
नई दिल्ली। Parliament Winter Session: संसद के शीतकालीन सत्र 28 नवंबर का चौथा दिन भले ही विपक्ष के हंगामे की भेंट चढ़ गया और कोई कार्रवाई नहीं हो सकी, लेकिन गुरुवार को सदन स्थगित होने से पहले एक गंभीर घटना घटी। इसमें लोकसभा में वक्फ बिल की संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) के विस्तार का प्रस्ताव पारित हो गया। जेपीसी सत्र के पहले सप्ताह के आखिरी दिन शुक्रवार को वक्फ विधेयक पर अपनी रिपोर्ट संसद में पेश करने वाली थी। यह मौजूदा बैठक के एजेंडे में भी था, लेकिन जीपीए में प्रतिनिधित्व करने वाले विपक्षी दलों के सांसदों ने कार्यकाल बढ़ाने की मांग की। हालांकि, कमेटी की अध्यक्षता करने वाले बीजेपी सांसद जगदंबिका पाल ने कहा कि हमारी रिपोर्ट तैयार है।
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अब सत्र के अंतिम दिन पेश होगा बिल
गुरुवार को संसद सत्र की शुरुआत प्रश्नकाल से हुई, लेकिन विपक्षी दल जोर-शोर से अडाणी रिश्वत कांड और संभल कांड पर चर्चा करने की मांग करने लगे। विपक्षी दलों के हंगामे को देखते हुए लोकसभा स्पीकर ने सदन की कार्यवाही दोपहर 12 बजे तक के लिए स्थगित कर दी। दोपहर बाद जब संसदीय कार्रवाई फिर से शुरू हुई तो जेपीसी के प्रमुख जगदंबिका पाल ने और समय की मांग करते हुए कार्यकाल बढ़ाने से संबंधित प्रस्ताव लोकसभा में पेश किया जिसे पारित कर दिया गया। जेपीसी अब चालू शीतकालीन सत्र के पहले सप्ताह के अंतिम दिन यानी 29 नवंबर की बजाय बजट सत्र 2025 के अंतिम दिन अपनी रिपोर्ट सदन में पेश करेगी।
किरण रिजिजू ने विपक्ष की निंदा की
वहीं, वक्फ बिल पर बनी जेपीसी का कार्यकाल बढ़ाने का प्रस्ताव पारित होने के बाद संसदीय मंत्री किरण रिजिजू ने विपक्ष के व्यवहार की निंदा की। किरेन रिजिजू ने कहा कि विपक्ष के अभी नेता और बिजनेस एडवाइजरी कमेटी के सदस्यों ने जो भी बिल आने वाले हैं, उनके लिए समय सीमा निर्धारित की थी। हमने ये भी आग्रह किया था कि जो भी बिल आने हैं उन पर चर्चा के लिए उचित समय दिया जाए। रिजजू ने कहा, इसके अलावा जो अलग-अलग मुद्दे आने वाले हैं, उन पर भी चर्चा के लिए अलग से नियम बने हुए हैं। यहां कांग्रेस पार्टी और उसके सहयोगियों ने हंगामा करके अपने ही बनाए रूल को तोड़ने का जो काम किया है, मैं इसकी निंदा करता हूं, ये सही नहीं है, ये पूरी तरह से गलत है।
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