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Bharatiya Bhasha Divas: भारतीय भाषा दिवस का आयोजन भाषाई सौहार्द को करेगा सुदृढ़- न्यायमूर्ति आर महादेवन

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  • भारतीय विधिज्ञ परिषद,नई दिल्ली के सभागार में आयोजित हुआ भारतीय भाषा दिवस

 नई दिल्ली। Bharatiya Bhasha Divas:  भारतीय भाषा अभियान और भारतीय विधिज्ञ परिषद(बीसीआई ) के संयुक्त तत्त्वाधान में भारतीय भाषा दिवस का कार्यक्रम भारतीय विधिज्ञ परिषद, नई दिल्ली के सभागार में आयोजित हुआ। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि न्यायमूर्ति सर्वोच्च न्यायालय आर. महादेवन, मुख्य वक्ता डॉ. अतुल कोठारी व विशिष्ट अतिथि जयदीप रॉय अधिवक्ता सर्वोच्च न्यायालय एवं राष्ट्रीय संयोजक भारतीय भाषा अभियान की गरिमामई उपस्थिति में राघवेंद्र शुक्ला संयोजक भारतीय भाषा अभियान दिल्ली प्रांत व सहसंयोजक कृष्ण कुमार शर्मा के आयोजकत्व में आयोजित किया गया।

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11 दिसंबर को हुआ था चिन्नास्वामी का जन्म

कार्यक्रम का शुभारंभ मां सरस्वती व चिन्नास्वामी जी के चित्र पर पुष्प अर्पित, दीप प्रज्वलन के बाद राष्ट्रगीत से हुआ। तदुपरांत अतिथियों का स्वागत अभिनंदन किया गया। इस मौके पर भारतीय भाषा अभियान के राष्ट्रीय संयोजक व विशिष्ट अतिथि जयदीप रॉय ने अपने उद्बोधन में बताया कि 11 दिसंबर 1882 को महान स्वतंत्रता संग्राम सेनानी एवं महान कवि विचारक समाज सुधारक चिन्नास्वामी सुब्रमण्यम भारती का जन्म हुआ था जिनके जन्मदिवस पर केंद्र सरकार ने 11 दिसंबर को भारतीय भाषा दिवस मनाए जाने का निर्णय लिया है।

बहु भाषी देश है भारत

इसी क्रम में संपूर्ण भारत में भारतीय भाषा दिवस को उत्सव के रूप में मनाया जा रहा है। श्री राय ने कहा कि भारतीय भाषा दिवस को मनाने की आवश्यकता भारत में भाषाई समन्वय के उद्देश्य से है। भारत वर्ष एक बहू भाषाई देश है। यह प्रत्येक व्यक्ति के द्वारा अपनी मातृ‌भाषा के अतिरिक्त एक अन्य भारतीय भाषा के अध्ययन से ही संभव है।

और भी भाषाएं सीखने पर बल

इसके साथ ही सुब्रमण्यम भारती के भाषाई योगदान के बारे में बताया तथा आग्रह किया कि अपनी मातृ‌भाषा के अतिरिक्त एक अन्य भारतीय भाषा को सीखें। मुख्य वक्ता अतुल भाई कोठारी ने बताया कि भारतीय भाषाएं जोड़ने का काम करती हैं। इस कार्य की प्रेरणा सुब्रह्मण्यम भारती के जीवन से मिलती है। उन्होंने मेरा देश मेरी भाषा तथा एक देश एक संस्कृति के समन्वय तथा मातृ‌भाषा के अतिरिक्त अन्य राज्यों की भाषा सीखने पर बल दिया।

मातृभाषा में हस्ताक्षर का संकल्प

उन्होंने अंत में कहा कि देश की विविध भाषाएं एक परिवार की भाषाएं हैं। सभी को अपने हस्ताक्षर मातृभाषा में करने का संकल्प लेने की बात कही। मुख्य अतिथि सर्वोच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति आर.महादेवन ने अपने उद्बोधन में कहा कि महान स्वतंत्रता संग्राम सेनानी, महाकवि चिन्नास्वामी सुब्रमण्यम भारती जी ने अपना संपूर्ण जीवन भारतीय भाषाओं, संस्कृति और स्वतन्त्रता के लिए समर्पित किया।

14 दिवसीय पखवाडा संपन्न 

बिना भाषाई स्वाभिमान के राजनीतिक स्वतन्त्रता संभव नहीं। मातृभाषा के बिना जीवन संभव नहीं। भारतीय भाषाओं के विविधता का संरक्षण आवश्यक है। सभी भाषाएं भारत की भाषाएं हैं। सभी भाषाओं का आदर एवं उनमें समन्वय आवश्यक है। भारतीय भाषा दिवस का आयोजन भाषाई सौहार्द को सुदृढ़ करेगा। कार्यक्रम के अध्यक्ष राघवेंद्र शुक्ल के धन्यवाद ज्ञापन के पश्चात राष्ट्रगान के साथ भारतीय भाषा दिवस के उपलक्ष्य में आयोजित 14 दिवसीय पखवाड़ा कार्यक्रम सम्पन्न हुआ।

 

 

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