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Indian Language Day: सुब्रमण्यम भारती के पदचिन्हों पर चलकर उनके आदर्शों को करें आत्मसात-ओम प्रकाश

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  • भाषा केवल संवाद का माध्यम नहीं, बल्कि सामूहिक चेतना का केंद्र बिंदु है- डीएम
  • भारतीय भाषा दिवस पर कलेक्ट्रेट सभागार में आयोजित हुई संगोष्ठी
  • भारतीय भाषा अभियान द्वारा आयोजित किया गया कार्यक्रम

प्रतापगढ़। Indian Language Day: भारतीय भाषा अभियान काशी प्रांत प्रतापगढ़ इकाई के आयोजकत्व में कलेक्ट्रेट सभागार में भारतीय भाषा दिवस संगोष्ठी का आयोजन वरिष्ठ अधिवक्ता राजाराम सरोज की अध्यक्षता में आयोजित किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ अतिथियों द्वारा महाकवि चिन्नास्वामी सुब्रमण्यम भारती व मां सरस्वती के चित्र के समक्ष दीप प्रज्जवलित व पुष्प अर्पित कर राष्ट्रगीत से हुआ। तदुपरांत भारतीय भाषा अभियान के संयोजक महेश कुमार गुप्त ने डीएम शिव सहाय अवस्थी को संविधान की प्रस्तावना व पुष्प गुच्छ भेंटकर स्वागत किया।

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सामूहिक चेतना का केंद्रबिंदु है भाषा

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इसी के साथ राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के विभाग प्रचारक ओम प्रकाश व आईएएस संयुक्त मजिस्ट्रेट अनुष्का शर्मा को पुष्प गुच्छ एंव स्मृति चिन्ह भेंट कर स्वागत किया गया।कार्यक्रम में बतौर मुख्य अतिथि मौजूद डीएम शिव सहाय अवस्थी ने अपने सम्बोधन में कहा कि भारतीय भाषा दिवस भारतीय भाषाओं की समृद्धि, विविधता और सांस्कृतिक आत्मा को सम्मान देने का पर्व है।

इस अवसर पर चिन्नास्वामी का स्मरण विशेष रूप से प्रेरक है, क्योंकि उन्होंने अपने जीवन को भारतीय भाषाओं के संरक्षण, संवर्द्धन और साहित्यिक उन्नयन के लिए समर्पित किया। उनका व्यक्तित्व सादगी, विद्वत्ता और सेवा-भाव का दुर्लभ संगम था। डीएम ने कहा कि चिन्नास्वामी का मानना था कि भाषा केवल संवाद का माध्यम नहीं, बल्कि सामूहिक चेतना का केंद्रबिंदु है, इसी कारण उन्होंने अपनी मातृभाषा तथा अन्य भारतीय भाषाओं में समभाव, सम्मान और परस्पर सीखने की भावना को बढ़ाने में महत्त्वपूर्ण योगदान दिया।

उत्कृष्ट लेखक भी थे चिन्नास्वामी 

एक ओर वे भाषा-जागरूकता के प्रचारक थे, दूसरी ओर उत्कृष्ट लेखक, संपादक और चिंतक भी। उन्होंने भारतीय भाषाओं की विरासत को संरक्षित करने के लिए अनेक आलेख, निबंध, भाषण और साहित्यिक रचनाएं लिखीं, जिनमें भारतीय भाषा-चेतना, लोक-साहित्य, संस्कृति और राष्ट्रीय अस्मिता जैसे विषयों पर गहन विचार मिलता है। उनकी लेखनी सरल, सहज, किंतु प्रभावशाली थी, जिसके माध्यम से वे आम जन तक भाषाई गौरव की भावना पहुंचाते थे।

इस मौके पर बतौर विशिष्ट अतिथि मौजूद संयुक्त मजिस्ट्रेट अनुष्का शर्मा ने भारतीय भाषा के विषय में विस्तृत जानकारी देते हुए कहा कि चिन्नास्वामी सुब्रमण्यम भारती का कृतित्व बहुआयामी था। उन्होंने अपने लेखनी से समाज को जागृत किया और समाज के अंदर विकृतियों को समाप्त करने का अत्यंत सराहनीय प्रयास किया था, उनके कार्यों को भुलाया नहीं जा सकता है।

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महाकवि भारती के नाम से मशहूर थे चिन्नास्वामी 

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कार्यक्रम में बतौर मुख्य वक्ता मौजूद राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के विभाग प्रचारक ओमप्रकाश ने लोगों को सम्बोधित करते हुए कहा कि चिन्नास्वामी सुब्रमण्यम भारती महाकवि भारती के नाम से लोकप्रिय थे तथा आधुनिक तमिल कविता के अग्रदूत थे और उन्हें अब तक के सबसे महान तमिल साहित्यकारों में से एक माना जाता है। महान स्वतंत्रता संग्राम सेनानी चिन्नास्वामी सुब्रमण्यम भारती एक सुप्रसिद्ध भारतीय लेखक कवि और पत्रकार थे तथा तमिलनाडु के समाज सुधारक थे, उनके द्वारा बहुत ही उत्कृष्ट कार्य किया गया था, जिसको शब्दों में बताना बहुत ही अल्प होगा।

ओम प्रकाश ने कहा कि,  भारतीय भाषा दिवस जैसे अवसरों पर उनकी दूरदर्शिता और विचार आज भी प्रासंगिक हैं, क्योंकि वे हमें याद दिलाते हैं की भाषाई विकास केवल शब्दों को संजोने का प्रयास नहीं बल्कि समाज की आत्मा को अक्षुण्ण रखने का संकल्प है। उन्होंने कहा कि चिन्नास्वामी का व्यक्तित्व और कृतित्व भारतीय भाषाओं की उन्नति के पथ पर एक प्रकाश स्तंभ के समान है। भारतीय भाषा दिवस पर उनका स्मरण हमें अपनी भाषाओं के संवर्धन और सम्मान के लिए निरंतर कार्य करने की प्रेरणा देता है।

उन्होंने कहा कि चिन्नास्वामी की कई रचनाएं भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान देशभक्ति और राष्ट्रवाद को जगाने वाले ज्वलंत गीत थे। वर्ष 1908 में ब्रिटिश भारत सरकार द्वारा भारती के खिलाफ उनके क्रांतिकारी गतिविधियों के लिए गिरफ्तारी वारंट जारी किया गया था, जिसके कारण उन्हें पुडुचेरी जाना पड़ा जहां वे 1908 तक रहे ।भारती द्वारा लिखित साहित्य का दायरा बहुत विस्तृत था जिसमें धार्मिक,राजनीतिक और सामाजिक पहलू शामिल थे।सभी को चिन्नास्वामी सुब्रमण्यम भारती के पदचिन्हों पर चलकर उनके आदर्शों को आत्मसात करना चाहिए।

कार्यक्रम में प्रमुख रूप से भारतीय भाषा अभियान के संयोजक महेश कुमार गुप्ता, डीजीसी राजस्व राघवेंद्र सिंह, वरिष्ठ अधिवक्ता राधेश्याम शुक्ल,अभियान के सहसंयोजक अभिषेक शर्मा, शिवेश शुक्ला, प्रदीप पांडेय, आशीष, अनुराग मिश्रा, धीरज मिश्रा, राहुल सिंह, वीर गौरव, आकाश गुप्ता, अरविंद पांडेय, अवनीश शर्मा शिवकुमार पुष्पजीवी, रवि सिंह, परमानंद, दीपू मिश्र, अनिल, संतोष दूबे, कौशलेश त्रिपाठी, विवेक, हरीश सहित आदि अधिवक्ता मौजूद रहे। कार्यक्रम का संचालन अधिवक्ता किरण बाला सिंह ने किया।अंत में अभियान के संयोजक महेश कुमार गुप्ता ने सभी अतिथियों एवं आगंतुकों के प्रति आभार व्यक्त किया। राष्ट्रगान के साथ कार्यक्रम में समापन किया गया।

 

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