
Front-Running Scam: एक तरफ जहां भारतीय शेयर बाजार विदेशी निवेशकों के पैसा निकालने से जूझ रहा है। वहीं दूसरी तरफ केतन पारेख जैसे घोटालेबाजों ने बाजार की छवि को नुकसान पहुंचाया है। सेबी ने हाल ही में धोखाधड़ी के संदेह के बीच केतन पारेख सहित तीन व्यक्तियों को भारतीय शेयर बाजार से प्रतिबंधित कर दिया है। उन पर कुछ ही मिनटों में अवैध रूप से 65.77 करोड़ रुपये का मुनाफा कमाने का आरोप है। हम आपको बताते हैं आखिर क्या है ये फ्रंट रनिंग घोटाला और इससे कैसे स्कैम किया जाता है।
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मिनटों में होती है करोड़ों की कमाई
फ्रंट-रनिंग एक तरह का स्कैम है, जिसका इस्तेमाल कर शेयर बाजार में घोटाला किया जाता है। आइए समझते हैं इस धोखाधड़ी को, इसमें ब्रोकर या ट्रेडर को पहले से ही इस बात की जानकारी होती है कि किन शेयरों के डील होगी और वह उस जानकारी का फायदा उठाकर डील से पहले ही उन शेयरों की खरीद फरोख्त कर लेता है। ऐसा कर के ये ब्रोकर या ट्रेडर मिनटों से आसानी से करोड़ों की कमाई कर लेते हैं।
सीधे शब्दों में कहें तो, ये कथित घोटालेबाज एक प्रकार के काले भूत हैं, जो ट्रेडिंग कंपनी को दिखाई नहीं देते हैं, लेकिन हमेशा उसके इर्द-गिर्द ही रहते हैं। केतन पारेख और उनके सहयोगी ऐसे ही काले भूत हैं, जो विभिन्न स्टॉक ब्रोकरेज फर्मों के लिए काम करते हैं और वहां से जानकारी लेकर अवैध रूप से पैसा बनाने लगते हैं।
केतन पारेख ने किया बड़ा स्कैम
बाजार नियामक सेबी के मुताबिक, केतन पारेख का नेटवर्क शेयर बाजार में काफी फैला हुआ है। इस नेटवर्क से अशोक कुमार पोद्दार समेत कई अन्य नाम जुड़े थे। ये लोग कोलकाता स्थित ब्रोकरेज फर्म जीआरडी सिक्योरिटीज और सालासर स्टॉक ब्रोकिंग में काम करते थे। ये सभी लोग उन शेयरों का सौदा करते थे, जिनका भविष्य में टाइगर ग्लोबल करने वाला होता था। इस पूरे घोटाले को कई मोबाइल नंबरों से अंजाम दिया जा रहा था। इस घोटाले का मास्टरमाइंड दरअसल केतन पारेख था, जिसने अपने साथियों के साथ मिलकर घोटाला कर 65 करोड़ रुपये से ज्यादा की कमाई की थी।
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