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World Hindi Day: विश्व की तीसरी सबसे बड़ी भाषा है हिन्दी

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अम्बिकापुर। World Hindi Day: देवनागरी लिपी की वैज्ञानिकता और हिन्दी की सरलता, सहजता से उसको प्रसार मिला है। हिन्दी हमारी जीवनचर्या की भाषा है। यह बातें शनिवार को श्री साई बाबा आदर्श स्नातकोत्तर महाविद्यालय में विश्व हिन्दी दिवस के उपलक्ष्य पर प्राचार्य डॉ. राजेश श्रीवास्तव ने कही।

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हिन्दी को अपने व्यवहार में लाएं

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उन्होंने कहा कि, हिन्दी विश्व की तीसरी सबसे बड़ी आबादी द्वारा बोले जाने वाली प्रथम भाषा है। हिन्दी साहित्य में उच्चारण, लेखन और वाचन में साम्यता है जो बोला जायेगा, वही लिखा जायेगा और जो लिखा है उसी का पाठ होगा। उन्होंने कहा कि हिन्दी को अपने व्यवहार और जीवन में लाना होगा।

वैश्विक भाषा बन चुकी है हिंदी

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कार्यक्रम को सम्बोधित करते हुए डॉ. अजय कुमार तिवारी ने कहा कि हिन्दी वैश्विक भाषा बन चुकी है। वैश्विक भाषा बनाने में सम्पर्क भाषा, अनुवाद का सबसे बड़ा योगदान रहा है। हिन्दी को मैथिली, अवधी, भोजपुरी, ब्रज, राजस्थानी, मारवाड़ी, बघेलखंडी, छत्तीसगढ़ी से मजबूती मिलती है। बोलियों से हिन्दी को साहित्य का संसार मिला है।
कार्यक्रम को सम्बोधित करते हुए शिक्षा विभाग के अध्यक्ष डॉ. दिनेश शाक्य ने कहा कि बहुभाषी होना अच्छी बात है, लेकिन विदेशी भाषा के लिए अपनी हिन्दी को द्वितीय पायदान पर नहीं रखा जा सकता है।

बच्चों में भाषा के प्रति संस्कार डालें

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उन्होंने कहा कि बच्चों में भाषा के प्रति संस्कार डालना होगा। कार्यक्रम का संचालन करते हुए हिन्दी के सहायक प्राध्यापक देवेन्द्र दास सोनवानी ने कहा कि साहित्य में संवेदना, ममता, प्रेम, मानवता है। आप जब कहानी, कविता, उपन्यास से रू-ब-रू होते हैं तो भारतीय संस्कृति के वाहक बनते हैं। हिन्दी साहित्य की चुनिंदा कहानी और उपन्यास के लिए उन्होंने विद्यार्थियों का आह्वान किया।

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पूस की रात, टोबा टेकसिंह, काबूलीवाला, उसने कहा था, टोकरी भर मिट्टी, कफन, वापसी, चीफ की दावत आदि कहानियों के कथ्य और तथ्य से अवगत कराया। सहायक प्राध्यापक कृष्णाराम चौहान ने वक्ताओं का आभार प्रकट किया। कार्यक्रम के दौरान आईक्यूएसी समन्वयक डॉ. शैलेष देवांगन, डॉ. वंदना पांडेय, डॉ. जगमीत कौर, स्वाति शर्मा, संजय कुमार तथा सभी विद्यार्थी उपस्थित रहे।

 

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