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American F-16: अमेरिका के खिलाफ एक्शन में चीन, F-16 को बाजार से बाहर करने की बना रहा योजना

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American F-16

बीजिंग। American F-16:  तकनीक के क्षेत्र में दुनिया में पहले नंबर पर आने वाला चीन अपने लड़ाकू विमान जे-10 को अमेरिकी एफ-16 के मुकाबले खड़ा करने की कोशिश कर रहा है। वह उन देशों से जे-10 खरीदने की पेशकश कर रहा है जो एफ-16 लड़ाकू विमान खरीदने में रुचि रखते हैं। दरअसल, अमेरिका के एफ-16 लड़ाकू विमानों का इस्तेमाल कई देश कर रहे हैं। ये युद्ध में भी खुद को साबित कर चुके हैं।

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J-10 को रिप्लेस करने में जुटा चीन

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वहीं, चीनी लड़ाकू विमान आम तौर पर युद्ध में फेल हो रहा हैं। इसका ताजा उदाहरण, भारत-पाकिस्तान संघर्ष  है। इस लड़ाई में चीन एक जेट फाइटर 10 अपनी उपयोगिता साबित नहीं कर सके। वहीं,अमेरिका का एफ-16 लड़ाकू विमान शीतयुद्ध के दौरान से अमेरिकी प्रभुत्व का प्रतीक रहा हैये इराक से ताइवान तक अमोरिका की जियो-पॉलिटिकल पावर को बढ़ा रहा है, लेकिन अब चीन अमेरिकी लड़ाकू विमान को अपने J-10 से रिप्लेस करने की कोशिश में जुटा है।

J-10 लड़ाकू विमान एक संपूर्ण पैकेज 

चीनी एक्सपर्ट्स कहते हैं कि, पाकिस्तान का J-10 खरीदने का फैसला इस पर निर्भर करता है कि वह अमेरिकी एफ-16 फाइटर जेट को अपग्रेड नहीं कर सकता। इसके अतिरिक्त, यदि अमेरिका भारत को एफ-21 एडवांस फाइटर जेट की पेशकश करता है और भारत इसे खरीदने का निर्णय लेता है, तो पाकिस्तान के पास एक अत्याधुनिक फाइटर जेट नहीं रहेगा। चीनी विशेषज्ञों का कहना है कि, दूसरे देश सिर्फ फाइटर जेट बेचते हैं, जबकि चीन J-10 लड़ाकू विमान को एक संपूर्ण पैकेज के साथ देता है, जिसमें इंटीग्रेटेड कमांड एंड कंट्रोल सिस्टम, मिसाइल सूट और इलेक्ट्रॉनिक युद्ध घटक आदि शामिल हैं।

1998 में भरी थी पहली उड़ान

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जे-10 लड़ाकू विमान का निर्माण चीनी कंपनी चेंग्दू एयरक्राफ्ट कॉरपोरेशन ने किया है। पश्चिमी मीडिया में इसे ‘Vigorous Dragon’ के नाम से जाना जाता है। यह एक बहुउद्देशीय लड़ाकू विमान है, जिसने वर्ष 1998 में पहली बार उड़ान भरी थी। इसके बाद 2005 में इसे चीन की वायुसेना में शामिल किया गया था। ये हद तक अमेरिकी एफ-16 और इजरायली Lavi के जैसे ही डिजाइन किया गया है। ऐसा भी कहा जाता है कि, इजरायली Lavi के डिजाइन और तकनीक को चोरी कर इसे विकसित किया गया है, क्योंकि एक समय में Lavi प्रोजेक्ट पर चीन और इजरायल ने कुछ महीनों तक साथ काम किया था।

बेसिक वर्जन भी शामिल

चीन के J-10 फाइटर जेट के कई वैरिएंट हैं। इनमें एक बेसिक वर्जन शामिल है, जो सिर्फ हवा से हवा में मार करता है। J-10B में AESA रडार, इन्फ्रारेड सर्च और ट्रैक (IRST), और RAM कोटिंग शामिल है। सबसे एडवांस वर्जन J-10C में AESA रडार, हाइपरसोनिक एयर-टू-एयर मिसाइल PL-15, प्रिसिजन-गाइडेड म्यूनिशन (PGM) क्षमता, और स्वदेशी WS-10 इंजन है। पाकिस्तान J-10C का ही उपयोग करता है।

चीन ने पाकिस्तान को दी PL-15 BVR मिसाइलें

पाकिस्तान जिस J-10C का उपयोग करता है, उसमें एयर-टू-एयर लड़ाई के लिए PL-10 (WVR), PL-12, और PL-15 (BVR) मिसाइलें शामिल हैं। इसके अलावा, यह जमीनी ठिकानों पर हमले के लिए लेजर गाइडेड बम और GPS बम भी ले जा सकता है। इसकी अधिकतम स्पीड 2.2 मैक, यानी लगभग 2700 किलोमीटर प्रति घंटे होने का दावा किया जाता है। J-10C की रेंज लगभग 1850 किलोमीटर है, और इसका लड़ाई करने का रेडियस 500 से 600 किलोमीटर के बीच है। हाल ही में, चीन ने पाकिस्तान को PL-15 BVR मिसाइलें प्रदान की हैं, जिससे इसकी क्षमता में और वृद्धि हुई है।

WS-10 इंजन की विश्वसनीयता पर उठे सवाल

हालांकि, J-10C कोई स्टील्थ फाइटर जेट नहीं है, और इसका डिजाइन अपेक्षाकृत पुराना है। भारतीय राफेल के मुकाबले, यह एक पुराना प्लेटफॉर्म माना जाता है, और इसके WS-10 इंजन की विश्वसनीयता पर भी कई सवाल उठ चुके हैं। इसकी एक यूनिट की कीमत लगभग 35 से 45 मिलियन डॉलर के बीच है, जिससे पाकिस्तान जैसे विकासशील देश इसे खरीदने में सक्षम हैं। पाकिस्तान ने चीन से 25 J-10C खरीदने के लिए लगभग 1.5 अरब डॉलर की डील की थी।

 

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