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Defence Exports: रक्षा निर्यात क्षेत्र में बज रहा भारत का डंका, अमेरिका, फ्रांस समेत सौ से अधिक देश बने क्लाइंट

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Defence Exports

नई दिल्ली। Defence Exports: कभी दूसरे देशों से हथियार खरीदने वाला भारत आज रक्षा क्षेत्र में तेजी से आगे  बढ़ रहा है। वह न सिर्फ अपने लिए आधुनिक हथियार बना रहा है बल्कि अन्य देशों में भी सप्लाई कर रहा है। आलम ये है कि आज की तारीख में दुनिया भर के सौ से ज्यादा देश भारत से हथियार खरीदते हैं, जिनमें अमेरिका, रूस, इटली, इजराइल और फ़्रांस जैसे ताकतवर देश भी शामिल हैं। ये सभी देश छोटे मोटे हथियार से लेकर बड़ी बड़ी मिसाइलें भी भारत से खरीदते हैं,  जिन्हें वहां की सेनाओं में बीच काफी पसंद किया जाता है।

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 ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल का मिला ऑर्डर 

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भारत ने साल 2024 में फिलीपींस को ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल की पहली खेप निर्यात की थी, जो जनवरी 2022 में हस्ताक्षरित 375 मिलियन डॉलर के सौदे का हिस्सा थीं। फिलीपींस पहला ऐसा देश था जिसने भारत से मिसाइल खरीदी। वहीं इस साल पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद भारत द्वारा लांच किये ऑपरेशन सिन्दूर की सफलता के बाद ब्रह्मोस क्रूज मिसाइल को खरीदने में  दुनिया के 17 से अधिक देशों ने रूचि दिखाई है। ये देश हैं वियतनाम,   ब्रुनेई, थाईलैंड, मलेशिया,  इंडोनेशिया,  कतर, ओमान,  मिस्र, ब्राजील,  सिंगापुर, चिली,  अर्जेंटीना,  वेनेजुएला,  सऊदी अरब,  बुल्गारिया, संयुक्त अरब अमीरात (यूएई), दक्षिण। दरअसल, ब्रह्मोस क्रूज मिसाइल ही थी, जिसका इस्तेमाल कर भारतीय सेना ने पाकिस्तान को घुटनों पर ला दिया था।  

इलेक्ट्रानिक उपकरण और सॉफ्टवेयर की भी मांग

वहीं, वर्तमान समय में भारत से जो-जो देश रक्षा उपकरण और हथियार खरीद रहे हैं, उनमें प्रमुख रूस से आर्मेनिया, फ़्रांस और अमेरिका सबसे आगे हैं। एक रिपोर्ट में कुछ अज्ञात सूत्रों के हवाले से ये भी बताया गया है कि, फ़्रांस भारत से न सिर्फ हथियार खरीदता है बल्कि डिफेन्स सेक्टर से जुड़े और भी कई तरह से इलेक्ट्रानिक उपकरण और सॉफ्टवेयर भी खरीदता है। माना जाता है कि, वह इन उपकरणों का इस्तेमाल अत्याधुनिक फाइटर जेट और अन्य रक्षा उत्पादों में करता है

15 फीसदी बढ़ा निर्यात

Akash Air Defence Missile

इधर, अमेरिका, भारत से जिन रक्षा उपकरणों को खरीदता है। उनमें हेलीकाप्टरों और विमानों के बॉडी पार्ट्स और विंग्स आदि शामिल हैं। भारत से इन उपकरणों की खरीदारी हथियार बनाने वाली दुनिया की सबसे बड़ी कंपनी लॉकहीड मार्टिन और बोइंग करती हैं। दुनिया भर में बढ़ रही रक्षा उत्पादों की डिमांड का ही नतीजा है कि बीते नौ वर्षों में भारत के रक्षा निर्यात में 15 फीसदी की बढ़ोत्तरी हुई है। वित्त वर्ष 24-25 में यह कारोबार 23,622 करोड़ रुपये तक पहुंच चुका है। सरकार ने वर्ष 2029 तक रक्षा निर्यात को 50,000 करोड़ रुपये तक करने का लक्ष्य रखा है

विश्व भर की सेनाओं को पसंद आ रहे सैन्य उपकरण

रिपोर्ट के अनुसार, भारत के जो सैन्य उपकरण और हथियार विश्व भर की सेनाओं को पसंद आते हैं उनमें गोला-बारूद और फ्यूज की एक बड़ी श्रृंखला है, लेकिन आज स्थिति ये है कि गोला बारूद और फ्यूज के अलावा पूरी तरह से निर्मित सैन्य हथियार के आर्डर में भी जबर्दस्त का इजाफा हुआ  है। आइए जानते हैं कौन से हथियार और उपकरण हैं की जिनकी मांग और आर्डर में तेजी से इजाफा हुआ है।   

इनकी बढ़ी मांग

मिसाइल,आर्टिलरी गन, ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज, ड्रोनियर-228 एयरक्राफ्ट, पिनाका रॉकेट, बख्तरबंद वाहन, चेतक हेलीकॉप्टर, इंटरसेप्टर बोट, टॉरपीडो कॉम्बैट बूट , आकाश एयर डिफेंस मिसाइल, रडार, बुलेटप्रूफ जैकेट। 

‘मेड इन इंडिया’ की मच रही धूम

Dornier-228 Aircraft,

आपको बता दें कि ये अब पीएम नरेंद्र मोदी की आत्म निर्भर भारत की देन है। इस बढ़त में देश की निजी कंपनियों का बड़ा योगदान है। बीते वित्त वर्ष  (24-25) में रक्षा सौदे से होने वाली आय उसके एक साल पहले के मुकाबले 18% से बढ़कर डेढ़ लाख करोड़ रुपये से अधिक हो गई है। खबर ये भी है कि रक्षा मंत्रालय ने बीते वित्त वर्ष में दो लाख करोड़ रुपये से अधिक के रक्षा निर्माण का ठेका दिया है, जिनमें से 81 प्रतिशत का ठेका स्वदेशी रक्षा कंपनियों को दिया गया है। इससे स्पष्ट हो रहा है  देश आज रक्षा उत्पादन के क्षेत्र में  तेजी से आत्मनिर्भर हो रहा है और दुनिया के सैन्य बाजार में भी ‘मेड इन इंडिया’ की धूम मच रही है। इससे न सिर्फ भारत की अर्थव्यवस्था मजबूत हो रही है बल्कि दुनिया भारत की ताकत का लोहा भी मान रही है।

 

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