
नई दिल्ली। Iran-Israel Ceasefire: अमेरिकी प्रस्ताव पर सहमति के बाद ईरान-इजराइल के बीच सीजफायर हो गया है। इस लड़ाई में ईरान को भारी नुकसान पहुंचा है, उसके तीन परमाणु और कई सैन्य ठिकाने तबाह हो गये हैं। बावजूद इसके वह पाकिस्तान के नक़्शे कदम पर चलते हुए दुनिया को ये मैसेज दे रहा है कि, उसने अमेरिका और इजराइल को शिकस्त दी है। जी हां, तेहरान के इन्कलाब चौक पर बुर्के में ढंकी महिलाएं, सिर पर पगड़ी बांधे पुरुष, सभी हाथों में ईरान का परचम है और लोग जश्न में डूबे हुए हैं। कुछ लोग अपने सुप्रीम लीडर अली खामेनई की तस्वीर लेकर हुंकार भर रहे हैं।
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जोश के साथ नारे लगा रही थी भीड़

ईरानी जनता का मानना है कि, इस जंग में ईरान ने इजराइल और अमेरिका को सबक सिखाया है। वे इजराइल और यूएस की तबाही की इच्छा जता रहे हैं और नारे लगा रहे है और भीड़ भी पूरे जोश के साथ इस नारे को दोहरा रही है। ये भीड़ सिर्फ तेहरान में ही नहीं बल्कि पूरे ईरान के दूसरे शहरों में भी देखने को मिल रही है।
रिपोर्ट के अनुसार, ये जश्न तेहरान के इंकलाब स्क्वायर में मनाया गया। ठीक इसी तरह का जश्न पाकिस्तान ने ‘ऑपरेशन सिन्दूर’ के दौरान भारत से मिली हार के बाद मनाया था। भारत-पाकिस्तान के बीच 10 मई को सीजफायर हुआ था। इसके बाद 11 मई को पाकिस्तान ने यौम-ए-तशक्कुर (धन्यवाद दिवस) मनाया था। पहलगाम हमले के बाद भारत द्वारा लांच किये गये ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के तहत की गई सैन्य कार्रवाई में भारत ने पाकिस्तान और पाक अधिकृत कश्मीर में नौ ठिकानों पर हमला किया था और नौ आतंकी शिविरों को तहस-नहस कर दिया था।
पाकिस्तान के हर कोने में घुसा था भारत
भारत ने पाकिस्तान के कई एयर स्पेस को छिन्न-भिन्न कर दिया और पड़ोसी मुल्क को ये दिखा दिया कि, वहां उसके हर कोने में घुस सकता है और तबाही मचा सकता है। इस ऑपरेशन में कई आतंकियों समेत पाकिस्तान के 160 लोग मारे गए। इसके बावजूद पाकिस्तान ने घरेलू मोर्चे पर अपनी जीत का जश्न मनाया। इसके बाद 12 मई को पाकिस्तान की नेशनल असेंबली का एक सत्र बुलाया गया, जिसमें इस कथित “जीत” पर लंबी-लंबी तकरीरें की गईं। इस सत्र को राष्ट्रीय एकता और सैन्य ताकत के प्रदर्शन के रूप में प्रस्तुत किया गया।
ईरान को भी पहुंचा है भारी नुकसान

इधर 12 दिनों तक चले हालिया इजरायल-ईरान युद्ध में ईरान को भारी नुकसान पहुंचा है। इजराइली हमले में ईरान के 8 से 10 परमाणु वैज्ञानिक मारे जा चुके हैं। ईरान के पूरे सैन्य नेतृत्व को इजराइल ने तहस-नहस कर दिया है। इसके अलावा उसके तीन परमाणु ठिकाने (नतांज, फोर्डो, इस्फहान) को भी पूरी तरह से बर्बाद कर दिया है। अमेरिकी बी-2 विमानों से इन तीन परमाणु केंद्रों पर हमले के बाद ईरान की परमाणु सम्पन्न बनाने की तैयारी को बड़ा झटका लगा है। इस जंग में इजराइल और अमेरिका के लिए ईरान का स्पेस पूरी तरह से खुल चुका है। वे जब चाह रहे हैं और जैसे चाह रहे हैं वैसे उस पर हमला कर रहे हैं।
एक हजार ईरानी मारे गए
इस जंग में सरकारी आंकड़ों के मुताबिक 650 और मानवाधिकार संगठन के अनुसार 1000 ईरानी मारे गये हैं। इसके बावजूद ईरान के प्रॉक्सी संगठन हिजबुल्लाह और हूती इसे इजरायल की हार और ईरान की जीत के रूप में जनता के सामने पेश कर रहे हैं। ये जश्न मुख्य रूप से इसलिए प्रचारित किया गया ताकि जनता का मनोबल बना रहे हैं और शासन की छवि अजेय बनी रहे। ईरान ने इजराइल पर किये गये अपने मिसाइल हमलों को ‘ऑपरेशन ट्रू प्रॉमिस 3’ नाम दिया था, जबकि पाकिस्तान ने भारत के खिलाफ की गई जवाबी कार्रवाई को ‘ऑपरेशन बुनियान-अल-मरसूस” का नाम दिया था।
हमले पर उठे सवाल

‘ऑपरेशन सिन्दूर’ में भारत ने पाकिस्तान में ऐसी तबाही मचाई की वह सीजफायर कराने के लिए अमेरिका के सामने गुहार लगाने लगा। इसके बाद जब सीजफायर हुआ तो पाकिस्तान ने अपनी जीत घोषित की और जश्न मनाया। इधर, ईरान के परमाणु केन्द्रों फोर्डो, इस्फहान और नतांज पर अमेरिकी हमले के तुरंत बाद इस पर सवालिया निशान भी उठने लगे। अमेरिकी मीडिया एजेंसियां सीएनएन और न्यूयॉर्क टाइम्स ने पेंटागन की एक खुफिया रिपोर्ट जारी कर कहा कि, अमेरिका और इजराइल द्वारा किये गये इन हमलों में ईरान के एनरिच यूरेनियम नष्ट नहीं हुए और न ही उसके सेंट्रीफ्यूज को ही कोई नुकसान पहुंचा है। रिपोर्ट में ये भी कहा गया है कि, ईरान ने अपने एनरिच यूरेनियम को वहां से हटा दिया है। पेंटागन की इस कथित रिपोर्ट ने सामने आने के बाद अमेरिकी हमले पर बड़ा प्रश्न चिन्ह लग गया है।
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