
नई दिल्ली। UP politics: यूपी के दिग्गज नेता जैसे कि सीएम और दोनों डिप्टी सीएम के दिल्ली दौरे व हाईकमान से हुई मुलाक़ात ने प्रदेश में सियासी पारा बढ़ा दिया है। चर्चा ये है कि, पार्टी नेताओं की ये दौड़ भाग अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव और प्रदेश अध्यक्ष के चयन से जुड़ी है। दरअसल, शनिवार 19 जुलाई की शाम प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ दिल्ली पहुंचे और पीएम नरेद्र मोदी से मुलाक़ात की। इसके बाद वे पार्टी अध्यक्ष जेपी नड्डा और गृह मंत्री अमित शाह से मिले। इससे पहले डिप्टी सीएम बृजेश पाठक और केशव प्रसाद मौर्य ने भी अमित शाह और नड्डा से मुलाक़ात की थी। इसके बाद तीनों नेता एक साथ, एक मंच पर नजर आये। कहा जा रहा है कि, ऐसा इसलिए किया जा रहा है, ताकि जनता के बीच ये संदेश जाये कि पार्टी में सब कुछ ठीक चल रहा है।
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2024 के चुनाव में घटी थीं सीटें

उल्लेखनीय है कि, 2024 में हुए लोकसभा चुनाव में बीजेपी को यूपी में काफी नुकसान उठाना पड़ा था और पार्टी का वोट बैंक बुरी तरह से प्रभावित हुआ था। उसकी सीटें भी काफी घटी थी और उसका सियासी समीकरण भी गड़बड़ा गया था। यही वजह है कि पार्टी इस बार अपना हर कदम फूंक-फूंक कर उठा रही है और संगठन में बदलाव करने से जुड़े हर फैसले पर बार-बार मंथन कर रही है।
सीएम योगी ने हाईकमान को बताई पसंद

दरअसल, यूपी में पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष का चयन होना है क्योंकि भूपेन्द्र चौधरी का कार्यकाल इस साल के शुरुआत में ही खत्म हो गया था। हालांकि, अभी भी वह इस जिम्मेदारी को संभाल रहे हैं। नये अध्यक्ष के चयन से पहले बृजेश पाठक और केशव प्रसाद मौर्य दिल्ली पहुंचे और जेपी नड्डा व अमित शाह से मुलाकात की। इसके बाद 19 जुलाई को सीएम योगी भी दिल्ली गये और पीएम मोदी से मिले। इसके बाद वे जेपी नड्डा व अमित शाह से भी मिले। सूबे के तीनों नेताओं का दिल्ली जाना और हाईकमान से मिलना कई राजनीतिक कयासों को जन्म दे रहा है। साथ ही इसे नये प्रदेश अध्यक्ष के चयन से जुड़ा माना जा रहा है। सीएम योगी ने भी हाईकमान के सामने प्रदेश अध्यक्ष लिए अपनी पसंद और न पसंद की राय भी रख दी है।
भारतीय राजनीति के चाणक्य एवं हम जैसे लाखों कार्यकर्ताओं के प्रेरणास्रोत व मार्गदर्शक, देश के यशस्वी गृह एवं सहकारिता मंत्री माननीय श्री अमित शाह जी से शिष्टाचार भेंटकर 2027 में उत्तर प्रदेश में 2017 दोहराने एवं तीसरी बार भाजपा सरकार बनाने सहित विभिन्न महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तृत… pic.twitter.com/pW0rx5rbrf
— Keshav Prasad Maurya (@kpmaurya1) July 8, 2025
भारत के माननीय रक्षा मंत्री, राष्ट्रसेवा एवं सादगी के प्रतीक आदरणीय श्री @rajnathsingh जी को जन्मदिवस की पूर्व संध्या पर हार्दिक शुभकामनाएँ। प्रभु श्रीराम जी से प्रार्थना है कि आप सदैव स्वस्थ, दीर्घायु एवं राष्ट्रहित में सक्रिय रहें।
आज उनके आवास पर जाकर शुभकामनाएँ प्रेषित करने… pic.twitter.com/K5ick7N4Pr
— Keshav Prasad Maurya (@kpmaurya1) July 9, 2025
पीडीए समीकरण से हुआ बीजेपी को नुकसान
पार्टी सूत्रों का कहना है कि, राष्ट्रीय अध्यक्ष के चयन के बाद ही प्रदेश अध्यक्ष का चयन होगा। ‘दरअसल, जेपी नड्डा का भी कार्यकाल समाप्त हो चुका है, जिससे पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष का भी चयन होना है।’ ऐसा इसलिए किया जाएगा क्योंकि लोकसभा चुनाव में यूपी में पार्टी का प्रदर्शन काफी खराब रहा था। यहां की 80 लोकसभा सीटों में से बीजेपी को 33 सीटें मिली थी जबकि सपा के हिस्से में 37 और कांग्रेस के हिस्से में 6 सीटें आई थीं। 2019 की तुलना में बीजेपी को 34 सीटों का नुकसान उठाना पड़ा था।
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री श्री @myogiadityanath ने केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री श्री @AmitShah से भेंट की। pic.twitter.com/UDouxbwLuJ
— गृहमंत्री कार्यालय, HMO India (@HMOIndia) July 19, 2025
इसके अलावा पार्टी का आठ फीसदी वोट शेयर भी घटा है। राजनीतिक विश्लेषकों की मानें, तो अखिलेश यादव के पीडीए समीकरण से बीजेपी को नुकसान उठाना पड़ा था और उसका जातीय समीकरण भी गड़बड़ा गया था। यही कारण है कि, पार्टी हाईकमान इस बार कोई रिस्क नहीं लेना चाहता और प्रदेश के टॉप थ्री नेताओं से चर्चा करके ही प्रदेश अध्यक्ष का नाम फाइनल करना चाहता है।
आदरणीय प्रधानमंत्री श्री @narendramodi जी से नई दिल्ली में #UPCM @myogiadityanath ने शिष्टाचार भेंट की।@PMOIndia pic.twitter.com/1WF5IwveAm
— CM Office, GoUP (@CMOfficeUP) July 19, 2025
ओबीसी नेता को बनाया जा सकता है अध्यक्ष

बता दें कि, 2024 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी का गैर-यादव ओबीसी वोट खासकर पटेल, कुर्मी, सैनी और शक्य बिरादरी का वोट छिटक कर सपा की झोली में चला गया था। निषाद पार्टी से गठबंधन के बावजूद मल्लाह जाति का काफी वोट सपा को ही मिला था। ऐसे में बीजेपी हाईकमान सूबे में पार्टी की सोशल इंजीनियरिंग को मजबूत करने की कवायद कर रही है। कयास लगाये जा रहे हैं कि प्रदेश अध्यक्ष की कमान ओबीसी समुदाय को सौंपी जा सकती है।
राजनीतिक विश्लेषकों की मानें, तो बीजेपी गुजरात की ही तरह यूपी को भी अपनी प्रयोगशाला बनाना चाह रही है। इसके लिए उसे अपनी जीत का सिलसिला बरकारार रखना होगा। पार्टी 2017 और 2022 में लगातार दो बार जीतने में सफल रही है, लेकिन 2024 में हुए लोकसभा चुनाव के नतीजों ने 2027 के लिए चिंता पैदा कर दी है।
कैबिनेट में भी कर सकती है बदलाव

यूपी में विधानसभा चुनाव होने में अभी डेढ़ साल का समय बचा है। ऐसे में सभी पार्टियां सियासी बिसात बिछाने में जुट गई हैं। वहीं, बीजेपी भी हैट्रिक लगाकर इतिहास रचने की कोशिश में है। कयास ये भी लगाए जा रहे हैं कि, 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष का चयन करके ही नहीं समीकरण साधने की कोशिश करेगी बल्कि कैबिनेट में भी फेरबदल कर सकती है और कुछ नए चेहरों को एंट्री दे सकती है।
दरअसल, 2024 के लोकसभा चुनाव में सत्ता और संगठन के बीच मन मुटाव की खबरें आई थीं। यही वजह है कि, हाईकमान इस बार किसी भी तरह का रिस्क नहीं लेना चाह रहा है। वह सत्ता और संगठन दोनों में बदलाव कर क्षेत्रीय और जातीय समीकरण साधने की कवायद में जुटा है।
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