
लालगंज, प्रतापगढ़। UGC 2026: यूजीसी के नए नियमों पर सुप्रीम कोर्ट द्वारा लगाई गई अंतरिम रोक से देशभर में छात्रों, अभिभावकों और सामान्य वर्ग में खुशी और राहत का माहौल है। इस फैसले को संविधान, समानता और सामाजिक न्याय की जीत के रूप में देखा जा रहा है। सर्वोच्च न्यायालय ने स्पष्ट कर दिया है कि शिक्षा व्यवस्था में किसी भी प्रकार का भेदभाव स्वीकार्य नहीं होगा।
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बढ़ सकती है असमानता
सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने कड़ी टिप्पणी करते हुए सवाल उठाया कि क्या हम उल्टी दिशा में जा रहे हैं। अदालत ने कहा कि शिक्षा का उद्देश्य समाज को एकजुट करना है, न कि वर्गों में बांटना। न्यायालय ने यह भी स्पष्ट किया कि यूजीसी के नए नियम अस्पष्ट हैं और उनमें दुरुपयोग की पूरी संभावना है, जिससे समाज में भेदभाव और असमानता बढ़ सकती है।
एकजुटता की जीत
अदालत ने दो टूक कहा कि, भारत को भेदभाव-मुक्त समाज की दिशा में आगे बढ़ना चाहिए, न कि ऐसे नियमों की ओर जो सामाजिक विभाजन को बढ़ावा दें। सुप्रीम कोर्ट के इस महत्वपूर्ण फैसले पर प्रतिक्रिया देते हुए बृजेश तिवारी सेवादार ने खुशी जताई।
उन्होंने कहा कि हम सर्वोच्च न्यायालय का पूर्ण सम्मान करते हैं। यह फैसला सामान्य वर्ग की एकजुटता की जीत है, जिसने शिक्षा में हो रहे अन्याय पर विराम लगाया है। यह संघर्ष किसी वर्ग के खिलाफ नहीं, बल्कि समान अवसर और न्याय के पक्ष में है।
जारी रहेगा आन्दोलन
उन्होंने आगे कहा कि जब तक यूजीसी का यह काला और भेदभावपूर्ण कानून पूरी तरह वापस नहीं लिया जाता, तब तक सामान्य वर्ग लोकतांत्रिक और शांतिपूर्ण तरीके से अपना आंदोलन जारी रखेगा। यह निर्णय देशभर के छात्रों और अभिभावकों के लिए राहत का संदेश है और यह भी स्पष्ट करता है कि संविधान और समानता के मूल सिद्धांतों से कोई समझौता स्वीकार्य नहीं है।
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