
इजराइल। Gaza Ceasefire: गाजा में 15 महीने से चले रहे युद्ध के थमने का ऐलान किसी भी वक्त हो सकता है। कतर के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता माजिद अल-अंसारी ने मंगलवार को कहा कि इजरायल और हमास के बीच गाजा युद्धविराम वार्ता एक समझौते के बेहद करीब है। समझौते का अंतिम मसौदा दोनों पक्षों को दे दिया गया है।इज़राइल के एक न्यूज चैनल ने बताया कि मध्यस्थों ने पिछले साल दोहा और काहिरा में कई बार मुलाकात की, लेकिन अभी तक कोई समझौता नहीं हुआ है। न्यूज चैनल का कहना है कि समझौते को यरुशलम व्यापक रूप से मान रहा है। एसोसिएटेड प्रेस ने मंगलवार को बताया कि हमास ने भी समझौते को स्वीकार कर लिया है।
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जुलाई में पेश हुआ था ड्राफ्ट
हमास ने एक बयान में कहा कि मौजूदा वार्ता अपने अंतिम चरण में है और अन्य फिलिस्तीनी समूहों को भी इस मामले की जानकारी है। गत 28 दिसंबर से चल रही बंधक और युद्ध विराम बातचीत का आधार जुलाई में जो बाइडेन की तरफ से पेश किया गया वही समझौता है, जिसे पहले इजराइली पीएम बेंजामिन नेतन्याहू ने अस्वीकार कर दिया था।
Advisor to Prime Minister and Foreign Affairs Spokesperson Dr. @majedalansari: Gaza Ceasefire Talks on Home Stretch
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— Ministry of Foreign Affairs – Qatar (@MofaQatar_EN) January 14, 2025
इजराइल की शर्त ने रुक गया था समझौता
हमास ने जुलाई में जो बाइडन के प्रस्ताव को उसके मूल रूप में स्वीकार कर लिया था, लेकिन बाद में इज़राइल शर्त रख दी थी कि वह उत्तरी गाजा पट्टी और फिलाडेल्फिया कॉरिडोर से अपनी सेना को नहीं हटाएगा, जिससे कोई समझौता होते-होते रुक गया। गाजा पट्टी पर लगातार भारी बमबारी के बावजूद बंधकों के वापस लौटने में विफल रहने के बाद इजरायली सड़कों पर विरोध प्रदर्शन तेज हो गया। इन प्रदर्शनों को तब और बल मिला जब एक सैन्य अधिकारी ने घोषणा की कि इजरायली सेना गाजा में सभी सैन्य मिशन बिंदुओं पर पहुंच गई है, जिसके अनुसार बंधकों की रिहाई केवल बातचीत के माध्यम से ही हो सकती है।
बच जाती 120 इजराइली सैनिकों की जान
इज़रायली मीडिया के अनुसार, एक इज़रायली अदालत ने बंधक सौदे को रोकने के लिए नेतन्याहू सरकार के कई अधिकारियों पर मुकदमा चलाया है। दूसरी ओर, अमेरिकी चुनावों में डेमोक्रेट की हार ने बाइडन प्रशासन को संदेश दिया कि सेंटर लेफ्ट और लेफ्ट वोटर्स भी गाजा युद्ध में उनके रुख को लेकर नाखुश हैं। अगर प्रधानमंत्री नेतन्याहू ने आठ महीने पहले इस समझौते को स्वीकार कर लिया होता, तो गाजा में 120 इजरायली सैनिकों और लगभग 35,000 फिलिस्तीनी नागरिकों की जान बच जाती। इन वार्ताओं के दौरान इज़रायली सेना ने गाजा पट्टी पर लगातार बमबारी जारी रखी। फिलिस्तीनी स्वास्थ्य मंत्रालय के मुताबिक, पिछले 24 घंटों में गाजा पट्टी में इजराइली हमले में 63 लोग मारे गए है और 281 घायल हुए हैं।
नेतन्याहू को धमकी
हमास ने शुरू से ही इस बात पर जोर दिया कि गाजा से इजरायली सेना की वापसी और स्थायी युद्धविराम होना चाहिए। इजराइल द्वारा गाजा से धीरे-धीरे अपनी सेनाएं हटाने और स्थायी युद्धविराम पर पहले चरण की बातचीत शुरू होने के बाद मंगलवार को इन मुद्दों पर समझौते का अंतिम मसौदा भी पेश किया गया। इसके अलावा, इज़राइल अपन बंधकों के बदले हजारों फिलिस्तीनी कैदियों को रिहा करेगा। हालांकि, इज़रायल के दक्षिणपंथी नेताओं और संगठनों ने इस समझौते को अस्वीकार कर दिया है और नेतन्याहू की सरकार को गिराने की धमकी दे रहे हैं। अब य देखना होगा कि युद्धविराम के ऐलान के बाद नेतन्याहू की कुर्सी बच पायेगी या नहीं।
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