों जरूरी है ये बदलाव?

सीमा सुरक्षा: सीमा (LAC) और (LOC) पर बढ़ रही चुनौतियों और पड़ोसी मुल्कों के साथ तनाव के बीच ये ब्रिगेड्स भारत की रक्षा व्यवस्था को और मजबूत बनाएंगी। रुद्र और भैरव को दुश्मन के अचानक हमले का जवाब देने के लिए तैयार किया गया है।
आधुनिकीकरण: भारतीय सेना अब पुराने तरीकों से हटकर टेक्नोलॉजी और स्पेशल फोर्स पर भरोसा जता रही है। उसकी आत्मनिर्भरता स्वदेशी हथियारों पर ज्यादा बढ़ रही है।
भविष्य की तैयारी: सेना को ड्रोन और मिसाइल से लैस किया जा रहा है क्योंकि अब युद्ध में इनका अधिक से अधिक इस्तेमाल किया जाता है। भैरव जैसे कमांडो को भविष्य की गुप्त जंगों के लिए प्रशिक्षित किया जा रहा है।
चुनौतियां
ट्रेनिंग: सैनिकों और कमांडो को नई तकनीक का इस्तेमाल करने की ट्रेनिंग दी जा रही है, जिसमें समय लगेगा।
लागत: ड्रोन, मिसाइल और विशेष हथियार काफी महंगे होते हैं। ऐसे में बजट का इस्तेमाल सही तरीके से होना जरूरी है।
मेंटेनेंस: सेना के लिए स्वदेशी सिस्टम की देखभाल और अपग्रेड करना भी अपने आप में एक चुनौती होगी।
भारत के लिए क्या मायने?
सुरक्षा: रुद्र और भैरव से बार्डर पर भारत की सुरक्षा मजबूत होगी।
गर्व: स्वदेशी तकनीक से लैस ये यूनिट्स भारत की ताकत को दर्शाती हैं।
क्षेत्रीय प्रभाव: पड़ोसी देशों को संदेश जा रहा है कि भारत अब और मजबूत हो चुका है।
सेना प्रमुख का बयान: “रुद्र और भैरव को भविष्य की जंगों के लिए तैयार किया गया है।
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