
वॉशिंगटन। Abraham Accords: पूरी दुनिया को अपनी मुट्ठी में करने को बेताब अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अब खाड़ी देशों पर भी अपनी नजरें टेढ़ी कर ली है। ट्रंप में अब्राहम अकॉर्ड में शामिल होने को लेकर खाड़ी देशों पर दबाव बढ़ा दिया है। उनका कहना है कि, खाड़ी देशों को अब इस पर अपने हस्ताक्षर कर देने चाहिए, ये खाड़ी देशों का हम पर कर्ज होगा। ट्रंप ने ये भी कहा कि, ईरान के साथ किसी भी तरह का समझौता इस बात पर निर्भर करेगा कि क्या पाकिस्तान, मिस्र, तुर्की, कतर और सऊदी अरब अब्राहम अकार्ड समझौते पर हस्ताक्षर करने के लिए तैयार होते हैं।
इसे भी पढ़ें- Iran-Israel War में कूदा अमेरिका, भेजे 30 सैन्य विमान, ट्रंप ने खामेनई को कहा- बिना शर्त करो सरेंडर
ईरान-अमेरिका तनाव

आपको बता दें कि, एक तरफ तो ईरान अमेरिका के बीच गंभीर तनाव चल रहा है और इसे खत्म करने को लेकर दोनों देशों के बीच शांति वार्ता भी चल रही है। हालांकि, इसका कोई असर होता हुआ नजर नहीं आ रहा है, क्योंकि ईरान किसी भी कीमत पर अमेरिका की शर्तों को मानने को तैयार नहीं है। वहीं, डोनाल्ड ट्रंप ईरान से अपनी शर्तों पर समझौता चाहते हैं। नतीजा ये है कि कोई भी देश झुकने और पीछे हटने को तैयार नहीं है। खैर, हम बात कर रहे हैं कि, उस अब्राहम अकार्ड समझौते की, जिसे लेकर ट्रंप खाड़ी देशों पर हस्ताक्षर का दबाव बना रहे हैं।
खाड़ी देशों का हम पर कर्ज होगा
एक रिपोर्ट के अनुसार, हाल ही में हुई कैबिनेट की बैठक में अमेरिकी राष्ट्रपति ने स्पष्ट कहा है कि, कतर, पाकिस्तान और सऊदी अरब समेत अन्य मुस्लिम देशों को इन समझौतों पर बिना समय गवाएं दस्तखत कर देना चाहिए। बैठक में ट्रंप ने यह भी कहा कि, उनके विशेष दूत स्टीव विटकॉफ और दामाद जेरेड कुशनर इस पर काम कर रहे हैं। उन्होंने ये भी कहा कि, सच कहूं तो मुझे लगता है कि, ये उनका हम पर कर्ज है। अगर वे ऐसा करते हैं, तो यह ऐतिहासिक होगा।
क्या और देशों को किया जा सकता है शामिल

मीडिया से बातचीत करने के दौरान, ट्रंप ने अपने दूत स्टीव विटकॉफ से सवाल किया कि, क्या और देशों को इस समझौते में शामिल करने के लिए कहा जा सकता है। इस पर विटकॉफ ने जवाब दिया कि, हम पूरी कोशिश कर रहे हैं कि, और भी देशों को इसमें शामिल किया जाये। इसके बाद ट्रंप ने सख्त लहजे में कहा कि, अगर खाड़ी देश इसमें शामिल होने से इंकार करते हैं, तो वॉशिंगटन मध्य-पूर्व में चल रहे संघर्ष को खत्म करने की कोशिशों पर फिर से विचार कर सकता है।
उन्होंने आगे कहा कि, अगर खाड़ी देश अब्राहम अकार्ड पर दस्तखत नहीं करते हैं, तो मुझे नहीं लगता कि हमें ईरान के साथ समझौता करना चाहिए। इस दौरान ट्रंप ने यूएई समेत उन देशों की तारीफ भी की जो पहले से ही इस फ्रेमवर्क का हिस्सा हैं। उन्होंने कहा कि, सऊदी अरब, कतर और कुवैत जैसे देश अगर इजरायल के साथ इस अब्राहम समझौते में शामिल होते हैं तो उन्हें आर्थिक ही नहीं राजनीतिक लाभ भी मिलेगा।
क्या है अब्राहम अकार्ड समझौता

उल्लेखनीय है कि साल 2020 में डोनाल्ड ट्रंप ने अपने पहले कार्यकाल के आखिर में सितंबर महीने में अब्राहम अकार्ड समझौता पेश किया गया था। इसका मकसद खाड़ी देशों और इजराइल बीच राजनयिक, आर्थिक और सांस्कृतिक संबंधों को सामान्य बनाना था। यही वजह है कि, इसका नाम अब्राहम के नाम पर रखा गया है, जिन्हें यहूदी, ईसाई और इस्लाम तीनों धर्मों में सम्मान की नजर से देखा जाता है।
ये देश पहले ही हो चुके हैं शामिल
बताया जाता है कि, इस समझौते के तहत बहरीन और संयुक्त अरब अमीरात पहले ही इजराइल के साथ संबंध स्थापित कर चुके हैं। ये दोनों पहले ऐसे देश बने, जिन्होंने अब्राहम अकार्ड समझौते के मसौदे पर दस्तखत किए। इसके बाद मोरक्को और सूडान ने भी इस पर दस्तखत किये और इजराइल के सबंधी बन गये।
इन देशों को इजराइल के साथ संबंध स्थापित करते देश सऊदी अरब ने भी इसमें शामिल होने में दिलचस्पी दिखाई, लेकिन इससे पहले की वह समझौते पर हस्ताक्षर करता हमास-इजराइल युद्ध शुरू हो गया और गाजा में तबाही मचने लगी, जिसे देख रियाद ने अपने कदम पीछे खींच लिए।
इजराइल को मान्यता देने के पक्ष में नहीं है अरब देश

गौरतलब है कि, दशकों से अरब देशों की एक ही नीति रही है कि, जब तक फिलिस्तीन को अलग राष्ट्र का दर्जा नहीं मिल जाता, तब तक वे इजराइल को भी मान्यता नहीं देंगे, लेकिन अमेरिका की मध्यस्थता से पेश किये गये इस मसौदे ने इस नीति को पूरी तरह से पलट दिया और बिना फिलिस्तीन मुद्दे के समाधान के अरब के कई देशों ने इजराइल के साथ न सिर्फ व्यापारिक, राजनयिक संबंध स्थापित किये बल्कि सीधी उड़ाने भी शुरू कर दी हैं।
इसे भी पढ़ें- Donald Trump-Pakistan: ट्रंप ने की पाकिस्तान की तारीफ़, कहा- ‘वे स्मार्ट हैं और शानदार चीजें बनाते हैं’






Users Today : 36

