
बीजिंग। PM Modi Xi Jinping Meet: अमेरिकी टैरिफ को लेकर चल रहे विवाद के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच रविवार को द्विपक्षीय वार्ता हुई। पीएम मोदी साल बाद एक बार फिर से चीन की दो दिवसीय यात्रा पर हैं। वे शनिवार को चीन पहुंचें। आज रविवार को हुई वार्ता में दोनों नेताओं ने भारत-चीन आर्थिक संबंधों, पूर्वी लद्दाख में सीमा विवाद को लेकर आये तनाव की वजह से खराब हुए संबंधों को सामान्य करने के लिए जरूरी कदम उठाने पर विचार-विमर्श हुआ है।
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50-55 मिनट तक चली बैठक

दो दिवसीय दौरे पर चीन पहुंचे पीएम मोदी की राष्ट्रपति शी जिनपिंग से करीब दस महीने बाद आज रविवार को तियानजिन में मुलाकात हुई। दोनों नेताओं की ये बैठक 50 से 55 मिनट तक चली, जिसमें भारत-चीन संबंध की सुधारने को लेकर चर्चा की गई। ये बैठक भारत-अमेरिका के बीच टैरिफ को लेकर विवाद को देखते हुए और भी अहम मानी जा रही है। दरअसल, ट्रंप की टैरिफ नीतियों की वजह से भारत और अमेरिका के संबंधों में दरार आ गई है।
संबंधों को सामान्य करने पर हुई चर्चा
पीएम मोदी चीन में हो रहे दो दिवसीय शंघाई सहयोग संगठन में शामिल होने के लिए चीन पहुंचे। यहां उन्होंने चीनी राष्ट्रपति के साथ अलग से बैठक की और दोनों देशों के बीच संबंधों को सामान्य करने की चर्चा की। आधिकारिक सूत्रों के हवाले से ये भी बताया जा रहा है कि दोनों नेता अभी एक बार फिर से बैठक कर सकते हैं। इससे पहले दोनों नेता अक्तूबर 2024 में रूस के कजान में हुए ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में मिले थे।
चीनी विदेश मंत्री आए थे भारत
तियानजिन की अपनी यात्रा पर रवाना होने से पहले प्रधानमंत्री मोदी ने कहा था कि, विश्व की आर्थिक व्यवस्था में स्थिरता लाने के लिए भारत और चीन को एक साथ आना होगा। इससे पहले पीएम मोदी जापान गये थे, जहां योमिउरी शिंबुन को दिए एक इंटरव्यू में उन्होंने कहा था कि, क्षेत्रीय और वैश्विक शांति व समृद्धि के लिए भारत और चीन के बीच स्थिर एवं पूर्वानुमानित संबंध होना आवश्यक है। बता दें कि, पीएम मोदी की ये चीन यात्रा, चीनी विदेश मंत्री वांग यी की भारत यात्रा के कुछ ही दिन बाद हुई है।
सीधी उड़ान शुरू करने पर चर्चा

भारत दौरे पर आए वांग के साथ विदेश मंत्री एस जयशंकर और एनएसए अजीत डोभाल की व्यापक वार्ता हुई थी, जिसमें दोनों पक्षों में स्थिर, सहयोगात्मक और दूरदर्शी संबंधों को लेकर कई घोषणाएं की गई थीं, जिनमें सीमा पर शांति बनाये रखना, व्यापार के लिए बार्डर खोलना और दोनों देशों के बीच जल्द से जल्द सीधी उड़ान शुरू करना आदि शामिल था।
गलवान घाटी में झड़प के बाद आया था तनाव

उल्लेखनीय है कि, जून 2020 में पूर्वी लद्दाख की गलवान घाटी में हुई सैन्य झड़प के बाद से दोनों देशों के बीच तनाव बढ़ गया था, जिससे कुछ व्यापार और सीधी उड़ानें भी स्थगित कर दी गई थीं। अब दोनों देश अपने संबंधों को एक बार फिर से सुधारने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं। इसके लिए सैन्य स्तर से लेकर पीएम स्तर तक की बातचीत की जा रही है।
पुतिन से मिलेंगे पीएम मोदी
बता दें कि, बीते सोमवार को भारत से रवाना होने से पहले उम्मीद जताई गई थी कि, पीएम मोदी रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से भी मुलाकात करेंगे। रविवार को एससीओ शिखर सम्मेलन की शुरुआत से पहले शी जिनपिंग द्वारा आयोजित भोज से होगी। एक रिपोर्ट के अनुसार, चीन में हो रहे इस एससीओ प्लस शिखर सम्मेलन में 20 विदेशी नेता शिरकत करेंगे। चीन इस साल भारत, ईरान, कजाकिस्तान, रूस, किर्गिस्तान, उज्बेकिस्तान, पाकिस्तान, ताजिकिस्तान, बेलारूस और चीन वाले 10 सदस्यीय समूह का अध्यक्ष है।
ये नेता पहुंचे चीन
रिपोर्ट के अनुसार रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन भी इस शिखर सम्मेलन में शामिल होंगे। भारत के पीएम नरेंद्र मोदी, नेपाल के पीएम केपी शर्मा ओली, पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ व मालदीव के राष्ट्रपति मोहम्मद मुइज्जू शिखर सम्मेलन में भाग लेने के लिए चीन पहुंच चुके हैं। नेताओं का शिखर सम्मेलन सोमवार को होगा।
इन मुद्दों को रखेंगे जिनपिंग

इस शिखर सम्मेलन की बारे में बात करते हुए चीन के सहायक विदेश मंत्री लियू बिन ने कहा था कि, यह अब तक का सबसे बड़ा एससीओ होगा। ये इस साल चीन में आयोजित होने वाले राष्ट्राध्यक्षों और घरेलू कूटनीति के सबसे महत्वपूर्ण आयोजनों में से एक होगा। बिन का कहना था कि, चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग शंघाई शिखर सम्मेलन में अपने मुख्य भाषण में भावना को आगे बढ़ाने, समय के लिहाज से मिशन को आगे बढ़ाने और लोगों की अपेक्षाओं पर खरा उतरने के लिए एससीओ के लिए चीन के नए दृष्टिकोण और प्रस्तावों पर विस्तार से अपनी बात रखेंगे।
3 सितंबर को होगी सैन्य परेड
रिपोर्ट है कि दो दिवसीय शिखर सम्मेलन के बाद बीजिंग में 3 सितम्बर को आयोजित होने वाली चीन की सबसे बड़ी सैन्य परेड भी होगी, जिसे देखने के लिए अधिकांश देशों के नेता वहां रुकेंगे। यह परेड जापानी आक्रमण के विरुद्ध चीनी जन प्रतिरोध युद्ध और विश्व फासीवाद विरोधी युद्ध में विजय की 80वीं वर्षगांठ के उपलक्ष्य में आयोजित की जा रही है।
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