Home » राज्य » Cloudburst Tragedy in Uttarakhand: उत्तरकाशी के धराली में भारी तबाही, कई मौतें, 50 से अधिक लोग लापता

Cloudburst Tragedy in Uttarakhand: उत्तरकाशी के धराली में भारी तबाही, कई मौतें, 50 से अधिक लोग लापता

[the_ad id="14540"]
Cloudburst Tragedy in Uttarakhand:

देहरादून। Cloudburst Tragedy in Uttarakhand: उत्तराखंड के उत्तरकाशी जिले के धराली गांव में 5 अगस्त को दोपहर करीब 1:45 बजे एक भीषण प्राकृतिक आपदा ने तबाही मचा दी। यहां खीर गंगा नदी के जलग्रहण क्षेत्र में आए सैलाब ने मात्र 34 सेकंड में धराली गांव को मलबे में तब्दील कर दिया। ये गांव पानी के तेज बहाव की चपेट में आया और बह गया। इस दैवीय आपदा में अब तक चार लोगों की मौत होने की खबर है। वहीं, 50 से अधिक लोग लापता बताए जा रहे हैं। कई घर, होटल और दुकानें पूरी तरह से तबाह हो गए हैं।

इसे भी पढ़ें- Ankita Bhandari Murder Case: अंकिता हत्याकांड में आया कोर्ट के फैसला, अंसतुष्ट माता-पिता बोले- हाईकोर्ट जाएंगे

बादल फटने का कारण

हालांकि, प्रारंभिक तौर पर इस घटना को बादल फटने का परिणाम बताया गया, लेकिन देहरादून मौसम विभाग ने इसे बादल फटने की घटना मानने से इनकार किया है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह आपदा किसी ऊपरी इलाके में झील के टूटने या ग्लेशियर के तेजी से पिघलने के कारण हो सकती है। मौसम विभाग के अनुसार, उस दिन उत्तरकाशी में केवल हल्की से मध्यम बारिश दर्ज की गई, जो बादल फटने की परिभाषा से मेल नहीं खाती। इस घटना ने वैज्ञानिकों के सामने यह सवाल खड़ा कर दिया है कि ऐसी आपदाओं की सटीक भविष्यवाणी आखिर क्यों नहीं हो पा रही है।

धराली में मची तबाही

धराली, गंगोत्री धाम से मात्र 18 किमी और हर्षिल से 7 किमी दूर बसा एक छोटा सा गांव है, जो समुद्र तल से 2,745 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है। यह चारधाम यात्रा मार्ग का एक महत्वपूर्ण पड़ाव है, जहां कई होटल, रेस्टोरेंट और होमस्टे मौजूद हैं। इस आपदा में 20-25 होटल और होमस्टे पूरी तरह नष्ट हो गए, जिनमें से 5 होटल पूरी तरह बह गए। खीर गंगा नदी में आए सैलाब के साथ बड़े-बड़े पत्थर और मलबा नीचे आया, जिसने गांव को तहस-नहस कर दिया। स्थानीय लोगों और पर्यटकों में दहशत का माहौल है, क्योंकि कई लोग मलबे में दबे हो सकते हैं।

राहत और बचाव कार्य

Cloudburst Tragedy in Uttarakhand:

आपदा की सूचना मिलते ही SDRF, NDRF, सेना और ITBP की टीमें तुरंत मौके पर पहुंच गईं और राहत कार्य शुरू कर दिए। अब तक 150 से अधिक लोगों को सुरक्षित निकाला जा चुका है, लेकिन लापता लोगों की तलाश अभी भी जारी है। उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने स्थिति पर कड़ी नजर रखने और युद्ध स्तर पर राहत कार्य करने के निर्देश दिए हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी सीएम धामी से फोन पर बात कर स्थिति का जायजा लिया और हर संभव मदद का आश्वासन दिया।

बार-बार क्यों हो रही हैं ऐसी आपदाएं?

उत्तराखंड और हिमाचल जैसे हिमालयी राज्यों में भारी बारिश, भूस्खलन और फ्लैश फ्लड की घटनाएं हाल के वर्षों में बढ़ी हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि जलवायु परिवर्तन, अनियंत्रित निर्माण और ग्लेशियरों के पिघलने जैसे कारक इन आपदाओं को और गंभीर बना रहे हैं। पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने इस घटना को हिमालयी क्षेत्र के लिए खतरे की घंटी बताया और राष्ट्रीय स्तर पर नीति बनाने की जरूरत पर जोर दिया।

सीएम योगी ने जताई संवेदना

Cloudburst Tragedy in Uttarakhand:

इस त्रासदी पर देश भर से संवेदनाएं व्यक्त की जा रही हैं। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रभावित परिवारों के प्रति अपनी संवेदनाएं व्यक्त की हैं। सोशल मीडिया पर इस आपदा के वीडियो और तस्वीरें वायरल हो रहे हैं, जो इस त्रासदी की भयावहता को दर्शाते हैं।

बंद हुईं मुख्य सड़कें 

धराली को उत्तरकाशी और गंगोत्री से जोड़ने वाली मुख्य सड़कें भूस्खलन के कारण बंद हो चुकी हैं, जिससे राहत कार्यों में बाधा आ रही है। मौसम विभाग ने उत्तराखंड के कई हिस्सों में भारी बारिश की चेतावनी भी जारी की है, जिससे स्थिति और जटिल हो सकती है। प्रशासन और बचाव दल प्रभावित लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने और बुनियादी सुविधाएं बहाल करने में जुटे हैं।  इस आपदा ने एक बार फिर उत्तराखंड के हिमालयी क्षेत्रों में प्राकृतिक आपदाओं से निपटने की तैयारियों पर सवाल उठाए हैं। यह समय है कि सरकार और समाज मिलकर ऐसी घटनाओं को रोकने और उनके प्रभाव को कम करने के लिए ठोस कदम उठाएं।

 

इसे भी पढ़ें-  IMD Monsoon Alert: दिल्ली NCR समेत इन राज्यों में भारी बारिश का अलर्ट, धूल भरी आंधी भी ढाएगी कहर

Leave a Comment

[the_ad id="14784"]
[the_ad id="14787"]
Modi 3.0 के पहले आम बजट से मिडिल क्लास को मिलेगी राहत?