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रायबरेली पहुंचे राहुल गांधी ने खोली सिस्टम की पोल, दिलाया मजबूत नेता प्रतिपक्ष का एहसास

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लखनऊ। लोकसभा नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी (Rahul Gandhi) मंगलवार को पूरे रौ में दिखे। बिना राजनीति की बात किए उन्होंने एक बड़ा राजनीतिक संदेश दे दिया। उनका रायबरेली से जुड़ी 410 करोड़ रुपये की परियोजनाओं की जांच कराने का निर्देश देना और महिला हेल्पलाइन पर कॉल करना ये सब सियासी दांवपेंच हैं। ऐसा करते हुए उन्होंने न सिर्फ सरकारी तंत्र को बेनकाब किया, बल्कि विपक्ष की भूमिका निभाकर अपनी ताकत का एहसास दिलाने की भी कोशिश की। यह पूरी कवायद किसी न किसी तरह से अपनी राजनीतिक स्थिति मजबूत करने की उनकी रणनीति का हिस्सा है।

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जनता से रिश्ता मजबूत करने की कवायद में जुटे

rahul gandhi

इससे पहले जब वे अमेठी से सांसद थे तो आमतौर पर प्रशासनिक बैठकों से बचते रहते थे, लेकिन रायबरेली से सांसद चुने जाने के बाद से वह लगातार स्थानीय लोगों के  साथ अपने रिश्ते को मजबूत करने की कोशिश में जुटे हैं। यहां युवक की हत्या होने पर घटनास्थल पर पहुंचते हैं तो मंगलवार को दिशा की मीटिंग में शामिल होने के लिए आते हैं।  इस दौरान उन्होंने उपचुनाव को लेकर न तो कार्यकर्ताओं के साथ बैठक की और न ही कोई जनसभा की।

महिला हेल्प लाइन पर लगाई कॉल 

यह उनकी राजनीतिक रणनीति का भी हिस्सा है। उन्होंने दिशा बैठकों और शहीद चौक एवं रोड के उद्घाटन कार्यक्रम में भाग लेकर सियासी जमीन पर उतरने की रणनीति को आगे बढ़ाया ह81 पर कॉल लगा दी।  तीन बार कॉल करने के बाद भी जब फोन नहीं उठा तो अफसरों को लताड़ लगा दी। इसके साथ ही उन्होंने विभिन्न कार्यों से जुड़ी 410 करोड़ की 182 परियोजनाएं गुणवत्ता की जांच कराने के निर्देश दिए। अपने इस दौरे के दौरान राहुल ने उज्ज्वला और मनरेगा  योजना के लाभार्थियों की रिपोर्ट तलब की। अपने इन कामों से वे न सिर्फ सरकारी सिस्टम की पोल ही नहीं खोलते दिखे बल्कि खुद के चाहने वालों को यह भरोसा दिलाने की कोशिश है कि वे हर स्तर पर संघर्ष के लिए तैयार हैं।

सोशल मीडिया पर लिखा- और गहरा हुआ रिश्ता

rahul gandhi

राजनीतिक विशेषज्ञों का कहना है कि राहुल गांधी लगातार खुद को बदल रहे हैं। हालांकि उत्तर प्रदेश में कांग्रेस के केवल दो विधायक और छह सांसद हैं, लेकिन उसकी रणनीति यह संकेत देती है कि वह विपक्ष की भूमिका निभाने के लिए पूरी तरह से तैयार हैं। मंगलवार को राहुल गांधी की गतिविधियां कहीं न कहीं उस राजनीतिक कदम के लिए प्रेरणा हैं जिसमें वह समय-समय पर कुली या मोची से भी मिलने से नहीं कतराते। यही वजह है कि रायबरेली से लौटते ही वे सोशल मीडिया पर लिखते हैं कि रायबरेली से मेरा रिश्ता, चाहे कितना भी पुराना क्यों न हो, हर यात्रा के साथ और गहरा होता जाता है। क्षेत्र के सभी निवासी एक साथ आए, बहुत प्यार दिया और पूरे हक के साथ अपनी समस्याएं बताईं।

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