
नई दिल्ली। Afghanistan Airbase: सामरिक दृष्टि से भारत के लिए सबसे महत्वपूर्ण माने जाने वाले अफगानिस्तान स्थित बगराम एयरबेस पर अमेरिका, पाकिस्तान और चीन काफी समय से नजरें गड़ाए हुए हैं, लेकिन भारत ने इस ओर कभी ध्यान तक नहीं दिया। अमेरिका जहां एक बार फिर से इस एयरबेस को अपने कब्जे में लेना चाहता है। वहीं, चीन और पाकिस्तान भी इस पर कब्जा चाहते हैं क्योंकि इस एयरबेस से पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर यानी पीओके और बलूचिस्तान की दूरी बेहद कम है और चीन की परमाणु प्रयोगशाला भी इससे काफी नजदीक है। इसके अलावा इस एयरबेस से मध्य एशिया के लिए एक रास्ता भी खुलता है।
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तेहरान से मात्र 1644 किमी दूर है बगराम

एयर कैल्कुलेटर नाम की एक वेबसाइट के अनुसार, ईरान की राजधानी तेहरान की दूरी भी इस एयरबेस से काफी कम है। तेहरान यहां से 1644 किलोमीटर की दूरी पर है। आपको बता दें कि, इन दिनों परमाणु कार्यक्रम को लेकर अमेरिका और पश्चिमी देशों की ईरान से काफी तनातनी भी देखने को मिल रही है।
एक रिपोर्ट के मुताबिक, बगराम एयरबेस से चीन की परमाणु प्रयोगशाला की दूरी महज दो हजार किलोमीटर है। ये प्रयोगशाला चीन के उत्तर पश्चिम में ‘लोप नूर’ नाम के क्षेत्र में स्थित है। यहां सड़क या अन्य मार्ग से कई घंटे लगते हैं, लेकिन लॉकहीड एसआर- 71 ब्लैकबर्ड जैसे आधुनिक सैन्य विमान मात्र एक घंटे में ये दूरी तय करने में सक्षम हैं। रिपोर्ट में ये भी कहा गया है कि, ये एयरबेस अफगानिस्तान की राजधानी काबुल के उत्तर में 60 किमी की दूरी पर स्थित परवान प्रान्त में है।
सोवियत संघ ने इसे 1950 के दशक में बनाया था
इस एयरबेस को सोवियत संघ ने 1950 के दशक में बनाया था और जब 1980 के दशक में उन्होंने अफगानिस्तान पर कब्जा किया था, तब इस एयरबेस को अपना मुख्य अड्डा बनाया था। इसके बाद जब अमेरिका ने 2001 में इस देश को तालिबानी शासन से मुक्त किया था, तो उसने इस एयरबेस पर अपना नियंत्रण स्थापित कर लिया था। हालांकि उस वक्त ये सैन्य अड्डा काफी बदहाल स्थिति में था, जिसे अमेरिका ने फिर से संचालन युक्त बनाया। 77 वर्ग किमी में फैला ये एयरबेस अमेरिका का सबसे मजबूत सैन्य अड्डा था, जिसे उसने स्टील और कंक्रीट से बनाया था।
भारत को अपनानी चाहिए आक्रामक रणनीति
एक्सपर्ट्स की मानें, तो ये एयरबेस मध्य एशिया में अमेरिकी हवाई दबदबे के लिए भी काफी अहम है। यही वजह है कि, अमेरिका इसे फिर से पाना चाहता है। साथ ही ये एयरबेस भारत के लिए काफी महत्वपूर्ण है, लेकिन भारत ने अभी तक इसे लेकर कोई दिलचस्पी नहीं दिखाई है। एक्सपर्ट्स का मानना है कि, भारत को इस पर आक्रामक रणनीति अपनानी चाहिए, क्योंकि अगर इस एयरबेस पर किसी और देश का कब्जा हो जायेगा, तो भारत के लिए चुनौतीपूर्ण होगा।
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सोशल मीडिया पर वायरल हुई थी खबर

बता दें कि, हाल ही में सोशल मीडिया पर एक खबर खूब वायरल हुई थी, जिसमें स्पष्ट रूप से कहा जा रहा था कि, अफगानिस्तान की तालिबान सरकार इस एयरबेस को भारत को सौंपने के लिए तैयार है, लेकिन बाद में खुद अफगानिस्तान सरकार ने इस खबर का खंडन किया और इसे आधारहीन बताया। ये भी कहा कि, यहां की तालिबान सरकार ने न तो भारत को इस तरह का कोई प्रस्ताव दिया है और न ही भारत की तरफ से इस तरह की कोई इच्छा जताई गई है। अब आइए जानते है इस बारे में डिफेंस एक्सपर्ट क्या कहते हैं, क्या बगराम एयरबेस भारत के लिए अहम है और अगर है तो कितना?, क्या इसे लेने की पहल भारत को करनी चाहिए?
10 हजार से अधिक सैनिक रह सकते हैं यहां
एक मीडिया चैनल से बात करते हुए डिफेंस एनालिस्ट लेफ्टिनेंट कर्नल (रि.) जेएस सोढ़ी ने बताया, अफगानिस्तान में स्थित बगराम एयरबेस कई किलोमीटर में है और ये काफी लंबी और मजबूत दीवारों से घिरा हुआ है और काफी सुरक्षित भी है। इसके अंदर कोई भी बाहरी शख्स प्रवेश नहीं कर सकता। यहां इतने बैरक और क्वाटर्स बने हुए कि 10 हजार से अधिक सैनिक एक साथ रह सकते हैं। इसके दो रनवे में से एक ढाई किलोमीटर से अधिक लंबा है। सोढ़ी बताते हैं कि, पिछले तीन वर्ष से तालिबान की सेनाएं अमेरिकी सैनिकों के छोड़े गए सैन्य साज़ो-सामान का इस्तेमाल करते हुए इसी बगराम एयरबेस में सैनिक परेड और दूसरे समारोह आयोजित कर रही हैं।
ट्रंप के बयान से उपजा विवाद
उन्होंने बताया कि, हाल ही में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ब्रिटेन की यात्रा की थी, तो वहां भी उन्होंने कहा था कि, दुनिया के सबसे बड़े एयरबसों में बगराम एयरबेस का नाम आता है, जिसे हमने अफगानिस्तान सरकार को वापस दे दिया था, लेकिन अब हम इसे वापस पाना चाहते हैं क्योंकि यह उस जगह से महज एक घंटे की दूरी पर है जहां चीन अपने परमाणु हथियार बनाता है। ट्रंप ने बताया, जब अमेरिकी सेना ने इस एयरबेस छोड़ा था, तब यहां बड़े पैमाने पर सैन्य उपकरण, सैनिक वाहन और गोला बारूद रह गए थे। अमेरिकी राष्ट्रपति के इस बयान के बाद से ही इस सैन्य अड्डे को लेकर विवाद उत्पन्न हो गया।
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मध्य एशिया में होगी पकड़ मजबूत

जेएस सोढ़ी का कहना है कि, ताजिकिस्तान के आयनी एयरबेस के हाथ से जाने के बाद अब भारत के लिए बगराम एयरबेस बेहद अहम है। अगर ये एयरबेस भारत के कब्जे में आ जाता है, तो मध्य एशिया में उसकी पकड़ मजबूत होगी, क्योंकि एक तरफ तो यहां से ईरान का चाबहार बन्दरगाह काफी नजदीक है, जो भारत का निवेश स्थल है। वहीं, दूसरी तरफ पाकिस्तान और बलूचिस्तान पर भी भारत आसानी से नजर रख सकेगा और पाकिस्तान की नापाक हरकतों का तत्काल मुंहतोड़ जवाब दे सकेगा। साथ ही पाकिस्तान को हमेशा ये डर बना रहेगा कि, उसके खिलाफ अफगानिस्तान की जमीन से भारत जैसा बड़ा खतरा मौजूद है।
बेहतर हैं भारत-अफगान के रिश्ते
डिफेंस एक्सपर्ट सोढ़ी की मानें तो, भारत को इस मामले में आक्रामक रणनीति अपनानी चाहिए और बगराम एयरबेस को अपने कब्जे में लेने के लिए पहल करनी चाहिए। उन्होंने कहा, वर्तमान समय में भारत और अफगानिस्तान के संबंध बेहतर हैं, ऐसे में उसे इस एयरबेस को लेने के ज्यादा मुश्किल नहीं आएगी। उन्होंने कहा, हाल ही में अफगानिस्तान के विदेश मंत्री आमिर खान मुत्ताकी भी भारत दौरे पर आये थे और दोनों देशों के बीच अच्छे संबंध का भरोसा भी दिलाया था। आमिर खान मुत्ताकी के भारत दौरे के दौरान ही अफगानिस्तान ने एक बड़ा फैसला भी लिया था और कहा था कि जल्द ही तालिबान शासन की तरफ से भारत में एक राजनयिक की भी नियुक्ति की जाएगी।
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